पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/७५०

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होत, कैसा ही धनो होने पर भी उसकी अपणता नहीं। मम्बन्धमें एक प्रवाद है कि-पादि तेली मनोहरपाल जातो। रम पर एक ममल भो प्रचलित है-"तेला व्यापारी बन कर मामा देशोंम पण्य दृश्य के लिए बलुसम किया रुवावा। गये थे । इनको दो स्त्रियां थीं। महमा एक दिन घर पर बंगालमें दो प्रकार के तैलोवो वा तेम्नो पाये जाते। खबर आई कि मनोहरं मर गये । इस खबर के पानी E; लेलो और 'कोल'। इनकी उत्पत्ति विषयमें दो ज्येष्ठा पत्नीन अन्लशारादि त्याग दिये और विधवा प्रवाद प्रचम्मित है,- ___सदृश रहने लगी, परन्तु कनिष्ठाको रस संवाद पर (१) महादेव मर्वदा भस्म लगा कर रहते थे, विखाम न हुपा पोर इमलिए वह सधचाकी भांति रहने महसा एक दिन उन्हें तेल लगानेको पच्छा हुई। इच्छा लगो। कुछ दिन बाद जब मनोहर घर लोटे, तो धम होने के साथ ही उनके दाहिने हाथके पसोनेसे एक दिय दूर हो गया। इन दोनों स्त्रियों को गर्भजात सन्तान दो पुरुष उत्पन्न हुआ। यहो पुरुष त लिकों के प्रादिपुरुष स्वतन्त्र थेणियों में बंट गई । ज्येष्ठ पत्रीको सन्तान एका. रूपनारायण वा मनोहरपाल थे । शिवका वर पा कर दशातली कहलान लगो और कमिष्ठाको हादशतलो। इन्होंने पहले पहल कोल बनाया। कोई कोई ऐमा पूर्व बङ्गालमें भोर एक श्रेणो तेलो रहते हैं, जो कहते हैं, कि पहले कोल्हमें दो चम्न जोते जाति थे और घानो' वा 'गाछुभा' कहाते हैं। इनका कोल्छ 'कोलु'पोंके उनको पाखोंमें धोटो नहीं लगायो जातो थो। कोलहसे भिव प्रकारका होता है; उममें तेल टपकनेक . 'कोलु'पौने एक बच जोतना और उमको पाखों लिए छेद नहीं रहता। 'धोटो बाँधना शुरू कर दिया, जिममे वे पतित हो बङ्गालमें 'धनातलो' भोर 'कोलुओंके सिवा पन्य गये। तेलो ( एकादश, द्वादश भादि ) कोलह नहीं चलाते। (२) एक दिन भगवतीने मामले ममय हल्दो मन अधिकांश लोग पनाज वगरहको महाजनो करते हैं। कर, उम उबटनमें दो पुरुषांको सृष्टि को और उनसे कोई कोई चोनो वा गुड़का रोजगार भी करते हैं और मोघ्र हो तेल बना लाने लिए कहा । एक पुरुष बहुत कोई कोई दाल-चावलको दूकान भी। हो अन्दो तेल बना कर ले आया और दूसरे को उसमे तेलियों में जो लोग तेल बेचते हैं, वे सिर्फ तिलसे ही दूमो देर हो गई। भगवतोने टेरोका कारण पूछा, तो तेल निकाली हैं। अन्यथा करने पर जातिच्युत उमने उत्तर दिया कि 'पेषाणामे वस्त्रको भिगो कर तैल किये जाते हैं। ये लोग सिन्न पेरनेके लिए दो मंग्रह किया था. इममे देर हो गई। जो जल्दी भाया प्रकार के कोल्मों में से किसोका भो व्यवहार नहीं करते । था, उसने कहा 'मैंने पेषणों के नीचे एक छेद कर दिया. पहले तिलको जरा उबालते हैं और फिर मुसलमानोंसे था जिसमे सूवाधारको तरह तेल पापमे पाप टपकता कूटवा लेते हैं। वे तिलको कूट कर सिर्फ छिलका था, इमलिए जल्दो पा गया।' भगवतोको क्रोध पा अन्लग कर देते हैं। उसके बाद तेलो लोग उसे एक बड़े गया। मूत्र-निर्गमकी भाँति जो तेल सञ्चित हुआ है, वह मट्टाके बरतनम डाल कर अपरमे गरम पानी छोड़ देते उनके लिए लाया गया, यह बात उन्हें सघन हुई। है। बारह घण्टे भोगनेके बाद सबेरे एक बामको घोटनी- उन्होंने गषोत व्यक्तिको अभिशाप दिया, जिससे वह से घोटते हैं। फिर उसमें थोड़ासा गरम पानी छोड़ . पतित हो गया। . . देते हैं और कुछ देर तक यौहो रहने देते हैं। उसके । इनमेंमे प्रथम व्यक्ति तेलियोंके प्रादिपुरुष थे और बाद ही पानीक जपर तेल बहने लगता है, जिसे कपड़े से द्वितीय व्यक्ति कोलु'पोंके । बंगाल में 'कोल 'लोग तलकार उठा कर पन्य पात्रमें निचोड़ लेते . पौर विराज तेलो लोग तोलिक कहाते है। तिली देखो। जो लोग अपर लिखे अनुसार तेल बनवाते हैं, वे बंगालके तेलियोंमें दो प्रधान श्रेणी विभाग है-एक एका- बंगालमें सच्छद्र समझ जाते हैं । युक्तप्रदेशमें जो लोग दरतेती पौर दूसरा हादशतेली। इन वेशी-विभागोंक । उक्त प्रकारसे दूसरों से निम्न कुटवा कर तेल बनाते हैं, ये.