पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१०२

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फिरोजपुर-फिरोजशाह २ उक्त जिले की एक तहसील। यह अक्षा० ३०४४ । झिरका भी है। यह अक्षा० २७.४६३० उ० और से ३१७ उ० और देशा० ७४ २५ से ७४.५७ पू०के ! देशा० ७६ ५६ ३० पू०के मध्य अवस्थित है। सम्राट मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण ४८६ वर्गमील और जन-: फिरोजशाहने निकटवत्तों पार्वतीय जातिका दमन करनेके संख्या प्रायः १६५८५१ है । इसके उत्तर पश्चिममें शनद्रु लिये इस नगरको दुर्ग से सुरक्षित कर दिया था। १८०३ नदी बहती है जो तहसील के लाहोर जिलेसे पृथक करती है, ई०में अंगरेजराजने इस स्थानको हस्तगत कर अहमद- इसमें फिरोजपुर और मुदकी नामके २ शहर और ३२० बक्स खाको जागीर स्वरूप प्रदान किया। उनके पुत्र ग्राम लगते हैं। आय दो लाखसे ऊपर है। युद्धस्थान नवाब साम्सुद्दोन खाँ दिल्लीके कमिश्नर फ्रेजर साहबकी फिरोजशाह इसी तहसीलके अन्तर्गत है। । हत्याके अपराधमें १८३६ ई०को अंगरेजोंसे मार डाले ___३ उक्त तहसीलका एक प्रधान शहर। यह अक्षा० : गये। तभीसे यह नगर उक्त तहसीलका सदर चला आ ३०.५४ उ० और देशा० ७४३७ पू० शनके पुरातन रहा है। किनारे अवस्थित है। यह रेलगाड़ीके द्वारा बम्बईसे फिरोजमुल्ला -बम्बईवासी कदीमी पारसियोंका प्रधान धर्म १०८०, कराचीसे ७८८ और कलकत्तेसे ११६४ मील याजक। ये काउसके पुत्र थे। इन्होंने पुर्तगीज आग- दूर पड़ता है। जनसंख्या पचास हजारके लगभग है। मनसे ले कर १८१७ ई०में अंगरेजी अधिकार पर्यन्त मुसलमान और हिन्दुको संख्या करीब करीब वगवर है। समस्त घटनाओंका उल्लेख कर 'जाज नामा' नामक एक लोगोंका विश्वास है, कि दिल्लीश्वर फिरोजशाहने (१३५१- ग्रन्थकी रचना की। १३५७ ) इस नगरको बसाया। सरदार लक्ष्मणकुवर फिरोजशाह --दिल्लीश्वर सलीमशाह सूरके एकलौते । की मृत्युके बाद वृटिश-गवर्मेण्टने इसे १३२५ ई०में अपने पिताको मृत्युके बाद बारह वर्षके बालक दिल्लीके सिंहासन साम्राज्य-भुक्त किया। अंगरेजोंके हाथ आनेसे अर्थात् पर बैठे। किन्तु तीन मास भी राज्य करने न पाया था, १८३५-५१. ई०के मध्य व्यवसाय-वाणिज्यमें यह शहर कि उनके मामा मुबारिक खाँने बड़ी निष्ठुरतासे उनकी विशेष समृद्धिशालो हो उठा था । ९८४५-४६ ई०में शतद् ! हत्या ( १९५४ ई०में ) की और स्वयं मुहम्मदशाह आदिल युद्ध में जो अंगरेजी सेना मारी गई थी, उनकी स्मृतिमे. नाम धारण कर दिल्लीको मसनद पर बैठे। एक गिरजा बनाया गया था जिसे गदर के समय उद्धत फिरोजशाह- पक्षावके फिरोजाबाद तहसील और जिलेका सिपाही दलने तहस नहस कर डाला। एक प्रसिद्ध यद्धस्थल। सिख-यद्धके लिये यह स्थान नगरसे एक कोस दक्षिण सेना-निवास है। इसके बहुत मशहूर है। १८४५ ई०के दिसम्बर मासमें सर अर्सेनल वा अस्त्रागारमें प्रचुर युद्धोपकरण रखे हुए हैं। ह्य गफ और हेनरी हार्डिजने सिखसेनाओं पर आक्रमण पंजाव भरमें ऐसा और कहीं भी नहीं है। १८६७ ई में : किया। दो दीन भीषण युद्ध के बाद सिख लोग भाग जाने- म्युनिस्पलिटी स्थापित हुई है। शहर में दो पेङ्गलो वर्ना को वाध्य हुए। युद्धके समय सिखोंने जो दुर्ग-खाई क्युलर हाई स्कूल, एक एङ्गलो-वर्नाक्युलर मिडिल स्कूल बनवाई थी, उसका बिलकुल लोप हो गया। केवल और एक सरकारी अस्पताल है। मृत सेनापतियों की स्मृतिके लिये जो स्तम्भ खड़ा किया फिरोजपुर-पाबके गुरुगाँव जिलेकी एक तहसोल। .या था, वही विद्यमान है। इस स्थानका आदि नाम यह अक्षा० २७ २६ से २०१३ उ० और देशा० ७६ : फरुखशहर है। ऐतिहासिक घटनाके लिये इसका ५३ से ७७२० पू०के मध्य अवस्थित है। जनसंख्या फिरोजशाह नाम पड़ा है। डेढ़ लाखके करीब है। इसमें १ शहर और २३० ग्राम फिरोजशाह-दिल्लीके शेष मुगलसम्राट् २य बहादुरशाहके लगते हैं । भूपरिमाण ३१७ वर्ग मील है।। पुत्र । १८५७ ई०के गदरमें उन्होंने असीम उत्साहसे ___ २ उक्त गुरुगांव जिलेका प्रधान नगर और फिरोज- विद्रोहीदलका नेतृत्व किया था। युद्धके बाद अंगरेजों- पुर तहसीलका सदर। इसका दूसरा नाम फिरोजपुर- । के भयसे वे अरवदेश जान ले कर भागे। वहां