पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/७६२

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रिक्षा- पो साधुः । तथायिका, तेलिन नामका कीड़ा लेखपों (स.सी.) तिलपणे हर्ष बात तब जति सेलचौरिका (मो .) लख चौरिकेव । तेलकोट खण ततो डीप । १ चन्दन । २ श्रीवास, सलईवा . तेक्षका कीड़ा। _गोद । ३ सिडक, शिलारम या तरष्क नामका गन्धद्रव्य । मत (सं.क्लो०) से लय भावः तेल-त्व । तेलका भाव तेलपा(मस्त्री .) तर पिबति पा-कटाप । तेस: या गुण। ' . पायिका. तेलवा कोड़ा। . तेलद्रोणी (स. सी.) सेबपूर्ण द्रोणी मध्यलो० क.। लपायिवा (.सो) पिवति पा-सुल टापि प्राचीन कालका काठका एक प्रकार का बड़ा पात पताकोटविशिष, भीगुर, चपड़ा। पर्याव-प्योयो, जिसबीमबाईपादमोकी लम्बाई के बराबर हुआ करतो चोरिका, सपा, नेसायका और बसा धारा। यो। रममें तेल भरकर चिकित्सा के लिये गेगी लिटाए सपायो (म.पु. पिवति पाणिनि। तंब. जाति पोर माइमेसे बचाने के लिये मृतशरीर रखे जात पायिका, झांगु।। थे। पस पात्र में मेटे रहना-वातरोग, व्याधि, कुष्ठः सपिच (पु.) तिपित्र, मा तिमा। रोग, पा, कापिय मिमिन, गदगद. वास्तब्ध, तेलपिपोलिका (स. सी.) तेलप्रिया पिपीलिका। पष्टपक्षित, पवन, प्रावकम्प, ग्रीवाभा, अपतम्बयोगीत-RET बधिर, मवा धोर वस्ति प्रादि रोगोंमें हिसकर है। पौर पिजारिका। राजा दशरथको मृस्थ होने पर उनका शरीर कुछ समय तेलपिष्टक (सं. म.) तलस्य पिष्ट। तेभिड, तक सद्रोण में रखा गया था। तेलद्रोणीमें मृत शरीर रखनेसे जल्दी सड़ता नहीं। लपीत (स'• वि.) पोत ते येन, समासे पर. "तैकद्रोण्या तदामास्या; संवेश्य जगतीपतिः । निपातः। पोतते लक, जिसने तेल पीया हो। . सर्वाण्यथादिष्टाश्चक, कर्माण्यमातरम्।" तेलफसा (.पु. ) तेलप्रधान फल यस्य । १ दो। (रामा० ३१) २ विभौतक, बोड़ा। सधान्य ( स० की. ) त लोपयोगि धान्य। तेलोप- सभाविनी (मो .) तन भावयति सदगन्ध योगी सतुष शस्य, धान्धका एक वर्ग जिसके अन्तर्गत करोति भूणिच-णिनि डीप । आतोपुष्प च, पमलोका तीनों प्रकारको सरसों, दोनों प्रकारको राई, खस और पड़ा। बुलुमके बोज। लमर्दन (म.ली.) तमस मर्दन । गरम तेल लनिर्याम (मपु० । गन्धराज । तकनी ( सी.) लकिड, खली। लगानको लिया। तलपक ( पु.) पिवति पा-य। लपायिवा. तेलमाली (संखो०) तेलानो माया समूहो यत्र ततो . तेलिन नामका कीड़ा। तेल चुगनेवाला हमर जन्ममें डोष । बत्ति, लकी बत्ती, पलोता। तेलपाधिका-योनिमें जन्म लेता है। सम्पाता (सं .) तिलपातोऽस्यां वर्तत तिक्षात- शपर्णक (म. पु.) लोमिव पर्षे यस्व कप । नमुना सधा। अन्विपर्ण वृक्ष, गडियम। तेलया (म. पु. ) समदं नार्थ यस। शिलादि सपर्षिक (स.सी.) तेलवामिव पर्णमस्य निचोड़नार्थ यबभेद, कोस। . बा तिलप वृक्ष उत्पत्तिस्थानवेनास्वत छन् ।हरितलवक (सं.) तेलुकृपख विषयो देशः गजन्या चन्दन, सालचंदन। २ चन्दनमद, एक प्रकारका बुज । तेसुराजाका देश। . . चन्दन। पर्याय -बोलण, चन्दन, भद्रबी, तेमपर्णी, तेसवनी (को०) तलाव वसो । बासनाबरों, यत गन्धमार, मलयज और पन्द्रयति । विशेष. एक मतो। . प्रकारका पेड़ . . . . . ससाधन (सं.सी.) माधयति मधोमान.