पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१०६

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फीरोजी-फुटका गिनती रत्नों में है। लोग इसे आभूषणोंमें जड़ते हैं। कम फुकार (हिं० पु० ) साँप बैल आदिके मुंह वा नाकके दामके पत्थर पच्चीकारी में भी काम आते हैं। वैद्यलोग नथनोंसे बलपूर्वक वायुके बाहर निकलनेसे उत्पन्न शब्द, इसका व्यवहार औषधके रूपमें भी करते हैं। यह कसैला, फूत्कार । मीठा और दीपन कहा गया है। फंदना (हि. पु०) १ फूलके आकारको गांठ । बंद, इजार- फीरोजी ( फा० वि०) फीरोजेके रंगका, हरापन लिये बंद चोटी बांधने या धोती कसनेकी डोरो, झालर आदिके भोला। इस रंगमें रंगाते समय पहले कपड़े को तृतिये- छोर पर शोभाके लिये इसे बनाते हैं। इसे फुलरा और के पानी में रंगते हैं, फिर तृतियेसे चौगुना चूना मिले झब्बा भी कहते हैं । २ वह गांठ जो कोड़े की डोरीके छोर पानीमें उसे बोर देते हैं और तब पानीमें निथारने हैं। पर रहती है। ३ वह गांठ जो तराजकी डडोके बीचको रस्सोमें दी जाती है। इ प्रकार तीन वार करते हैं। फुदी (हिंस्त्रो०) फदा, गांठ । फील ( फा० पु० ) हाथी। फुसी ( हि स्त्री० ) छोटी फोडिया। फोलखाना ( फा. पु०) हस्तिशाला, हथिसार । फोलपा (फा. पु.) एक प्रकारका रोग इसमें पैर फूल फुआरा ( हि पु० ) फुहाग देखो। कर हाथीके पैरकी तरह हो जाता है। यह रोग शरीर-फु ( स० पु० ) फल-कु। १ मन्त्रोच्चारणपूर्वक फुत्कार । २ तुच्छ वाक्य । के दूसरे अंगों पर भी आक्रमण करता है। ..फुक ( स० पु०) फुना अस्पष्टवाक्येन कार्यात शब्दायते फीलपाया (फा० पु० ) १ ईटेका बना हुआ मोटा खंभा

इति फु-कै-क । पक्षी।

जिस पर छत ठहराई जाती है। २ फीला देखो। फुकना (हिं० कि०) फुकना देखो। फीलवान : फा०पु०) हाथीवान। फुकाना ( हि क्रि० ) फुकाना देखो। फीली (हि स्त्री० ) घुटनेके नीचे पड़ी तकका भाग, फुङ्गी चट्टग्रामके पार्वत्य जातिका पुरोहित । ये लोग पिंडली। ' प्रायः बालकोंको लिखाना पढ़ाना सीखलाते हैं। फोल्ड ( अं० पु० ) १ मैदान, खेत। २ गेंद खेलनेका . फुचड़ा ( हिं० पु० ) वह सूत या रेशा जो कपड़े, दूरी मैदान। _कालीन, चटाई आदि बुनी हुई वस्तुओं में बाहर निकला फोस ( ० स्त्री०) १ शुल्क, कर । २ मेहनताना, उजरता रहता है। फुकना (हिं० क्रि०) १ जलना, भस्म होना । २ मुहकी हवा फुट (सं० पु. ) स्फुटतीति स्फुट-क, पृषोदरादित्वात् भर कर निकाला जाना। ३ नष्ट होना, वरबाद होना। माधुः। सर्प-फणा, सांपका फन । (९०) ४ बांस, पीतल आदिको नली । इममें मुंहकी हवा इसम मुहका हवा फुट ( हिंवि० ) , अयुग्म, जिसका जोड़ा न हो। २ । भाकर आग पर छोडते हैं, फुकनी। ५प्राणियोंके जिसका संबंध किसी क्रम या परम्परामे न हो पृथक । शरीरका मूत्र रहनेका अवयव । यह पेड़ के पास होता है।

फुट (अं० पु. ) आहन विस्तारका एक अंगरेजी मान जो

एकनी ( हिंस्त्री०) १ बांस, पीतल आदिका नली। १२ उंच या जौके बरावर होता है। इसमें मुंहक हवा भर कर आगको दहकानेके लिये उस फुटकर (हिं० वि० ) १ अचुग्म, जिसका जोड़ा न हो। २ पर छोड़ते हैं। .. भाथी। भिन्न, भिन्न, कई प्रकारका । ३ थोड़ा थोड़ा, इकट्ठा नहीं। फंकरना ( हिं० क्रि० ) फुत्कार छोड़ना, मुंहसे हवा ४ जिसका सम्बन्ध किसी क्रम या परम्पराके साथ न हो, छोड़ना । जिसका कोई सिलसिला न हो। फुकवाना ( हि क्रि० ) १ फू कनेका काम किसी दूसरेसे फुटकल ( हिं० वि० ) फुटकर देखो। कराना। २ मुंहसे हवाका झोंका निकलवाना। ३ फुटका (हिं० पु०)१ फफोला, आबला ।२ धान, मक्क, भस्म करवाना, जलबाना। ज्वार आदिका लावा। ३गन्नेका रस पकानेका लोहे- फुकाना ( हि० कि० ) कनेका काम कराना। का बड़ा कड़ाह।