पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/६८४

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बहतसे होप इस य हमें तुमकके हाथ लंगे। पोर अष्ट्रियाके राजा हितोय म्याक्सिमिलियनो साथ कानसिलभानियाके राजा ज्ञापोसाको मृत्व होने पर सन्धि स्थापन कर १५४२६० को सन्धिको पहें रहकर अष्ट्रियाक राजा फाहि नण्डने हारो पधिकार किया। दौं। पोछे १५७०१ में इन्होंने परवा पसर्गमन । १५४११०में जो जीतने के लिये सुलेमानने सेना भेजो। प्रदेश और सारपस होप अधिकार कर लिया। बाद १५७० १५४७९०में अष्ट्रियाझे गजा बुडा वा प्रोफैन नगर में ये नियोंसे पक्रिका अन्तर्गत टिमिम दखल साध रोका अधिकांश छोड़ देनेको वाध्य हुए। दो किया। १५७२ १ में तुरुष्काको ऐमो प्रबल नो-सेना भी वर्ष के बाद हरी से कर फिर लड़ाई छिड़ो। पक्ष लेपाण्टोको लड़ाई में अष्ट्रिया के उम-जुपनहारा प्रायः में १५६२१ को एक मन्धि हुई, जिसमें यह खोकार घस हो गई। किया गया कि ममतारो राज्य तुरुको धोन हो, (१५७४-१५८५)-रय मेलिमके पुत्र श्य केवल उत्तरारोराज्य अष्ट्रियाक अधिकारमें रहे और मुराद राजा हुए। चिसदिरके युदमें तुमसम्बाट ने व उसके लिए तुलस-पतिको वार्षिक पर देखें। स एरिबन, अर्जिया और दाविस्तान जय किया। क्रिमिया- सन्धिसे पहले सुलेमानक दोनों पुत्र सलोम पोर बयाजिद के खाँ इस समय रूस हारा पानान्स थे । तुरुष्कसेनापति सबाट को मृत्यु के बाद सिंहासनको लिए सड़ने लगे। भोसमान पाया उनको सहायता पहुंचाने के लिए भागे कोने नगरमें दोनों भाइयांका युद्ध हुआ। युद्ध में परा- बड़े । १५८४१० के युद्धमें उन्होंने निमिया पलटा लिया। जित होकर बयाजिदने अपने चार पुत्रों को साथ ले इनके राजस्वका पन्तिम समय पारस्थ के साथ लड़ाई में पारस देश में पाश्रय लिया। सुलेमामहारा सोम उत्तरा. . बोता। छानसिलभानिया, मसदोरिया, वालासिया धिकारो खोकार किये जाने पर पारस्य के राजाने बया- प्रभृति के राजापोंने इनको स्वाधीनता स्त्रोतार की और जिद और उनके चागे पुत्रों को समादक हाथ मौप दिया। यूरोपीय राजन्यवर्ग के साथ कुछ कुछ सम्बन्ध रखा। सुलेमानके पादेशसे १५५१ में बवाजिद पुत्र समेत गलैण्ड के माध प्रथम वाणिज्य व्यवमायको सन्धि नहीं मार डाले गये । इन के समयमै तुरुकको नौ सेनाको खूब के समयमें हुई थी। पसी बनी था । नौ सेनाके अध्यक्ष सर्वदा रटालो, रोम (१५८५-१००३)-वृतोय मुरादबाद उनके पुत्र पौर अफ्रिका के बन्दरादि पर भाक्रमण किया करते पोर महमद पपने १८ भ्राता और ७ गर्भवतो वेगमको मार- रेगियो, सोरेण्टो, बूजिया, पोरान और मेजर्का होप अधिः कर राज्य सिंहासन पर बैठे। इनका समस्त राजस्व कार भी कर चुके थे। १५. में जारिके निकट काल अष्ट्रिया के साथ युद्ध में बीता किन्तु किसो युद्ध में ये इटलो चौर स्पेनको, एका सेना तरुष्का को नो-सेनामे जय पथवा पराजित न हुए। मिजिलमगड नामक दान- परास्त दुई। एक दूसरो तुर्को सेना लोहित सागर, मिलामनिया गजा विद्रोहो हो कर पुनः उनके वशी- पारस्यसागर पोर भारतसागरमें घूम करतो और पूर्त- भूत इए और पोनंता खोकार को। इनके राजांव- गोजों के साथ इस दलका सदैव युद्ध हुपा करता था। कालमें एशियाके दिसहुसेन विद्रोहो हुए थे। जारके युद्धमें जय प्राप्त कर सुलतान सुलेमान माल्टा (१५०३-१९१७)-तृतीय महम्मदके पुर्व प्रथम जोतमको अग्रमर हुए और १६६० ई० में एक बड़ो सेना पहमद २४ वर्षको अवस्थामै राज्यसिंहासन पर अभि- साथ खे माल्टाका अवरोध छोड़ कर हागे युद्दमें जा षिक्त हए। दिल होसेन के विद्रोहीने पारस्थके प्रवल पहुंचे। इस युद्ध में १६६६ ई.को सजिगेथ पधिकार राजा पार पन्यामको सहायतासे और भो विषम रूप करते समय वे परलोकको चल बसे। धारण किया। १६१३० तक यह युद्ध होता रहा। (--१५७१ )-सुलेमानके मार्ग के बाद उनके पितामहसे जोते हुए तीनों राज्य ये पारस्य के राजाको पुन र य ससोम राजा इए। रहोंने गजसिंहासन लोटा देनमें बाध्य एए। अष्ट्रियाक सम्घाट, हितोय रोड- पर बनेको निसेरियोका एक विद्रो दमकशिवा सबने अन्याय रानन्धवर्गके साथ मिलकर सारी पर