पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/७१८

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विपरोतोपर्यात ममनवालमै निरपरेखाके निकटवर्ती पर पूर्व को पोर गमन करता है। यही कारण वि उत्तर गोसाई में पचगामी पूर्ण वायुको दधिदिमाखा ४। समस्त चूर्णवायुयोको गति पृथ्वोके अनेक स्थानाम तथा दक्षिण गोला बाई दिशाका तूफान सबसे तेज भित्र भित्र रूप होतो है, यहां तक कि एक ही स्थानमें हातोहै। एक हो तुम भित्र भिव हो जाती है। पथिम भार• . हफानक समय वायु जिस दिशासे प्रवाहित होती. तोय होपपुञ्जमें पोर उत्तरी-पमिरिकामे उसको गति वास्तव में उसी दिया तफान नहीं पाता, पर्थात् पूर्व घण्टे में 2 मोलसे १५ मोल तक होती है । दक्षिण-भारत वायुको गति उस दियासे नहीं होती। पहले हो कहा महामागरम रसको गति १. मोलमे कम २ मोल तक गया है, कि रसके चारों पोर सभी दिशापोंसे वायु प्रथा. होती है। कंगोपसागरमें उसका परिमाण घण्टे में से हित एषा करतो । समाटिकाचक्राका जो मंग जिस २८ मोम्स, चीनसागरमें से २४ मोल तथा प्रशान्त महा• स्थानके अपर हो कर जाता है, उस पंचम वायु जिस सागरमे १ से २४ मोल सक होता है। कोई कोई दिवासे बस्तो है उमो स्थान पर मोर पसी दिशा धूप वाय तो पतनो धीमी चलतो है, जिसको भमने स्थिर सूफान बहता है। ऐसा भी हो सकता है कि यदि पूर्व भी कह सकते हैं। इसी प्रकार पूर्ण वायवा तुफान बहुत दिपासे तुफान पावे तो उस हालतमें वायुका वेग परिम काल तक एक ही दिशाम प्रवाहित होता रहता है। और दक्षिण पादि दियामों से हो मकता है। ५। इन समस्त संझावातोबा व्यास ५००६. वायुको गति घटेमें इसे ४० मोल तक होतो है, 'मील तक और कभी कभी १००० मोल पथवा उससे भो कभोकभो उससे भी अधिक हो जाती है। इसके बाग अधिक हो जाता है ! गमन-कालमें कभी पाकुचित तूफानका वेग नहीं समझा जा सकता। झटिवाचनका पथवा कभी प्रसारित होता है, तथा पाकुचनकालमें भाववेग इसको अपेक्षा बहुत अधिक है। इसलिए यह पति भीषण वेगशाली हो जाता है। पचिम भार तूफानका वेग कमो कभी घण्टे में ८०८• मोल तक हुषां तोय दीपपुष्लमें रस वायुका व्यास प्रायः १०० पथवा करता है। १५. मोली है, किन्तु पटलाण्टिक महासागर में पाती पनेक समय क्षुद्र शुद्र घूप व युएं प्रवल तूफान उत्पन बह प्रसारित हो जाता है, उस समय कभी कभी इसका करके बहुत पनिष्ट करतो है। इनका व्यास कई गासे ध्याम १००० मोल पयंत हो जाता है। वनोपसागरमें १मोस वा उससे भी कुछ अधिक हुपा करता है। ये सभोझावाययोका परिसर प्राय:३० वा १५०मोल है। अधिक देर तक नहीं ठहरतो, किन्तु इनका तेज बड़ा कभी यह ६.० मोल पौर कमो १५• भी हो जाता है, हो भयानक होता है। दो चार घण्टोंमें ही ये हवं, शेषोत ममयमें तूफामका वेग भोषण रूपसे बढ़ता है। मकान, मनुबा पर, जो कुछ सामने पाता है, उसे नष्ट परबमागरमें उसका व्यास १४० मोसम पधिक नहीं भर कर डालती है। होता, ऐमा बहुतोका अनुमान है। चीन-सागरके ये समी तूफान खभावतः का घों तक एक सभी टारफुनका व्यास ३ । ७० मोल नक होता है। खान पर विद्यमान रहते है, किन्तु पनिक स्थानों में ८१. घूर्ण वायु प्रावर्तन करते करते गमन करतो है। वा इससे भो पधिक दिनों तक प्रवल तूफान प्रवाहित मुतरी झटिकाचक्रको वायुको गति और पूर्ण होता है। यह तूफान घूर्ण वायुसे उत्पन्न नहीं होता, पृथ्वी बायुको.गति एक ही दिशामें होती है, वहां तूफान पठख सामयिक वायु-प्रवासे उत्पन्न होता है। इसी सबसे प्रबल रहता है। जहां परस्पर विपरोत, art प्रकार वाणिज्य-वायु परिमकी पोर पामेजन नदीके इसको गति मन्द हो जाता है। ये दोनों बिन्दु गमन प्रान्त प्रवाहित हो कर पान्दिज पर्वतके निकट प्रक्स पथके दोनों पार्ख परस्पर विपरीत भागसे रहते , फिर होतो तूहुई फानके अपने परिणत हो जाती है। पाल पूर्ण वायु पारी पश्चिमकी पोर पोर पछि तिजोरीतही प्रदेश सामयिक वायुमवाट निर्षिततया पचने मी पाल.