पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/७६८

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तोमर ..हाबई काबीजका मार वरने लिए जयपाल के विरुष समय सब गया। पंव केवल या गर्म मावर गया झे गये। १०२११ में महमूहको जब यह खबर मिन्नो । मन्दिर भो मुसलमान तास नहस कर डाले तब वेपुन: इस देशको लोटे, लेकिन उनके पाने के पहले गये है। दुर्गका विशेष प्रभा पूर्ववत् । ही जयपाल मार डाले गये थे। पौने १०२२ है में मह पहोंने बलरामगढ़ जिले में भनेकपुर नामक एक नगर मूहका जब बीज पर पंधिकार हो गया, तब तोमर भो बसाया था। यह नगर पाज भी उसो नामले सामने यीय राजकुमारने वाले दिनके गस्त से दूर गााकि उपमें वर्तमान के पुत्र सूर्य पालने वीजपुर पूर्वीय विनार वारिमामय स्थान पर राजधानी बापित नगरके समीप१.१ में सूर्य कुण्ड नामका तालाब की। मुसलमानों दो बार पाक्रमणसे कोजको रक्षा खुदवाया जो पब भी मौजद है। इनके तेजपाल . नहीं होनेसे हो जहां तक समझते हैं कि जयपासने (विजयपाल ) नामक एक पुत्रने गुड़गांव और पलवरके परवर्ती कुमारपाल बारि नामक स्थानमें राजधानो उठा बीच तेजोया नगर, दूसरे एक पुत्र पन्द्रराज पन्द्रगढ़', से गये थे। इस समय कबोलके राठोर राजवंश पराजने अजमेरके निकट तारागढ़ चौर पचारामने प्रतिहाता चन्द्रदेवनं पुन: कबोज राज्यका मुसलमानों के भरतपुर तथा पागराके बीच "पब" वा पचनेर क्रवल छहार किया । चन्द्रदेवके पुत्रपौत्रादिके राज्या. नामका नगर स्थापित किया। द्रोपद नामक सके और रोहा विषयमें जो खोदितलिपि मिली है, उससे जाना एक पुत्र थे जो पसि वा सोमें रहते थे। उनके एक . जाता है कि चन्द्रदेवके पुत्र मदनपाल १०८७t में राजा पुत्र शिवपासने घोष वा शिधवल खापन किया जो भी 'धेस सिाबसे १०५०१ में चन्द्रदेवका राजा होमा शिरसोपाटन मामले मगर । ये सब प्रवाद यदि खोकार किया जा सकता है। उस समय तोमर शोय मल तो कर सकते , कि द्वितीय पनापासका रितोय मनापाल राज्य करते थे। शायद उन्होंने राज्य उत्तर सीमे ले कर दक्षिण में पागरा, परिममें दिलो नगरमें फिरसे राज्यस्थापन और लालकोट नामका पलवार और अजमेरसे लेकर पूर्व में सम्भवतः गङ्गा नदी दुर्ग खापन दिया था। खालकोटका भग्नावशेष पब तक विस्तृत का। भी विद्यमान है। दिशोक विख्यात लोहस्तम्भमें एक दन्त-चाशनी में तोमरवयीय कर्ण पाल नामक एक सोदित लिपि जिससे पापाक्ष द्वारा लालकोटका विख्यात राजाका नाम पाया जाता है। इनके भी छह बनाया जाना साबित होता है। उसमें "संवत् दिहलो लड़के थे। वे भो नगरादि स्थापन कर गये। इनमेसे ११. धनंगपाल वरि" लिखा। पर्थात् १९०८ संवत् एवाका नाम था बचदेव । प्रमोंने नरनोलेके समीप (१०५१ ) मनापालने दिलोको बसाया। फिर 'बाघोर' पर अजमेर-टोडाके समीपं 'बाघोरा' वा माय, पाव, लिखा-"कि दिनीका कोट कराया वापरा नगर स्थापित किया। एसो प्रकार नागदेवने आज लालकोट बाया।' याने दिसोका दुर्ग निर्माण कर मेरक निकटस्ख 'नांगोर' और 'नागद', अणरायन किशन उसका नाम लालकोट रखा। मालबोट.नाम कुसुब• गढ़ बानिलरायने प्रलबारक पशिम 'नारायणपुर, उहोन के समय तक प्रचलित था वस वचनसे प्रमा सामसिंहने पलवार पौर जयपुरके बोच 'पलबगढ़' पौर वित होता है। "चालकोट तया नमारो बाजतो पा" पासने पलवारक पशिम 'रसोरा' और उत्तर 'हर.. कुतुब-ठहोनने यह नियम बना दिया था, कि लालकोटको सोली' मगर स्थापित किया है।सके सिवा पक्षबारके सोमाके पन्दर कोई नगाड़ा नहीं बना सकता। यही उत्तरपूर्व में जो बहादुरगढ़ , वा स्वयं बर्षपालका नियम कनिमो .समय में भी प्रचलित था । अमावास बसाया एमा। कासकोटक मध्य पनामाल' नामक १६० फुट लंबा कुतुब मीनारसे एक कोस दूर महीपाल नामक और १५२ फुट चौड़ा एक जलाशय पोर २० हेवमन्दिर ग्राम भो इसी बंगके राजा महोपालको कीतिरस वा मो. रा.पनामालका कोनीमार बात में महीपाल नामदो. राजा.ही गये, समस्या