पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१०१

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फिरोजपुर १६२६ ई०में 'अकासद सुफिया' नामक पारसी भाषामें सर्वमयी कत्तीरूपमें राजकार्यकी पर्यालोचना करने लगी। ईश्वरतत्त्वके सम्बन्धमें एक पुस्तक लिखी है। रानोके परलोकगत होने पर बृटिश सरकारने अपने हाथ फिरोजपुर-पजाब प्रदेशके आन्तर्गत जालन्धर विभागका कार्य भार ग्रहण किया और सर हेनरी लारेन्स यहां रहने एक जिला। यह अक्षा० २६ ५५ से ३१ पू० और लगे। देशा० ७३ ५२ से ७५ २६ पू०के मध्य अवस्थित है । भूपरि- १८४५ ई०का प्रथम सिख युद्ध ( रुड़की, फिरोज- माण ४३०२ वर्गमील है। शत और वितस्ता नदी: शहर, अलिवाल और सोब्राउन नामक स्थानके कुछ आपसमें मिल कर जिलेके मध्यसे बह गई है। युद्ध ) इसी जिलेमें हुआ था। १८५७ ई०के गदर में इसके दक्षिण-पश्चिम और दक्षिणमें वहबलपुर तथा अंगरेजोंको यहां भी अनेक कष्ट भुगतने पड़े थे । बीकानेर राज्य और पूर्व में लुधियाना जिला है। इस जिलेमें ८ शहर और १५०३ प्राम लगते हैं। जिलेमें जगह जगह अनेक अट्टालिकाओं और कूषों- जनसंख्या दश लाखके करीब है जिनमेंसे सैकड़े पीछे का भग्नावशेष देखने में आता है। इन सबसे प्रतीत . ४७ मुसलमान, २६ हिन्दू और शेष २४ सिख हैं। यहां- होता है, कि एक समय इस जनहीन प्रदेशमें भी लोगों की भाषा पंजावी है। गेहूं, चना, जुनहरी जिलेको प्रधान का अधिक संख्यामें बास था। शुष्कप्राय खालके समीप- उपज है। गेहूँ तथा धान बहुत कम उपजता है । जो वत्ती ( अभी जिसे जनमानवशून्य मरुभूमि कहनेमें भी सब अनाज यहां उपजता है उसकी रफतनी लुधियाना, कोई अत्युक्ति नहीं ) भूभागमें आज भी उस प्रकारके : अमृतसर, बहबलपुर, लाहोर, जालन्धर, हिसार, होशियार- अनेक निदर्शन पाये जाते हैं। किस समय इस जन- पुर आदि स्थानोंमें होती है तथा आमदनोमें चीनी, रुई, पदकी समृद्धिका ह्रास हुआ था, उसका कोई निश्चय : शीशम, धातु, नील, तमाकू, नमक, धान और मसाला नहीं है। किन्तु आईन-इ-अकबरी पढ़नेसे मालूम होता है, . प्रधान है। फिरोजपुर शहर वाणिज्यका एक प्रधान कि सम्राट अकवरशाहके समय शतद्र नदी फिरोजपुर केन्द्र है। १७५६.६० और १७८३-४ ई०में यहां घोर नगरके पूर्व ओर बहती थी। नदीके गतिवर्त्तनसे जला- अकाल पड़ा था। उस समय गेह रुपयेमें सवा सेर भाव होने तथा १६वीं शताब्दीके शेषमें घोरतर युद्धके - मिलता था। अलावा इसके यहां और कई बार दुर्भिक्ष- कारण यह स्थान जनशून्य हो गया है। प्रायः दो का प्रकोप देखा गया है। शताब्दी तक यह स्थान मरुभूमि-सा पड़ा रहा । पोछे डिप्टी कलकर छह सहकारी कमिश्नर द्वारा शासन- दोनो जातीय राजपूत लोग भट्टियोंको खदेर कर पाक- कार्य चलाते हैं। इसकी सुविधाके लिये जिला पांच पत्तनके निकर बस गये। धीरे धीरे शतद्र उपत्यका : तहसीलोंमे विभक्त है यथा. फिरोजपुर, जीरा, मोगा, पार कर उन्होंने १७४० ईमें फिरोजपुर नगरमें ही राज: मुकासर और फाजिलका । एक एक तहसीलदार और धानी बसाई। इस प्रदेशमें काफी आमदनी न रहनेके नायब तहसीलदारके अधीन है। इस प्रद शके अठाईस कारण मुगल-सम्राट्ने इस पर हस्तक्षेप नहीं किया। जिलोंमेंसे फिरोजपुर जिला विद्याशिक्षामें चौदहवां है। परन्तु शतद्र के पश्चिमवत्ती कसुर नगरमें उनका एक सैकड़े पीछे ४ मनुष्य लिम्व पढ़ सकते हैं। अभी जिले फौजदार था जो लक्का जगलकी देख रेख करता था ।। भरमें १० सेकण्डी, २०० प्राइमरी, १०० एलिमेण्ट्री स्कूल १७६३ ई०में गुजर सिंहके अधीन भङ्गिमिसलोंके और एक एङ्गलो-वर्नाक्युलर हाई स्कूल है जिसका खर्च सिखोंने फिरोजपुर पर अधिकार किया। पीछे वह म्युनिसपलिटीकी ओरसे दिया जाता है । अलावा स्थान गुजरके भतीजे गुरुवक्स सिंहके हाथ लगा । इस इसके दो और अप्राप्त साहाय्य ,हाई स्कूल हैं, एक हर नवीन सरदारने यहां एक दुर्ग बनवाया था । १७९२ ईमें भगवान् दास मेमोरियल हाई स्कूल फिरोजपुर शहरमें उनके द्वितीय पुन धन्यसिंह यहांके शासनकर्ता हुए। और दूसरा 'देवधर्म हाई-स्कूल' मोगामें । स्कूलके अलावा १८१८ ई०में उनकी मृत्यु होनेसे उनकी पत्नी राज्यको यहां सरकारी अस्पताल भी है