पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१०४

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ए फिरोजशाह सुलतान-फिरोजाबाद जाता रहा। पूर्ववत्ती राजाओंकी तरह ये अयथा कर ओर यात्रा कर दी। अलाउद्दीन दलबल समेत गंगाके वसूल नहीं करते थे। उन्होंने नियम चलाया, कि जो | दूसरे किनारे भाग गये और वहीं छावनी डाली। फिरोज- किमोसे अधिक कर वसूल करेगा उसे उचित दण्ड शाहके उपस्थित होने पर वे अपने अनुचरोंके साथ मिलेगा और राजाके आवश्यकीय सभी द्रव्य उपयुक्त नदीके किनारे आये और चचाके पैरों पर गिर कर क्षमा- मूल्यमें खरीदा जायगा। प्रार्थना की। फिरोजशाहको बड़ी दया आई, उन्होंने ___ उन्होंने दलबल के साथ लक्ष्मणावती, जाजनगर और | अपराध क्षमा कर उन्हें प्रेम-पूर्वक आलिङ्गन किया। नगरकोटको ओर अभियान किया। बङ्गपति शमसुद्दीन इसी समय इशारा पा कर अलाउहीनके अनुचर जो उनसे पराजित हुए। पीछे लाखसे ऊपर बङ्गवासी इस कुछ दूर ही खड़े थे आये और दिल्लीश्वरके प्राण ले लिये। युद्धमें खेत रहे। उन्होंने दो बार बङ्गमें और कई बार अलाउद्दीन चचाके छिन्न मुण्डको परछेमें गांथ कर नगर सिन्धु, गुजरात, कांगड़ा आदि प्रदेशोंमें युद्ध किया था। ले गये । १७२६ ई०में यह घटना घटी। इसके बाद अला. १३८७ ई०में उन्होंने अपने पुत्र नासिरउद्दीन महम्मद उद्दीन दिल्ली गये और सिकन्दर-सनी नाम धारण कर को सिंहासन दे कर फुरसत पाई। किन्तु युवराजका सिंहासन पर अधिरूढ़ हुए । खिजिरावादसे ले कर.सफि- राज-कार्यमें जरा भी ध्यान न था। रात दिन वे आमोद दून पर्यन्त एक विस्तृत नहर उन्हींके यत्नसे खोदवाई प्रमोदमें मत्त रहते थे, इस कारण वे पुनः राज्य-परिचालन गई थी। भार ग्रहण करनेको वाध्य हुए। युवराजने विताड़ित फिरोजाबाद-१ युक्तप्रदेशके आगरा जिलेको एक तहसील । हो कर शिरमूरके पार्वत्य प्रदेशमें जा आश्रय लिया। यह अक्षा० २६५६ से २७२२ उ० और देशा० ७८.१६ से फिरोजको बनाई हुई अनेक अट्टालिकाएँ, नहरें और ७८३२° पू०के मध्य अवस्थित है । भूपरिमाण २०३ दुर्गादि आज भी देखनेमें आते हैं। बहुत दिन सुशासन वर्गमील और जनसंख्या लाखसे ऊपर है। इसमें फिरोजा- से राज्य करके वे ७६० हिजरीमें ( १३८८ ई०में) परलोक बाद नामका १ शहर और १८६ प्राम लगते हैं। राजस्व सिधार गये। पुरानो दिल्लीके समीप यमुनाके किनारे तीन लाख रुपयेके लगभग है। तहसील यमुनाके उत्तर उनके बनाये हुए 'हौज खासमें उनकी समाधि हुई। पड़ती है। मृत्युके बाद पौत्र गयासुद्दीन राज-सिंहासन पर बैठे। २ उक्त तहसीलका एक शहर । यह अक्षा० २७६ उनके समय लक्ष्मणावतो, पाण्डुआ (फिरोजाबाद), सोनार- उ० और देशा० ७८२३ पू. आगरासे मैनीपुर जानेके गाँव आदि स्थानोंमें टकसाल खोली गई। उन्होंने स्वयं रास्ते पर अवस्थित है। जनसंख्या प्रायः १६८४६ है। जो सब युद्ध किये थे, उन्हें वे स्वरचित 'फतुहत फिरोज यह शहर बहुत प्राचीन है। कहते हैं, कि यहांके अधि- शाही' नामक ग्रन्थमें लिख गये हैं। (१) बासियोंने टोडरमलका भारी अपमान किया था। इस पर फिरोजशाह सुलतान-खिलजी वंशीय प्रथम दिल्लीश्वर अकबर बड़े बिगड़े और उन्होंने मालिक फिरोजको कायम खाँके पुत्र । ये सुलतान मुइ-जुद्दीन कैकोबादकी नगर-ध्वंस करनेका हुकुम दिया । अशा पाते ही फिरोजने हत्या कर ६८८ हिजरी (१२८२ ई० में) में दिल्लीके सिंहा नगरको ऐसा उजाड़ डाला कि आज तक वह सुधरने सन पर बैठे। इनका दूसरा नाम जलालउद्दीन था । इनके नहीं पाया है। यहां बड़ी बड़ी अट्टालिकाओंका ध्वंसावशेष शासनकालके आठ वर्ष इलाहाबादके शासनकर्ता देखने में आता है। यही इसके पूर्व गौरवका निदर्शनखरूप उनके भतीजे और जमाई अलाउद्दीन बागी हो गये। है। चिकित्सालयके अलावा शहरमें एक पुरानी मसजिद फिरोजने उन्हें शास्ति देनेके लिये कड़ा-माणिकपुरकी और अनेक मन्दिर हैं। फिरोजाबाद-अयोध्याप्रदेशके खेरी जिलान्तर्गत एक (१) - र --.फोजी नामक इतिहास-ग्रन्यमें विस्तृत | परगना। यह चौका, कौरियाला और दहबार इन तीन विवरण लिखा। नदियोंसे घिरा सम्राट है। फिरोजशाह यहां प्रायः