पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/७७२

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तोगर-सोपरिका. . बोल मोरो यादिवर अफगान शासनकर्ता | मुगलहनापति बावाचा ग्वालियरको प्रचार विजे लितरांसोबत शिवा, तब बाबरने रहोमदाद / गये । सामसहायके साथ कावा बांका युबा तीन नामक एक सेनापतिको इस विच भा। रहोमके | - दोन तक युद्ध होते रहने के बाद कावा खांको हो जीत गने पर तितर खावा मन बदल गया और उन्हाम रहीमको पावर अब चित्तौरमें घेरा डाले हुए .ये ( १८. दुर्म में प्रवेश न होने दिया किन्तु मरम्पद गाउम नामक तब उस युधमें ग्वालियरराज पाखिवाहमको (राम- एक व्यक्तिक कौशलम रहीमदादने दुर्गपर अधिकार कर | सहायके पुत्र) रखा मिली थी। पालिवाहन विमो थियो। पो.खिया। १५२७१ में राजा मङ्गलरायने (मङ्गलदेव) | दोय राजकुमारीका प्राविप्राय कर राणाके पास ही रहते वालियरको पवरोध किया। ये कोतिमिहके छोटे | थे। ग्वालियर पावरके प्रधान होने पर भो शालिवाहन सड़क माने जाते थे। तोमरगद के अन्तर्गत धुन्धारी, राजपूत राजसमा म्यासियरके गत्राकार वर समानित प्रखा भादि १२० प्रामों के ये जमींदार थे। इनकी शान होते थे। पक्षी पाज भी उस ग्रामों में है । ग्वालियरके पवरोधों में पोई रोहितासको खोदितलिपिसे जाना जाता है कि जानवार्य हुए। शालिवाहन श्यामसहाय चोर मित्रसेन नामक दो पुत्र सम्बाट हुमायुं १५४२ में ग्वालियरके दुर्ग में | थे। ये दोनों कालक्रममे पकावरक पधोन काम करते रहते थे। इस समय राजा विक्रामके पुत्र गमसहायने रहे। १५१में खामसहायको मृत्यु । मित्रसेन बालियरके दुर्ग को अपने अधिकारमें खाने के लिये उनसे | मुगलके अधीन ग्वालियर दुर्ग के अध्यक्ष हुए। इसके प्रार्थना को, किन्तु व्यर्थ हुई। इस पर बहुत दुखित हुण सिवा मित्रसेनशा और हामा मालमतही । स्यामसय जो माथ मिल गये । बाटोमा के अवर तोमरगढको जमोदारी पोर नाममात्र के सेनापति सुजा खाँक साथ युधमें जा कर मालव फतह 'ग्वालियर राज" को उपाधि लेकर मष्ट थे। श्याम किया। सहायके दो पुत्र थे--संग्रामसि पोर नागयवहास । फेरिस्ता कहते १-१५५६ में सम्राट अकबरके संग्रामको १५७०१ में 'ग्वालियरराज'को उपाधि मिली प्रधान मन्त्रो बराम खाने ग्वालियर के शासनवार्ता मुहल | और उनके पुत्र रामा अाणसिंकी १७०१०में मृत्यु ग्यांक विरह सेन्य भेजनेका उद्योग किया । मुहल खाने । स के पुत्र विजयसिंहपौर परिसिंहने या सम्बाद पाकर रामसहायको लिख भेजा कि उदयपुरपायय लिया। विजयसिंहका नि:सन्तान- "पापके पूर्व पुरुष न्वालियर के राजा थे। कालकामसे यह पक्खाम १७८११को उदयपुरमें देहान्त एमा। हरि. पभो मेरे हाथ ।। सम्पति मुगल बादशाह चढ़ाई करने | विकेशवर पभो उदयपुरमें हैं। इनको एक पा रहेहममें उतनी शशि नहीं कि उन्हें रोक पाए दूसरी माखापान भी तोमरगदको जमोदारी भोग यदि मुझे कुछ अर्थ प्रदान कर, तो मैं अपने हाथसे तो।। . .. ग्वालियरराय दे सकता।" यह सुनकर गमसहाय तोमरका (सं० पु. ) तोमर राति पा-पच । तोम. ग्वालियरको पक्षपड़े। किन्तु . पकवाल खां नामक गस्खयाशो, वा योगा जो तोमर · पज लेकर म्वालियर के एक निकटवर्ती जमींदारने सैन्ध म ज ला । . ....... कर रास्ते में हीरामसहायको परास्त किया। रामसहाय | तोमरधर (पु.) धरतोति धराप तोमरस पर। परास्त होकर मौरके गवावे गन्धमे भाग गये। फजल पबि, पाग। २ तोमरधारी योगा .. असो नामक एका ऐतिहासिकका कहना है कि मेरशाहक | तोमराच (म.पु.) बानोरके एक राजावा नाम । अब मरने पर ग्वालियर बासनामक एक क्रोतदास- सनिय राजाके पुत्र थे। (रागतर०५।२१७) . . काय लगा। मबाट अकबर के समय रामसहायमे | तोमरिका ( मो.) तोमर सजावां बन लिया राजयको समायताले ग्वालियर पर बाबर, दी। टाय प्रताल । तंवरिया, गोपीचन्दन.....