पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/७२७

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बस ( पु.) १ भूसी, भूमा। २ हिमालय पहाड़ पर ताण । गाय त्यादिको बंप देनसे. परीष पुख होता काश्मीरसे खे कर नेपाल तक पाई जामिवालो एक है। धनिष्ठादि पक्ष नक्षत्रों में घरके लिये तण चौर काष्ठ पहाड़ो बकरीका अन, प्रथम, पशमोना। यह बकरो पाहरण नहीं करना चाहिये । पाहरण करनेसे पनि, . पहाड़के बहुत जंचे स्थान पर पाई जातो है। यह चौरभंय, रोग, राजपोड़ा पौर धन आय होता है। ३ कामोरसे ले कर मध्य एशिया में पलटाई पर्वतके ठहे गन्धद्रव्यविशेष, रामकापूर । पर्याय-बालप, तप, सुगन्ध, खामोंमें पाई जातो है। इसके शरीर पर घने धने मुला- सुशोतल। यम रोयोंको बड़ों मोटी तह होती है। इसकी भीतरो कृषक (म० लो. ) वर्ष स्वल्पार्थे कन्। १ खपवण, जनको काश्मीरमें असली बस या पशम कहते हैं। यह थोड़ी घास। २ चोनाक, चेना धान। दुशालेमें दिया जाता है। इसके जपरके जन या गेएं. तृणका (सं० पु.) तृणमिव कर्णोऽस्य । विभेद, मे या तो रस्सियाँ बांटी जातो है या पडू नामका अपडा एक भाषिका नाम । दुना जाता है। उसके उनका जमाया हुमा कंबल या वृणवाड ( म०को०) वृषानां समूहः दूर्वादिखात नमदा। काडच । वृषसमूह, घासका ढेर। वसदान (शि.प.) कारस। वणकोय (स० वि०) व मत्वर्थे छ माड़ादित्वात् कुक.च । हमा (हि.पु.) चोकर, भूसी। वृषभव, जो धाससे उपजा हो। हसी (हि. वि.) १ हमके रंगका, करजई। (पु.)२ तलाम (स'• को.) तण सभूत.कुए में । सुगन्ध द्रव्य- करजया स्लेटके रंगको तरहका एक रंग भेद, एक सुगंधित घास, रोहिस घास । पर्याय-तणा- हस्त (स क्लो) तुम बाहुलकात सन् दीर्घच। १ रण, सक, गन्धि, हणशोणित, तणपुष्प, गन्धांधिक, वषिय, धूला। २ जटा । ३ चाप, धनुष । ४ सूक्ष्म पदार्थ, पण, तृणगौर, लोहित । गुण-यह बटु, उष्ण, कफ, वायु, गोक, कणिका। . कहा, कोष्ठ और पामदोषनायक तथा परमभास्वर ।। हरण ( को०) र भावे न्युट । सिन, हत्या, हणकुटी (सं० सी० ) तृणाच्छादिता कुटी। बणाच्या वासन। दित ग्रह, वह घर जो खड़से छाया रहता है। पर्याय - कायमान। वृक्ष (स• पु. ) वृक्ष प्रच, । कश्यप ऋषि । हवाक (म' पु०) वृक्ष प्राकम् । ऋषिमंद, एक ऋषिका वणकुटोरक ( सली . ) नौकः। बपनिर्मित घर, माम । पयाका घर । दृक्षि (स'• पु० ) वृक्ष-इन् । वसदस्यु के पुत्र एक ऋषिका तृणकूट (स.हो.) पराशि, धासकां देर। भाम। तृणम (म० पु. ) तृणमयः कम:। खेतम्बो, सफेद . वह या लौकी।' दृख (स'• लो०) ष-क पृषो. साधु: । जातीफल, जाय. वृषकेतको (सं. स्त्री.) १ वशलोचन। २ सवचौर- भेद, एक प्रकारका तोसर। दखा (हिस्सो) तृषा देखो। तृणकेतु (स.पु. ) दृषिषु केतुरिव । १ वंशवच, नाम। बच (म.की.) तिसणामचा समाहार: विस्त्र ऋचो २ तालहक्ष, ताइवा पेड़। यव वा, पच समासान्तः सम्प्रसारण। समान देवता तृणकेतुक (स.पु.) वृषकेतु स्वार्थ कन। वंय, बांस। पौर समान छन्दकके तीन प्रक। हणकेसर ( सं• लो० ) कुलम, रोजिस धाम . हब (स.को. ) ण्यते भक्ष्यते तण घा वा बह-- तृणगड़ (संपु.) समुद् कर्कट, समुद्रका एक प्रकारका वारलोपन । तृहे: को हलोपक्ष। उण ५८। मड़ादि, केकड़ा । २ कोटभेद, बोड़ा। भरकट घास पादि। पर्याग-अजुन, विय, खट, खेड, वगन्धा (#• स्त्रो०) बरवत् गन्धो यस्याः। विदारो, रित और सासव। बम पय शिवा. पर। थालपर्णी ।