पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/९०

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


उसके बीच में एक डोगबन्धी रस्ती रहती है। डोरीके डम्बर ( पु.) उप-पन समारंपायोजन, दोनों सिरों पर दो कोटियां दो हुई रहतो । बीचमें पाडम्बर, धमधाम। 'अजायुद्ध ऋषिधाचे प्रमाते मेष पकड़कर जब यह हिलाया जाता है तो कोड़िया चमड़े उम्परः।" (चाणक्य । ३ धावदत्त कुमारके एक पचर. पर पड़तोर पोर शब्द होता है। बन्दर भान आदि का नाम । "उम्बराडम्बरी चैव ददौ धाता महामने।" . के लिए मदारी रमे अपने साथ रखता है। यह बाजा (भा. ९४०) ४ विस्तार । ५ विसास । एक शिवजीको बहुत प्रिय है। प्रकारका दोबा, चटरकत। शिवजी के हाथमें यह बाजा हमेणा रस्ता है। डयन (म.ली.) डीयते पाकाशमार्ग गम्यते पनेन डि "त्रिशूल डमरुकरं ।" (शिवध्यान )२ वह वस्तु जो करणे स्थ ट। १करिय, पालको, डोली । २ मभी- बोच में पतलो हो और दोनों भोर बराबर चौड़ी होतो गति, उड़ान, उड़ानेको क्रिया। गई हो। ३३२ लघु वर्ण बुक एक प्रकारका दगडक- डर (हिं'• पु०) १ भय, भीति, चाम, खौफ । २ पाशका, वृत्त। ४ विस्मय, ताजव। प्रनिष्टको भावना, पन्देगा। डमरूका । स० स्त्रो०) डमरूक कन् स्त्रियां टाप । तन्त्रो. डरना (हि.क्रि.) १ भयभीत होना, खौफ करना। का मुद्राभेद, एक प्रकारका नामम । २ श्राश का वरना, अंदेशा करना। डमरूमध्य ( पु.) डमक व मध्यः यस्य. बहती। उरपना (हिं. कि० ) भवभोत होना, डरना। योजक, जमीनका वामकोण भाग जो दो बड़े बड़े डरपोक (हिं० वि०) भोर, कायर, जो बहुत डर खण्डोको मिलाता हो। खाता हो। उमरूयन्त्र (हि.पु० ) एक प्रकारका यन्त्र । इममें पर्क डराना (हि'. कि. ) भय भोस करना, डर दिखाना, खोंचे जात पोर सिगरफका पाग, कपर, नौसादार खौफ दिलाना। आदि उड़ाये जाते है। यह दो धड़ोंका मुह मिलाने डरावना (हिं. वि. ) भयानक, भय कर । भोर कपड़महो द्वारा बनता है । जोड़नेमे जिस वस्तुका उगवा (हिं पु०) फलदार पेड़ों में बंधी हुई एक लकड़ी पर्क तुपामा होता है उसे पानीके साथ एक घड़े में रख जो चिड़ियों को उड़ाने के लिये लगी रहती है। इसमें देते है पोर तब दोनों घडोका मुह जोड़ दिया जाता एक लम्बी रस्सो बधी होती है। है। तब दोनों जुड़े हुए घर प्रकार घड़ा कर रखे डरो (हि.सो.) बली देखो। जाते हैं कि एक घड़ा पांच पर और दूसरा उगड़ी जगह उरोल (हि. वि. ) जिसमें शाखा हो, डारवाला, सानो पर रहता है। गर्मी सगमेसे वस्तु मिश्रित अन्नका वाष्प दार। उड़ कर दूमरे घडे में जा टपकता है। वाष्पका जलबी उल (हि.पु. ) १ खण्ड मंग, टुकड़ा। (खो०)२ उस वस्तुका पक है। जो घडा नीचे रहना है उसके झोल । ३ काश्मीरको एक झील । पेदेमें पाँव लगतो है पोर जपरके घड़े के पेहेको भीगा डलई (हि स्त्रो०) डलिया देखो। हुषा कपड़ा आदि रख कर ठण्ठा रखते हैं। जब नोचेके डलना (Eि कि०) डासा जाना, पड़ना। धड़े में गर्मी लगतो है तो सिंगरसे पारा उड़ कर अपरके उलवा (हि.पु. ) उसा देखा। धड़के पेंटम जम जाता है। उलवाना (हि. कि० ) डालनेका काम किसी दूसरेसे उमसार-पूर्व बंगालका एक प्राचीन ग्राम। . (भ० ब्रह्मस. १९५३) उसा (•ि पु०) १ सह, टकड़ा। बस इत्यादिको उम्फ-एक प्रकारका प्राचीन वाजा। यह सबसे गोल फलियोका बनाया घाबरतन, दौरा, टोबरा । बई मेडी पर चमड़ा मढ़ कर बनाया जाता है। बुन- खली (विलो . ) पण, छोटा टवाड़ा। २ रुपारी। प्रदेश इसका बहार अधिक है। ...३ लिया।