पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/७३

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ड-ग सी०) देखो। पसार । "ठकार पागि "(कामधेनुस०) ठंडक ( बी.) टाक देखो। ठकुर सुहातो (हि.सी.) दूसरोंको प्रसबके लिये कही डा (हि. वि.) ठंडा देखा। आनेवाली बात, खुशामद। (हि.सो.) शोत, मरदी, जाड़ा। ठकुराइत (हिं. स्त्री. ) जरायत देखो। ठई ( स्त्री.) ठडाई देखो। ठकुराइन (हिं. स्त्री. ) ठाकुरको खी, सामिनी, माल. 'ठक (हि.सी.) १ उच्यताका प्रभाव, शोत, सरदो। किन। २ क्षत्रियको स्त्री बनायी। हमारको जी, २ तापकी कमी. तरी। ३ ति, प्रसवता, तमनो। ४ नाइन, मासन। किसो प्रकारके रोग या उपद्वको शान्ति। अगई (हिंखो०) १ प्राधिपत्य, सरदारी, प्रधानता। ४'ठा (हि. वि०) १ शीतल, मर्द। २ बुझा इषा, २ ठाकुरका अधिकार । ३ राज्य. रियासत । ४ जचता, बुता पपा। ३ हाररहित. शान्त । ४ जिसे कामो महत्व, बड़प्पन। हीपत न होता हो, नामद, नपुंसक । ५ गम्भोर शान्त, ठकुरानी (हिमो० ) १ सरदारको स्त्री, जमीदारको धोर। ६ पदासीन, सुस्त, मन्द । विरोध न करनेवाला. औरत । २ गनौ। ३ अधीखरो, मालकिन। ४ वषियको जो अपनी शिकायत सुन कर भी कुछ नहीं बोलता हो। सो, क्षत्राणी। पहल, प्रसन, खुध। ८ मिष्ट, मत, मरा हुपा। ठकुराय (हि.पु.) क्षत्रियों को एक जाति। १० जिसमें चमक दमक न हो, जो भड़कोला न हो, ठकुरायत (हिं. स्त्रो०) १ भाधिपत्य, सरदारी : २ राज्य, बरौनक। रियासत ठाई (हि. मो.) १ शरीरकी गरमो शान्त करनेवाली ठकोगे ( स्त्रो० . यह लकड़ो जिससे सहारा लो दया। मौंफ इलायची, ककड़ो, खरबूजे भादिक वोज, जातो है। गुलाबकी एखड़ो, गोलमिच पादिको एकमें पोम कर ठक्कर (स्त्रिो ) कर देखो। ठंढाई बनाई जाती है। २ सिडि, भाँग ठक्कर (म': पु०) १ देवप्रतिमा, देवताको मूर्ति । २ वाय. दामुलम्मा (F• पु०) विना तापके मोना चाँदो णोको एक उपाधि । ३ देवहिजवत् पूजनीय व्यक्ति व चढ़ानेकी रोति। मनुष्य जिसका सम्मान देवता पोर बावके जेसा किया ढी (हि. वि. ) ठंढा देखा। जाय । "सुदामनामगोपालः श्रीमान् सुन्दर ठक्कर।" (अनन्तब.) उक (fe'. स्त्री०) १ ठोकनेका शब्द, वह पावाज जो एक ४ग (हि.पु.) १ वह मनुष्य जो धोखा दे कर दूसरोंका वस्तु पर दूसरो वस्तुको ठोकनसे होता है। (वि.) २ धन हरण करता है, मुलवा देवर लोगोंका माल शैनन। म्तब्ध, भौचका। (पु.) ३ चण्ड वाजीको सलाई या वाला । डाकू और ठगमें बहुत फर्क है। डाकू जबरदस्ती सूजा। इसमें प्रकोमका किवाम लगा कर में की हैं। दूसरेका माल हरण करमा पर ठग पनेक प्रकारको धर्तता ठकठक (हि. स्त्रो०) प्रपञ्च, बखेड़ा, झगड़ा, टा। करके अपना नाम निशान लेता है। भारतवर्ष में इनका ठकाठकाना (Eि कि० ) १ खटखटाना । २ ठाकना, एक पृथक् मंप्रदायसा हो गया था, कि विलियम,वैण्डि. पीटना। कके समय यह सम्प्रदाय सदाके लिये लोप कर दिया गया। उकाकिया (हि. वि. ) टटा करनेवाला तकरार कर बहुप्राचीनकालसे ही ये भारतवर्ष के सर्वत्र यात्र हुए नेवाला, नतो। थे। हिमालयसे कुमारिका तथा पासामसे गुजरात तक काठीचा (हि. पु.) १ एक प्रकारको करताल । २ वह सभी स्थानों के रास्तों में इन उकतों का वास था। प्रक- जो करतास बजा कर दरवाजे दरवाजे भीख मांगता हो। बरके गजवकालम प्रायः ५०० ठगोको टाव में प्रापदण एकचोटो नख।। एषा था। दिल्ली पोर पागर के रास्ते में कोई परिचित बार (म.पु.) स्वरुप कार। उसकपवणे, 3 यति पास न पाने पाव, रसीलिए पथिकोंको होपियार Vol. Ix.18