पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/९३

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साथ मुलतान पर समय कानको अग्रसर हुए। . शिरसिंह मुखामका साथ देनेगा प्रभावकारी साम पामयी पास दोनों पक्षों में एक छोटा बुबा । उनके पास दूत मेगा परमूनावीरमि'का पूरी तर परिजोंकी तरफ सेना वहत ज्यादा हो। कुछ देर बाद विशाम न कर सके। उहोंने थपथपाई पर तो भो मूलराजने वनस्खलसे प्रस्थान किया। उनके सैन्धमाम मूलराजक मन्दे मूलसे दूरगा । पाविर शेरसिं सोने भी उनके दृष्टान्तका अनुकरण किया। पारिज ने कहा कि उनको मेमाको नाम पत्रिम वितम देने के लोग उनका पीछा करते हुए मुमतान-दुर्ग के पाम तक साजराथमें जा कर अपने विभाका साथ देंगे। मूल- पर। एडवर्डस साहयने दुर्गको शीघ्र ही पवरोध राजने मौका हाथ न जाने दिया औरमिको पन्च करना चाहिये-गम पाययको एक चिट्ठो रेमिडेपट के प्रदेश में जा करना सिखध प्रज्वलित र दिशा पाम भजी। डलहोसो और मि० गाफ उम समय तक पंजोंके अवशेष छोड कर चले जाने पर भूगराज भी दुर्गको घेरनेके पक्षपाती न थे. किन्तु उनके पत्र पानसे निवित नहीं हुए थे। वे समझाने थे कि, माग पहले ही रेसिडेण्ट माहब दुर्ग अवरोध करने के लिये पुन: हिगुणा उत्साह और अधिकतर वमके साथ दुर्ग पर मुलतानको खवरदे चुके थे और तदनुमार प्रबन्ध भी कर पाक्रमण करेंगे। समलिए उन्होंने दुर्ग को मात करा चुके थे। इसलिए डसहोमीने रेसिडेण्टको क्षमता और और मेना मग्रह करनेकी कोशिश करने लगे। मिर्फ पानाको पशुस रखने के लिये उनके प्रस्तावमें सम्मति है इतनेमे हो सन्तुष्ट नहीं हुए. उन्होंने बाबुमारे दोस. दो। २४ जुलाईको दृढ़ उत्साह के माथ मलतान दुर्ग महम्मद पोर जन्दाहारके सरीने सहायता देने के लिए पवरोध करने के लिए मेनापनि लुइमने युद्ध यात्रा की। लिख भेजा। बहबलपुरमे लेक मायके अधीन ५७०० पयादे और धरज लोग भी दुर्ग जय परीके स तरह १०. प्रवारोही तथा राजा शेरसिसके अधीन ८०८ सरहकी तरकी सोच रहे थे। जिससे उनको विटा फल पयादे और ३३८२ अश्वारोहो सिख-मेना मुम्लतान अव- वती हो, इसके लिए वे काफी उपकरणोशा. मग भो रोध के लिए अग्रसर हुई। कार्टलेण्ड, एडवर्डम., कर रहे थे । क्रमश: बम्बई मोर मानने सेना कर और शेरसिंहके अधीन बहुमख्यक सेनाने मुलतान । पा कर उपस्थित हुई। अधिक ममय नष्ट कर पारज घेर लिया। मूलराज बहत डर गये। उन्होंने बटनेखरी सेनापतिले १७ दिसम्बरको पुनः दुर्ग पर पासमय और उनके मित्र महाराज दिलोपसिहको भामममपंगा करने के लिए पादेश दिया। थोड़ेहो पायाससे दुर्ग के करने का विचार किया। किन्तु मी समय एक नवीन कर एक स्थान टूट जाने पर मूलराजने डर कर पाम- घटनाने उनके विचारको महमा पलट दिया। अगरेज समर्पण का प्रस्ताव किया। प्रारज-मेनापतिने उनसे और दलोपसिंहके पक्षक सिखों में विद्रोहके लक्षण दिखाई बिमा यत्त के पामसमर्पण करने के लिए कहा। किन्तु दिये । हाजरादेशमै शेरसिंहके पिता छत्रसिह विद्रोही इसमे जो न हो कर मूलराज पामरक्षा करने लगे। हो गये। मूलराजके उदयमें न तन पाशाका बङ्कर कुछ दिन बीत गये । किन्तु इससे क्या होता ? बाहर उदित हुआ। असीम पत्र बड़े थे; उनको सेना बहुत थोड़ी थी। शव. ____७ सेम्बरको दुर्ग पर पाक्रमण किया गया। शेर. दिन दिन विजय लाभ कर रहें। समको टा सिंह अभी तक सलम्बा नामक स्थानमें ठहरे हुए थे। १४ नहीं सकते। क्रमशः सनका साहम जय होने लगा। ण्या- भेम्बरको उन्होंने मुलतानमें अग्रसर हो कर उनका यान्तर न देख कर १८४८० जनवरो महीनेमें मूल- जयढका खालसापोंके नामसे बजनेके लिए आदेश दिया। गाने प्रामसमय किया । पारिजोने दुर्ग पर अधि- यह संवाद सुन कर ग्रेज सेनापतियों ने परामर्श करके टिम्बी नामक स्थानमें पौछ लौटनेका मिचय किया, वहाँ कार कर लिया। साहोरमै मुखराजका विचार हुमा; पहुंचकर वे प्रधान सेनापतिको मजो सेनाकी बाट विधारमें वे दोषो प्रमाचित हुए पौर निर्वामित किये Vol. 1x.23