पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/७७४

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७२ वोयराज वोरमाण तोयराज ( पु० । तीयेषु राजते राज-क्षिप । ममुद्र, पतभिषा नक्षत्र । (को०) तोय जलशा पधिदेवोऽस्य । सागर। ३ पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र। तोयराशि (म० पु. ) नीयानां रागिरिव । १ ममुद्र नोयोझवा ( संखो०) तोये उद्भवो यस्याः । तोयापामाग। २ जलसमूह। तोर (हिं. पु०) अरहर। तोयवलि (म स्त्रो.) तायवालो कन् । १ कारबलक, तोरई (हिं. स्त्री ) तुई देखो। करेला । २ अमृतसवा लता। तोरण ( म० पु. लो. ) तुतोति स्वरया गच्छत्यनेन तर तोयवली (म स्त्रो०) तीर्य जलमविहितस्थाने वल्लो करी ल्युट । १ वहिार, किमो घर या नगरका बाहरी यमयाः। कारबक, करेला फाटक । इम हार का अपरो भाग मण्डपाकार तथा तीयविम्ब (म. क्लो. ) तायोस्थित विम्ब। जल मानाओं और पताकाओं आदिसे सजा रहता है। बिम्ब । २ मजावटके लिये खंभों पोर दोवा, आदिमें बांध कर तायवच ( पु.) तोये वृक्ष इव । शैवाल, सेवार। लटकाई जानेको माना, बंदनवार । ३ कन्धरा, ग्रीवा, तोयत्ति (म० पु० ) जलायामार्ग, एक प्रकारको गला। ४ महादेव, शिव दवा। तोरगामाल (म. क्लो) तोयविशेष, अवन्तिकापुरो। तोगशाला (म० म्त्रो०) वारिमाला, वह स्थान जहां पर तोरणवत्. (म.वि. ) तोरण विद्यतेऽस्य तोरण-मतुप राह चलतों को पानी पिलाया जाता हो। मस्य व । तोरणविशिष्ट । तोयशक्तिका ( म स्त्रो० ) तायजाता शक्ति का मध्यलो० तोरणस्फाटिका ( म स्त्रो० ) दुर्योधनको मभाका नाम । कर्मधा० । जलशक्तिका, मोप । दुर्योधनने पाण्डवोंको मयदानववालो सभा देख कर सोयशूक ( म० ए०) तोयस्य शूकरय । शेवाल, मेवार । यह सभामनाई थी। ( भारत सभा० ५५ अ० ) सोयर्विका ( म स्त्री० ) भेक, मेंढ़क । तोग्माण १ काश्मोरके एक पराकान्त राजा। काश्मीर देखो। तोयपूचक (R• पु०-लो. ) नोय जलवर्षे सूचयति २ पञ्जाब के एक पराक्रन्स स्वाधीन राजा। लवणा- रखेमा सूच-गव ल । भक मंढ़क । मेंढ़क बोननमे पानी शैलस्थ बूगसे आविष्कृत गिलाफन्न कमें ये राजमहाराज बरमता है। २ जलवर्ष गसूचक योगभेद, ज्योतिष तोरमाणषाहि जउन्ल' नामसे प्रसिद्ध है। इनके समयको वह योग जिममे वर्षा होने की सूचना मिले। उत्कीर्ण लिपि देख कर कोई कोई इन्हें ४ थो वा ५ वौं तोयस्राव (स: पु०) घोड़े का एक रोग । इसमें घोड़े. शताब्दीके बतलाते हैं । को खझे सल दसकता है। तोयामक स० पु. ) तोय आत्मा स्वरूप यस्य । परमे- खर। सोयाधार (म० ए०) तोयस्य पाधारः, ६-तत् । जलाधार, पुष्करिणी, तालाब। तोयाधिवामिनी ( म० स्त्री. ) तोय जनप्रधान स्थन्न अधिवमति अधि-वम गिनि । पाटलावृक्ष, पाँढर । सोयापामार्ग ( पु.) जन्लापामार्ग । सोयालय (म पु० ) तोयस्य प्रालयः । उदधि, ममुद्र । खेयाशय (म० ए०) नोयम्य प्राशया, ६-तत् । जन्नाशय, तालाब। तोयेश (सं.पु. ) तोयस्य ईशा, इ-सत्। १वरण । २