पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/९६

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रेलहौसी प्रादेश देनी मा एक मात्र मुप्रिम-गवर्म'टको ही प्रस्तावसे सहमत न, सलिए गवर्नर-जनरलने यह पास है। वरसमें किमी भी तरह चमता प्रकट नहीं कर निचय किया कि, जिससे इस पनिष्टको सहने वा मासा सकत, इस पत्र पाने के बाद सर वालम नेपियर युद्ध में व्याप्त न होना पड़े, उसके लिए मोलमेनको जिन रस्तीफा दे कर १८५१ में इंग्लैण्ड चले गये। दो नदियोंसे देश में बाणिज्यतरो जातो पाती है, उन पञ्जाबको गड़बड़ी पूरी तरह शान्त हो भी न पाई दो नदीको घेरना पावश्यक है। १८५२ ई०को रलो थो कि, इतने में दूसरी पोर फिर रणदुन्दुमि बज उठो। जनवरीको पावासे उत्तर पाया कि, रंगूममें दूसरे ब्रह्मदेशकै राजाके साथ जो सन्धि हुई थी, उसमें एक शासम-कर्ता नियुक्त हुए और उपयुक्त पतिपूर्ति के नियम था कि, बटिय प्रजा ब्रह्मदेयके बदरमें बेखटके लिए उन पर पादेव है। नो-सेनापतिने इस संबादमे बाणिज्य कर सकेंगे। डलहौसोके समय १८५१ ईमें अत्यन्त उत्साहित हो कर मवोन प्रतिनिधिसे समस्त कुछ बणिकों और बाणिज्य जहाज के अध्यक्षोंने कलकत्ते विषयका उल्लेख करने के लिए फिसाबोर्ण तथा अन्य २ को एक आवेदनपत्र इस प्राशयका भेजा कि-रंगूनके कर्मचारियोको भेजा। किन्तु उन्होंने जो सोचा थ', शासनकर्ता अगरेज बपिको पर अत्यन्त अत्याचार कर कार्य में उसका विपरीत हुमा । उन लोगोंने रंगून पहुंच रहे हैं, जिससे व्यवसायको बड़ी भागे हानि हो रही कर वहांके शासनका से मुलाकात करनी चाहो : है। पति-पूर्ति कराने के लिए नौ सेनापति ले मबाट उनको कहा गया कि, “शासनकर्ता सो रहे है. इस एक दल सेनासहित रंग न भेजे गये। गवर्नर जन- ममय मुलाकात नहीं हो सकतो।" अगरेजोंने सम्भवत: रखने उममे कह दिया कि, 'पहले पाप र गूमके शासम इस प्रकारके उत्तरसे सन्तुष्ट न हो कर किसी प्रकारको कौके पास जा कर समस्त विषयको संक्षेपसे कहें, क्षमता प्रकट को होगी, और इसी लिए उन्ह अपमानित यदि वे क्षति-पति न करें, तो पाप बापिस चले आयें।' हो कर लोट पाना पड़ा। इस अपमानका बदला लेनेक किन्तु मामला सहजमें तय हो जायगा, इसमें सन्द लिए हो लैमबाट के पादेशानुसार फिमाबोर्नमें आवा था, इसलिए डल होमोने लैमबाट के माथ दोनों गवर्मेट गज्यका एक जहाज रोक लिया। इससे समरानल प्रज्व- को मित्रताको रक्षाके लिए रंगूनके शामनकर्ताको कमै- लित हो उठा। १० जनवर्गको प्रकाश्य रूपसे शव ता. युस करने के लिए बनदेशके राजाके नाम एक पत्र लिख चरणका प्रारम्भ हुचा। लेमबाट संबाद देने के लिए दिया और सेनापतिको पाज्ञा दी कि यदि रंगूनमें कलकत आ गये। उनहोसीने उस समय ब्रह्मराजको क्षतिपुति म हो, तो इस पत्रको ब्रह्म के राजाके पास निम्नलिखित मम का एक पत्र लिखा:- भेज देना।' नबम्बर के मासके अन्त में वे रंगून पर'चे, (१) ब्रह्मराज रमूनके क्तमान शासनकर्ताक और २८ तारीखको उनों ने कलकत्त को कौन्सिलको कार्य का अनुमोदन नहीं करें पौर टिश-कर्मचारियों लिय' कि, 'रंगूनके धामनकर्ताके विरुद्ध जो पभियोग पर जो अत्याचार हुए हैं, उसके लिए दुःख प्रकट करें। लगाया गया है, वास्तव में यह अभियोग उसको अपेक्षा (२) दो कालानों पर अत्याचार पोर पारेज बणिका. बहा गुरुतर है, इसलिए मैं उक्त शासनकर्तासे किसी को पर्यानिके कारण पानाराज चतिपूर्ति स्वरूप विषयका उल्लेख न कर ब्रह्म-गमा के पास उस पत्रको गवर्म एटको १० लाख रुपये देवें । भेजना है। डलहौसीने सेमापनिक कार्य को पूरी (३) यान्दाबूको सन्धिके अनुसार एक एजह तरहसे अनुमोदना को और कहा कि स्थानीय शासन 'गूनमें रहेंगे पोर ब्रह्मराज्यकी प्रजामात्र उनका ययो- चित सम्मान करेगी। काके साथ वादानुवाद न करके सैम्बार्ट ने बुद्धिमत्ता. काही परिचय दिया है , किन्तु महसा युद्ध न होने पावे. (४) र'गूनके वर्तमान शासनकर्ताको स्थानान्तरित इस विषयमे उनको मावधान कर दिया गया। मभव करना पड़ेगा। उपरोत नियमों पर सम्मति घोर १२ नीलसे पहले उसके अनुसार कार्य न करनेसे युद्ध मा राजा का उत्तर न दें,अथवा अंग्रेजोंक मा .