पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/६६१

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बाकि सामाजिक विषयों के समय कर्ता माने जाते हैं। तुगाचीरो ( सी)मा सा एव चोरी। वंश तुल(म.पू.) पहिलका, भुसो। २५ अपरका लोचना। छिलका। तुप (मो.) तुज रक्या मादित्वात्जस्य गः। वैदिक- तखार (पु.) विध्यपर्वतस्य जातिभेद । (हरिवं. ५ अ०) काल पनियोय एकराजर्षि। ये पखिमौकुमारों के महर्षियोन मोहान्ध पोर मदगवित वेणको निग्रह उपासक थे। इनके पुखका नाम भुज्य था। इन्होंने करने मन्थन किया था, उमो समय इस जातिको उत्पत्ति होपान्तर-वामी पलको परास्त करने के लिये अपने सयौ।ये विध्या पहाड़ पर रहते है। ये पसभ्य तथा पुरको जहाज पर चढ़ा कर समुद्र पथमे भेजा था। पामरत और नम्बर या तुखार नामसे प्रसिद्ध है। भुज्य देगे। मार्ग में जब एक बड़ा तूफान पाया और वायु २ देशका प्राचीन नाम । इसका उल्लेख पयवेट नौशाको उलटाने लगो, तब भुज्य ने पखिमोक्षमारोको परिशिष्ट रामायण, महाभारत इत्यादिमें पाया है। अधि खति को घो। पसिनोकुमारोंने संतुष्ट हो कर भुन्धको कांश ग्रन्थों मतसे यह देश हिमालय के उत्तर-पश्चिममें माहित पपनो मौका पर लेकर तीन दिनमें उसके बतलाया गया है। वर्तमान नाम तुखारिस्तान है। यहांके पिताके पास पहुंचा दिया था,। ( १९९१६३) घोड़े प्राचीनकालमें बहुत पच्छे माने जाते थे। तुमा (स. सो.) १ जल, पानो। २ तबके पुत्र तुषार देखो। तुगलक (तुघलक)-सुम्लतान गयाम उहोन बलवन तग्रमा (स.सी.) तुपा-टाप । जल, पानी। एक क्रोतदास । इनके पुत्रने (१४२१९ में) खुपयार तपाइ (स• वि.) ता.राध लिए । उदकवयिता, को मार कर गयाम उद्दीन तुगलक नाम ग्रहण-पूर्वक जलको बढ़ानेवासा । . दिसति मिहासन पर बैठे थे। सवाल तुगलकश नामसे इतिहास में प्रमिद हुए है।ग- नम्वन् (म. मि.) तुजलनिय न्यावादित्वात् जस्व गत्वा हिंसक, हिंसा करनेवाला । लकवशमें जो गलाएर, उनको एक वशावली दो जाती। तरिल सा-ये दिलोके सुलतान पक तमस एक मोत. ___ गयाम, सहोन तगला दाम थे। इनका पूरा नाम मालिक रतियार बहीन (१३२१-१३२५१.) एजबकर धरिला था। उनके समयमै ये पाद- शाहो पायाखाके साकारी अध्यक्ष (नाय चायनीय महम्मदखों ( उलुध खा) सिपहसालार जब गौर ) थे। मुलतान रुक नसहोम फिरोज शाहक समयमें (१३२५-१३५३) इन्हो ने दरबारमें मुखपाव (अमीर-मजविस या पद फिोन तुगलक (१३५१ १३०८) पाया था। इसके बाद इस्तिथाना भवचए। सम्राट के कोनदास जब विद्रोहो हो उठे थे, तब तुधरिनखाने भी विद्रोहमें योग दिया था, किन्तु सुल. महम्मद तुगलक माफरब फतेहा नसीर उद्-दीन् तान रजियाके राजस्व कालमें ये पखशाल यचके पद पर (१३८०-१२८४) भबूबकर' तुगलकशाह नियुक्त हुए । बहराम शाहके राजत्वमें (400 हिजरोमें) (१३०८-६०) गयास उदीन (११८८-८९) तर्को मालिक चौर समोरों ने जब दिल्ली पर पानामन किया, तब मालिक तस्ति खाँ और मालिक कराक्स हुमायू महमूद (१२८४) (१३८४-१४१४) . खां विपक्षदलमें रहकर भो सम्राट के दसमें मिल गये पोर (तैमूर द्वारा दिल्ली-अधिकार ) विधियों से लड़ने खगे, किन्तु गुम शत्रु के मन्द हमें तुगा (स.सी.) तुज वाणुसकात्व वंशलोचन। कारागार मेजे गये। अन्तमें दिखीके डसार होने पर यह पयाम शास पौर काम-विनायक। उनको मुलि हुई। पलाहोन राबवावम, को Vol. Ix. 100 7