पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/७२१

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सलाम २, पगस्त में २, सितम्बर ३, पापरम २०, तर-पचिमको पोर प्रवाहित पा चापोर दो दिन नवम्बर, १४, पोर दिसम्बर मासमें ३ तूफान होते है। तक एक हो गतिसे बहता रहा था। पेम्सोक जहान इनमेंसे नवम्बरसे अपोलके शेष तक जितने तूफान पाटोनभोसे बहुत ममोप हो जलमग्न हो गया था केवल- पति है. वही वोपसागरके दक्षिणधि पावह रहते, मात्र १२ मनुष्यों ने इस उपद्रवसे रक्षा पाई यो। देवो- मई पौरन नवा पास बा पोर नवम्बर मास के प्रथम कोटक समोपो नमूर नामक जहाजहट फट गया सप्ताहमें प्रधानतः सागरके उत्तर भागमें तूफान होते। पोर उसमेक ५२० कम चारो पुरुष पोर पारोहो जसमें मध्यवर्ती ममयमें पर्धान दक्षिण-पश्चिम मोसमवावे समय डूब मरे । सेण्टडेभिड फोट के निकट हो पर रखिया कभी कभी उत्तर भागमें तूफान होता है महो किन्त कम्पनोके दो बड़े जहाज पोर सभो छोटो छोटो डोनिया उसको संस्था बहुत कम है। . नष्टभ्रष्ट हो गई घौं । कलाम टेलरने वङ्गोपसागरके तूफान के विषय में सो १७५२ ई०को २१वों अक्तूबरको एक भयानक प्रकार लिखा है। किसो जहाजके ऐसे ही तूफानमें पढ़नेसे तूफान उठा था। १७६१ को १लो जनवरोका दि. पहले एक दियासे उसे तूफान पा धेरता है, उसके कुछ रोमें जो भोषण तूफान पाया था, उसमें कितने पर देर बाद वायु शान्त भाव धारण करतो है तथा भाकाश रेज तो डब मरे पोर कितनों ने बहुत मुकिसके पास निर्मसो जाता है। तदनन्तर विपरीत दिशाये फिर रचा को। बंगरेजो जहाजों में केवल चार जानवर भीषण तूफान पाता है। इन समस्त झटिकापोंको गति गये थे और ४ टूटफट गये। किन्त ने किसी प्रकार पूर्वोक्त नियमानुवर्ती पर्थात् पूर्ण वायुके उत्तराधमें जलमग्न होनेसे बचे थे। निस्कासन प्रमतिर जान तूकान पूर्व से, दक्षिण पश्चिमसे और परिमाशमे तोरमें मिक्षिप्त हुए एवं शेष ३ जहाज डूब गये । ११०० उत्तरसे प्रवाहित होता है। ये पूर्ण वायुए. प्रायः दक्षिण- सौ पारोपियों मेंसे केवल मात्र. ७ यूरोपियन पोर . पूर्व कोषमे उत्तरपत्रिम कोणको पोर जाती है। देशोय मनुष्य मरे थे। ! मन्द्राज और उसके चतुःपार्षवर्ती स्थानों में पनेक .१७७५ में २१वौं पत बरको मन्द्राज में प्रवस मार भोषण तूफान हो गये है। इन सभी तूफानोको तूफान हुआ था। उस समय पोतात्रयमें जितने वहाण उत्पादक चूण वायु जो पूर्व दक्षिषको पोरसे उत्तर सङ्गर लगाये थे, वे समो विनष्ट हो गये। .. पश्चिमको पोर बहुत तेजीसे बहता है। जब यह किनारे १७८२ ईमें उत्तर पविमसे तूफान प्रारम पा पहुंचती है, तब इसकी गति परिवर्तित होकर पतिम बा। दूसरे दिन प्रातःकालमें १...देशीय पोत तोरने वा उत्तर-पश्चिमको पोर हो जाती है। इसका व्यास निक्षिप्त हुये। खण्डाधिपति दोजहाज विक्षत. प्रायः १५. मोल है और इसका पावर्तन घड़ौके कांटेके हो कर बड़े कष्ट से बम्बई पहुंचे। इस समय इंटर विपरीत दिशा में रहता है। . . . अलोके उत्पोड़नसे बहुसंख्यक प्रजाने मन्दाज नगर में १७४६१०में ३ मा वरको, दो-प्रहर गत्रिके समय पात्रय लिया था। तूफान के बाद हो याईघटना हुई थी। मन्द्राज नगरमें एक भीषण तूफान पाया था। उस समय गवर्नर मेकानिने उन लोगों के करको दूर करनेक पारस्थ सेनापति लावौडनसे मन्द्रास नगर पर अधिकार लिये यथासाध्य यन किया था। कर वहां २३ दिन तक हार गया था। पोतके पात्रयमें १७८१ ०को २७ वौं पावरको प्रवस तुफान बहुतये जो जहाज तथा नाये थीं। प्रायः सभी भम्म हुआ था। इस समय वायुमानयन्त्रले पारदको उत्पति और जलमग्न हो गयी थी। सोन नावों में लगभग १२ २८°४३५ एमसे कम नहीं थी। . , . . . सवारं मनुध थे, उनको भी जान गई। १८१९०को २रो मरेको मन्दाजमें जो भीषय. .. १७४८०को १२वीं और १श्वी अमोलको रात्रिके सूफान पाया था, उससे प्रायः शताधिक जहाज़ पौर ममय बडाखूरके निकट तूफान चायावा। यातूफान छोटे शेटे पोसादि नष्ट हुए थे। केवल दो जहाज सस Vol. Ix. 178 .