पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/७४५

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पहुचे। वहां उन्होंने पूर्व पराजित यमदं नामक तेजाबी (फा. वि. ) तब सम्बन्धी। गवसका बायां हाथ काट कर उसे परास्त किया और लेजारत (हि.सी.) तिजारत देखो। वहाँको राजकन्याको व्याहा । पोछे जब यमदं साथ तेजारतो ( वि.) तिवारती देखी। उनको दोस्तो तब उसके साहाय्यसे वे योताहा नदी हैजिका (मो .) ज्योतिमतो, मालगनी। पार कर उदयगिरिके तल पर पहुंचे। वहां भद्रा के साथ तेजित ( वि.) सिंज-मिच-त। शाणित, जो तेज रमका मिसम हुआ। इसके पनन्तर विदूषक यमदंष्ट्रको किया गया हो। पर्याय निशित. चुत, पापित, शान्त, महायतास स्वान्ददासको कन्या तथा धन बलपूर्वक माणादि माणित, रूणत, नियात, शित, भात । ग्राण कर पत्तियों के माध उज्जयिनो नगरको वापिम तेजिनो (सं.सो.) तेजोवल लता, तेजबल ( Sanse पाये। यहां पा कर पानन्दपूर्वक वापरका गजत्व भोग viera Zeylanica ) करने लगे। (कथासरित्सागर) तेजिष्ठ (म. वि. ) तेजखिन् पतिण्या सहन २ गजपिप्पलो, गजपोपल । ३ चविका, चवा नामको विमलकि डिसावः। पति तेजस्वी, अत्यन्त प्रभाव पोषधि । ४ महान्योतिषो, बड़ी मालगनो। सालो.। . तेजस्विता (सं.सो.) तेजस्विनः भावः सल टाप । संजी (फा. स्त्री.) १ तेज होनेका भाव । २ तीव्रता, प्रभावशालिता, तेजस्वी होमेका भाव । प्रवलला । १ उग्रता, प्रचण्डता। ४ गोत्रता, जन्द।। तेजस्वित्व ( को०) नेजस्विनः भाव: त्व। बसवत्व, महंगी, गरानी। . . वनवान् होनेका भाव । तेजीयम (म. वि. ) जो विद्यते ऽस्य तेजस-यसनां तेजस्विनी ( म स्खों.) तेखिन् स्त्रियां डोप । १ १ तेजोयुक्त, तेजस्खो। ज्योतिमतोलता। २महाज्योतिमतो, मालकं गनी। । तेजेयु (सं० पु. ) रौद्राय राजाके एक पुत्रका नाम । पर्याय-तेजखमो, तेजोक्सो, ते जोत्रा, तेजनो । गुण- (भारत आदि० ९४०) यह कफ, खासकाश, मुखरोग पौर वातनाशक, कटु, तेजोर (#पु०) पित्तज रोग, वा रोग जो पित्त तिता तथा पग्निदीपक है। बिगड़नेसे हुपा हो। जखी (म. वि. ) तेजोऽस्वस्व तेजस-विनि। १ तेजी. संजोधात (स'• पु०) पित्त । .. युक्ता, जिसमें सेज हो। प्रतापो. प्रतापवाला (पु.) तेजोनार्थ तोयं (म. को०) शिवपुराणोत एक तोधका इन्द्रक पुत्रका नाम। निजामेन (म पु० ) कानोरके एक राजाका नाम । नाम। (राजतरं । ) तेजोमण्डल (म० को०) चन्द्र वा.सूर्य मण्डमा. तेजा (फा.पु.) एक प्रकारका काला रंग जो चने तेजोमय ( स० पु. ) से जो सन्याति मन्य-पान गण- . श्रादिसे बनाया जाता है। इससे रंगरेज लोग मोरांश कारिका वृक्ष, गनियारोका पेड़। रंग तैयार करते है। जोमय (म०नि०) तेजस प्रचुरार्थे विकार वा मयट । 'तेजाब (फा. पु.) किसी क्षारपदार्थ का पल-मार तेजःप्रचुर, सेभमे पूर्ण । २ जोविकार। ज्योति- यह दायक होता है। मच प्रकार के तेजाब पानी में घुल मंया जिसमें खूब कान्ति या चमक दमक हो। आते है। दमका खाट बहुत खुश होता है और चारोंका ४ पित्त। गुण नष्ट कर देता है । जब यह किसो धातु पर पड़ता 'तेजोमात्रा (म. सी.) तेजमा सखगुणाना मात्रा है, तब उसे काटने लगता है। एक विस्मका तेजाब संशः। तेजस अंश, चमकीला भाग। इतना होता है कि शरीर किमो स्थान पर लगनेसे तेजोमूर्ति (सपु०) तेज: तेजस्वती मूति यस्य । वह बिलकुल जल जाना। इसका व्यवहार प्रायः सूर्य । (वि.) २ ते जामक, जिसमें ग्वब तेज हो। पौषधोम होता। तेजपुर, सेबसे पूर्ण । : Vol. Ix. 184