पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/७६६

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७५४ सोती-को बनाते थे, लेकिन वह अधूरा हो रह गया। मवत् बड़ा मल लगा रहता , जिसमें छोटे शेटे गोने १८५८ में पापका देहान्त हो गया । . . रख कर युद्ध के समय शत्रुओं पर चलाये जाते है । गोले तोतो ( फा० स्त्री) १ तोते को मादा। २ उपपनो रखनौ। चलानेके लिये नलके विछन्ने भागमें बारुद रख कर पलीते तोब (म० लो०) तुद्यते ताडातेऽनेन तुद-इन् । गवादि प्रादिसे भाग लगा दी जाती है। तोपके कई भेद १-कोटी ताड़मदमड, वह छड़ी या चाबुक आदि जससे जानवर बड़ो, मैदानी पोर जहाजो। प्राचीन काल में कंवल दो हॉक बात। प्रकारको सो काममें लाई जातो.यौं, एक मैदानी तोत्रवेत्र (सलो०) विष्ण दण्ड, विष्णु के हाथवा दण्ड। और दूसगे छोटो। उनके खोंचने के लिये बैल या धोड़े तोद (म. पु.) तुट भावे घन । १ व्यथा, पोड़ा, तकलीफ। जोते जाते थे। इसके सिवा और एक प्रकारको तोप (वि.) सूदतीति सुद-अच् । २ पीडादायक, कष्ट पहुं होती थी जिसके मोचे पहिये नहीं रहते थे। इस प्रकार चानेवाला। को तो घोड़ों, जटों या हाथियों पर रख कर रण. तोदन (मको०) सद्यते ऽनन तुद करण ल्य ट । १तोत्र, भूमिमें पहुचायो जाती थी। भाजकल यूरोप पादि चाबुक, कोड़ा। २ व्यथा, पोड़ा। ३ फलवृक्षविशेष, एक देशों में बहुत बड़ी बड़ों जहाजो, मैदानो पौर किले प्रकारका फलदार पेड़ । इसके फल के गुण-कषाय, मधुर, तोड़नेवाली सोपे तैयार होती है। उनमेंसे किसी कच, कफ और वायु नाशक । किसो सोपका गोला ७५ मोल तक जाता है। और एक तांदपत्रो ! मस्त्रा .) तोद तोदक पर्ण मस्या. गौरा• प्रकारको सोपें हैं जो बाइसिकिलों, मोटरों और हवाई .. डोष । कुधान्यभेद, एक प्रकारकाबराव धान। जहाजों आदि परमे चन्नाई जाती हैं। इनका मु अपर- तोदरो ( फा: स्त्री० ) एक प्रकारका बड़ा कंटोना पेड़ को पोर रहता है। किसी प्रसिद्ध पुरुष के प्रागमन पर जो पारमा देशम पाया जाता है। इसमें पतले छिन्नके- अथवा किसी महत्वपूर्ण घटनाके ममय बिना गोलेके वाले फल लगते है। इसके बीज भौषधोपयोगो होनेके बारुद भर कर शब्द किया जाता है । कारण भारतवर्ष के बाजारों में आकर बिकते हैं। ये वोज तोपखाना ( फा० पु० ) १ तोपें तथा उनका कुल सामान सोन प्रकारके होते हैं, लाल, सफेद और पोले । वोजोका रहनेका स्थान । २ गाडियो आदि पर लदोहुई युबके गुण-रलाशोधक, पौष्टिक और वलवईक है। इनके लिये सुसज्जित चारसे पाठ सोपोका समूह। सेवनसे शरोरका रंग खूब खुल जाता तथा चेहरका सोपचो (प. पु.) वह जो तोप चलाता हो, गोलन्दाज । रंग लाल हो जाता है। तोपचोनी (हि. स्त्रो० ) चोवचीनी देखो। तोदी (वियो०) एक प्रकारका स्थाल। तोपड़ा (हिं. पु.) १ एक प्रकारका कबूतर । २ एक तोबर-हिपुर जिलाके पन्तर्गत धोरपडम तालुक- प्रकारको मक्खी । का एक ग्राम। यह पक्षा० १२ १३७० और देशा. तोपा (हि.पु.) एक प्रकारको सिलाई जो एक टाके में ७६३८पू के मध्य बोङ्गारपरमसे १. मोल उत्तरपश्चिममें की हुई रहतो है। अवस्थित है। लोकसंख्या प्रायः ४३ है। १३५८१ को सोपाना (हि.क्रि. ) तोपवाना देखो। बनाई हुई यहां एक मुसलमान समाधि है। इसके पास तोपाम (हि.y०) वह जो झाड़ देता हो, भाड़, हो मोसो नामका एका तालाब भी है। इसका प्राचीन बरदार। नाम सोन्दन र है। पाधुनिक नाम १७४६ई में दक्षिण तोफगो ( फा॰ स्त्रो०) अच्छापन, उमदा होनेका भाव, प्रदेश के सूबेदार द्वारा रखा गया है। खूबी। सीप (तु स्त्रो. ) एक प्रकारका बहुत बड़ा पस्त्र । यह तोबड़ा ( फा• पु०) चमड़े या टाट पादिक्षा घेखा। प्रायः दो या चार पहियोंको गाड़ी पर रखा रहता है। इसमें दाना भर कर घोड़े के खाने के लिये उसके मुंहपर इसमें अपरकी पोर बन्दकको मसीको माई एक बहुत बांध दिया जाता है।