पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१३१

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फ्रान्स १२५ वे स्वयं पोपको एक छोटा राज्य दान कर राजशक्तिका प्रभाव बहुत फैला लिया था । १२७०से गये थे। १२८४६० तक ३य फिलिपके शासनकालमें लाङ्गोएडक पोपिनकी मृत्युके बाद उनके लड़के सार्लिमेन राज. फरासीराजके अधीन था। उनके वंशधर ४थ फिलिप- गद्दी पर बैठे। उन्होंने स्पेन, इटली, सैक्सनी, जर्मनी ने ८४३ ई०में जर्मन-सम्राट लोथेयरको प्रदत और बभेरिया आदि राज्योंको जीत कर ८०० ई० में यूरोप राज्योंका पुनरुद्धार करनेकी चेष्टा की। उन्होंने खण्डमें एक पश्चिम-साम्राज्य (Empire of the IVest) पोपकी क्षमता बहुत कुछ घटा दो थी। निज बसाया । इस साम्राज्यकी स्थिति सदा एक-सी न रहो। प्रतिष्ठित टेटस्-जेनरल सभाके सभ्योंकी प्रतिप्रक्षता ८४३ ई०में यह साम्राज्य परस्पर विरुद्धभावापन्न राजाओं. करके पार्लियामेण्ट महासभाको स्थापना कर गये। के विप्लवसे फ्रान्स, जर्मनी और इटली राज्यमें विभक्त हो : उनके पुत्रों के समय १३१४-१३२८ ई०के मध्य सामन्त- गया । राजमुकुट इटली और जर्मनीके कार्लोभिनजियन- विद्रोह वह्नि धधक उठी । राजपुत्रोंने किंकर्तव्यविमूढ राजवंशके ऊपर रखा गया। इसके बाद राज्यशासनका हो उसमें साथ दिया। भलोई वशने भी उनका पदा- भार कुछ समय तक विभिन्न देशीय सामन्तराजाओंके नुसरण किवा। इस विग्रह-तरङ्गमें उद्धत फरासियोंने साथ और पीछे जर्मनोंके शासनाधीन रहा। १३३७ ई०में इङ्गलैण्डके साथ युद्ध घोषणा कर दी। ८४३ ई०से ही फ्रान्सराज्यमें चार्लस मार्टेलवंशकी यह युद्ध प्रायः सौ वर्ष ( Hundreal yearswa:: ) अवनतिका सूत्रपात हुआ। राज्यपरिचालनके लिये तक चलता रहा था। फरासी राज्य क्रमशः सामन्त राजाओं के मध्य विभक्त: १३४६ ई०में फिलिप डि-भलोई (!Philip kle Valois) हुआ। १८८७ ई०में कार्लोभिनजियन राजाका प्रभाव कत्तक क्रसो-युद्धमें और श्य जानके राजत्वमें नष्ट हो जानेसे युड नामक किसी सरदारने राज्यसिंहा- पोइटियाके युद्ध में अगरेज लोग परास्त हुए । १३६४- सन पर अधिकार किया। ८६८ और ६३६ ईमें कार्लो- १३८०ई०के मध्य बालकराजने फ्रान्सका पूर्वबल बहुत भिनजियन राजवंशधरोंको फिरसे दो बार सिंहासन पर कुछ पलटा लिया था। पीछे ५म चार्ल्स के राजत्व, ६ प्रतिष्ठित करना पड़ा । किन्तु वे लोग राजदण्डरक्षामें चासके उन्मादरोग, स्वार्थान्वेषी राजपुत्रोंके आत्म- बिलकुल असमर्थ थे। फलतः ६८७ ई० में कैपेट वंशीय विच्छेद, बर्गण्डी और गास्कन राजवंशके परस्पर विरोध- राजाओंने फरासी सिंहासन पर गोटी जमाई। ये सब से फ्रान्सराज्य चौपट हो गया । १४१५ ईमें एजिन- राजगण अपने दोर्दण्ड प्रतापसे बहुकाल तक सुशृङला- कोर्ट के युद्धमें जयी हो कर अगरेजोंने फ्रान्सके समुद्रोप- से राज्यशासन करने में, मन्त्रिसभा और शासन-समिति-! कूलवत्तीं प्रदेशों पर अधिकार किया । अब फरासीगण के स्थापनमें तथा कु जेड नामक धर्मयुद्धमें सहायता आदि धीरे धीरे तेजोहीन होते आ रहे थे। इसी समय १४२६ कार्यों में, अपने प्रभावको अप्रतिहत रखनेमें तथा वंश- ईमें आर्क-निवासी जोअन नामक एक फरासी- गौरवको वृद्धि करने में समर्थ हुए थे। रमणीके असाधारण शौर्योन्मादसे उन्मत्त हो फरासियोंने कैपेट राजाओं के अधिकार-कालमें ११०८से अगरेजोंको अच्छी तरह परास्त किया जिससे फरासी १२२६ ई०के मध्य नामण्डी, अञ्ज, मेइन और पोंटू : राज्यका मानचित्र एकदम बदल गया । राजा ७वें चार्ल्स भादि प्रदेशोंका अगरेजोंके हाथसे पुनरुद्धार राइम-नगरमें फरासी-सिंहासन पर अधिष्ठित हुए। और डात्री आव फ्रान्सका अन्तर्निविष्ट हुआ। राजा फरासी सेनाके निकट उपयु परि कई एक लड़ाइयों में स्म लुईने पुत्र के तौर पर राज्यशासन किया था, इस पराजित हो अगरेज लोग १४५३ ईमें फ्रान्स छोड़ देने- कारण लोग उन्हें साधु (Saint) कहा करते थे। अपने : को बाध्य हुए। राज्यकालमें ( १२२६-१२७० ई०के मध्य ) कोई राज्य' ११वें लुईने राज्यारोहण करके सामन्तकोंकी क्षमता फतह नहीं करने पर भी उन्होंने सैन्यसंख्या बढ़ा कर हास करनेमें सफलता प्राप्त की और १४६:-१४८३ ई०के Vol. xv: 32