पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१०५

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फिको-फोरोजा शिकारमें आया करते थे। इसी कारण उन्हींके नाम पर फिली (हिं. स्त्री०) १ लोहेकी छड़का एक टुकड़ा जो इसका नामकरण हुआ है। पहले यह बिसेन जातिके : जुलाहोंके करघेमें तूर में लगाया जाता है । डी देखो। अधिकारमें था। पीछे ज प्रोगणने उपयुपरि युद्धके बाद फिश् (हिं० अव्य० ) घृणासूचक अध्यय, धिक, फिट् । उन्हें मार भगाया। १७७६ ई०में जीराजके पराजित और फिस ( हिं० वि० ) कुछ नहीं। जब कोई आदमी बड़े मृत होने पर उनका राज्य छीन लिया गया। १७९२- ठाटबाटसे कोई काम करने चलता है और उससे नहीं हो ई०में भरण पोषणके लिये उनके वंशधरने निष्कर ग्राम सकता तब तिरस्कार रूपमें यह शब्द कहा जाता है। पाये। यही अभी ईशानगर सामन्त राज्य कहलाता है। फिसड़ी ( हिं० वि० ) १ जो काममें पीछे रहे, जो किसी इसके उत्तर राइकबाड़ सामान्तराज्य पड़ता है। बातमें बढ़ न सके। २जो काम हाथमें ले कर उसे पूरा फिको (हिं० पु०) फिरता देखो। न कर सके, जिसका कुछ किया न हो। फिलौर-पञ्जाब प्रदेशके जालन्धर जिलेकी तहसील । यह : फिसफिसाना ( हि० कि० ) १फिस होना। २ शिथिल अक्षा० ३०५७ से ३१ १३ उ० और देशा० ७५ ३१ से होना, ढीला पड़ना।। ७५५० पू०के मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण २६१ वर्ग- फिसलन ( हिं० स्त्री०) १ फिसलनेको क्रिया या भाव, मील और जनसंख्या दो लाखके करीब है। इसमें फिलौर, रपटन। २ चिकनी जगह जहां पड़नेसे कोई वस्तु न नूरमहल और जनदियाल नामके ३ शहर और २२२ ग्राम ठहरे, सरक जाय। लगते हैं। शतद्र नदी तहसीलको उत्तरी सीमामें ! फिसलना ( हिं० कि० ) १ चिकनाहट और गीलेपन के बहती है। कारण पैर आदिका न जमना। २ प्रवृत्त होना, झुकना। २ उक्त तहसीलका एक प्रधान शहर । यह अक्षा० फिसलाना (हि. क्रि०) किसीको ऐसा करना कि वह ३१.१ उ० और देशा० ७५४८ पू० शतद् नदीके उत्तरी फिसल जाय। किनारे अवस्थित है। जनसंख्या प्रायः ६६८६ है। फिहरिश्त ( फा० स्त्री०) सूचो, वोजक । पहले यह नगर समृद्धिसम्पन्न था। आईन-इ-अकबरी फो (अ० अध्य० ) प्रति एक, हर एक । पढनेसे मालूम होता है, कि बैराम खाँने इसके निकटवत्तों फीका (हि वि०) १ नीरस, स्वादहीन । २ जो चटकोला स्थानमें युद्ध किया था। इसके बाद यह नगर ध्वंसाव- न हो, मलिन। ३ प्रभावहीन, व्यर्थ । ४ कान्तिहोन, शेषमें परिणत हुआ। सम्राट शाहजहानने दिल्लीसे बिना तेजका। लाहोर जानेके समय यहांके ध्वंसावशेषसे एक विश्राम- फीता (हि.पु.) १ नेवारकी पतली धज्जी, सूत आदि भवन ( सराय ) बनाना चाहा । क्रमशः उन्हींके उद्यमसे जो किसी वस्तुको लपेटने या बांधनेके काममें आता नगरकी श्रीवृद्धि हुई थी। सिख-प्रभावकालमें यह नगर है। २ पतला किनारा या कोर । सुधासिंहके हाथ लगा। उन्होंने यहां राजधानी बसाई। कोकोपीके फीफरो (हि. स्त्री०) फेफरी देवो। १८०७ ई० में रणजित्ने इस स्थान पर अधिकार जमाया। फोरनी (फा० स्त्री०) एक प्रकारको खोर जो दूधमें चावल- उक्त महावीरने शतद्र मुखकी रक्षा करनेके लिये उस का बारीक आटा पका कर बनाई जाती है। इसे मुसल- सरायको दुर्गरूपमें परिवर्तित किया। अगरेजोंके अधि- मान अधिक खाते हैं। कारमें आनेसे यहां कमान, गोला, बारूद आदि रखी फीरोजा (फा० पु०) एक प्रकारका नग या बहुमूल्य जाने लगीं। १८५७ ई०के गदर में विद्रोहियोंने इस पर पत्थर। यह हरापन लिए नीले रंगका होता है। इसमें अधिकार किया था। १८६१ ईमें यहां एक किला अलमीनियम फासफेट और कुछ लोहे तथा ताँबेका भाग बनाया गया जिसमें अभी पुलिस-ट्रेनिंग स्कूल लगता है। १८६७ ई०में म्युनिस्पलिटी स्थापित हुई । शहरमें एक रहता है। उत्कृष्ट फीरोजा फारसको पहाड़ियों में पाया म्युनिसिपल एङ्गालोवर्नाक्युलर मिडिल स्कूल और एक जाता है। वहांसे पहले यह रूम और तब यूरोप जाता सरकारी अस्पताल है। है। अमेरिकासे भी फिरोजा बहुत भाता है। उसकी