पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/७६

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  • उग-उठेरमंगारिका

पाता था। लार्ड वैण्टिकके शासनकालम भारतवर्ष में ठगवाना (हिं. लि. ) दूसरस धामासवाना। सतोदारको तरह यह भी एक भीषणकाण्ड दमित एमा' ठगविद्या ( ह. स्त्रो०) पूर्तता, धोखेबाजो, बल।. ठग-निवारक-विभागके कर्मचारियोको पुलिस और ठगाठगी (हि. मो.) धूर्तता, धोखेबाजो। विचारक दोनों प्रकारको ही क्षमता दो गई यो । कोई ठगिन ( हिरो०) १ वह औरत जो धोखा दे कर इमर. ठग अभियुक्त होने पर प्रकाश्य भावसे उमका विचार का धन लूट लेती है। २ ठगकी स्त्रो। धुतली, होता था। कहना फजूल है कि, उता विभागके कम चालबाज औरत। चारियोंको कार्यकुशलता, कठोररूपसे कर्तव्य-परायणता ठगिनो (हि. स्त्रो. ) ठगिन देखो . ओर तत्परताकै कारण शोघ्र हो बहुतमे ठग पकड़े गये, ठगिया (हि. पु. ) ठग दग्यो । मथा नाना स्थानों में बहुमायतसे लाशें मिनने लगो। ठगी (हि. स्त्रो०) १ ठगका काम । २ ठगनेका भाव । इस तरहसे उस विभागने अविचल उत्सार, अदम्य धृत्तता, चालबाओ। माहस पोर अविधान्त अध्यवमयको महायतामे कठोर ठगोरसे (हिं. स्त्रो.) मोहित करने का प्रयोग, वह शक्ति काननोंके हारा शोघ्र हो ठगों । निवारण करके पथिकों जिससे दूसरेका होश हबाश जाता रहता है। को निबित कर दिया। गौरवक साथ ठग- वभागने ठट (हिं० पु.) १ समूह, पुंज, भाड़, पनि । २ रचना, अपमा कार्य समाज करक पवमर ले लिया। सजावट, बनाव। २ प्रतारक, धोखेबाज । ठटकोसा (हि. वि. ) जिसमें चमक दमक हो, सजीला, उगम ( क्रि०) पॉच मात्राओं में एक गण । इसके तड़क भड़कवाला। ८ उपभेद है। ठटना हिंक्रि०) १ स्थिर रना, ठहराना।२ सजाना, उगना (हिं कि०) १ छम्ल और धूर्ततासे दूसरेका धन तैयार करना। ३ प्रारम्भ करना, छेड़ना । ४ सुमलित छोनना । २५ त्तता करना, छल करना । ३ उचितसे होना, तैयार होना। ५ खड़ा रहना डटना, पड़ना। ज्यादे कीमत लेना, मौदा बेचन में बेईमानी करना । ४ ठटमि (हि. स्त्रो०) रचना. सजावट, बनाव । प्रसारित होना, धोखा खाना । ५ पाश्चर्य में स्तब्ध होना. ठटया (हि.पु.) एक जंगलो जानवरका नाम । चक्कर में पाना, दंग रहना। ठटरो (हिं. स्त्रो.)१पस्थिप जर, हडिडयाका टोचा। ठगनी (हि. स्त्री०) १ ठगको स्त्रो । २ वह स्त्रो जो दूसरे- २ वह जाल जिसमें घास भूसा आदि रखा जाता है, को भुलावे में डाल कर उसका माल छोनतो है । ३ धूर्त । खरिया खड़िया। ३ किसी पदार्थका ढॉचा। ४ वह स्त्रो। ४ कुटनो। रथो जिस पर मुरदा उठाया जाता है, प्ररथो । ठगपना ( हि.पु.) १ ठगनेका भाव या काम । २ - उह (हि.पु.) समूह, झंड, भोड़। धूत ता, छल, चालाको । उगमूर। (हि स्त्री०) एक प्रकारको विषेलो जडो बटौ। ठहो (हि• स्त्रो० ) अस्थिपंजर, ठटरी। पूर्व समयमें ठग इसो जडोसे पथिकोंको बेहोश करके टहई (हि. स्त्री० ) दिलगी, सो। उसका धन लूट लेते थे। उठा (हि. पु०) उपहास, हंसा । उगमोदक (हि.पु. ) ठगलउड़ । ठठ (हिं. पु. ) ठट देखो। उगला (Eि पु०) नशीली या बेहोशी करनेवाली ढठरो(स्त्रिो०) ठटरी. देखो। चीजको बनो हुई मिठाई । पूर्व समय ठग सो सरहके ठठाना (हि. कि० ) १ पाघात लगाना, ठोकना, साजू को पासमें रखते थे । जब कोई पथिक मिलता तो पीटना । २ पहास करना, जोरसे सना। किसो बहानसे प्रापना लण्ड उसे खिला देते थे और ठठेरम जारिका (हिं० सो.) ठठेरको बिलो। यह थोड़ी देर बाद जब वह नियासे बेहोश हो जाता था विलो रातदिन बरतन पोर्ट जानोगता शुरू डरतो तो उसके पामके सब माल.ले रो। और न किसी पाईपद पर मोहित होतो।।