पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१३२

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१२६ फ्रान्स मध्य बहुतो राज्य जीत कर अपने अधिकारमें कर कुछ उपनिवेश उनके हाथसे जाते रहे। इस समय लिया । राजा ८ वें चाल्सकी अमलदारीमें फरासी-सेना फरासी साहित्यको विशेष उन्नति देखी गई। यूरोपकी इटलि युद्ध में उलझी हुई थी। तत्परवत्ती राजा १२ वें लुई। समस्त अदालतों में फरासी भाषाका ही प्रचार हुआ। उक्त युद्धों में लिप्त थे, इस कारण फगसी-बल बहुत कुछ खाधीनता-प्रयासी अमेरिकन जब इङ्गलैण्डकी अधीनता- नए हो गया था। १५१५ ई०को १म फ्रान्सिसने मरीग. को उच्छेद करने अग्रसर हुए, तब फरासीराज १६वें नानोके युद्ध में सुईम जातिको परास्त किया । किन्तु घे लुईने उनकी सहायतामें सेना भेजी थी। इस समय १५२५६०में सम्राट ५म चार्ल्स असंख्य सेनाके सामने १७८६ ई० फरासी अन्तर्विप्लव (The French Revo. ठहर न सके और पाभियाके युद्ध में पराजित तथा वन्दी lut on ) उपस्थित हुआ। प्रजायन्दके साथ राजकीय हुए। श्य हेनरीके शासनकालमें १५६२-१५८६ ई०को दलके घोर संघर्षसे फरासी राज्य छार खार हो गया। युगेनट और कैलिकोंका धर्मयुद्ध छिड़ा। इस युद्धमें राजहत्या, नरहत्या आदि वीभत्स व्यापार अंधाधुंध फरासी राज्य ध्वंस और राजकोष बिलकुल खाली , चलने लगे। यहां तक, कि असंख्य फरासी-रमणियां भी हो गया। १५८६ ई० में ३य हेनरीकी मृत्युके साथ माथ अस्त्र शस्त्रसे परिवत हो राज रानीकी हत्या करनेकी भलोई-वंशका लोप हुआ। इसके बाद बोळ वंशीय ४थे कामनासे भार्सायल नगरमें उतर पड़ी और राजप्रासाद पर हेनरी सिंहासन पर बैठे। उन्हींके यत्मसे फ्रान्स और चढ़ाई कर दी। वहांके रक्षिवल उन रमणियोंके हाथसे नाभारे राज्य एक साथ मिलाया गया। उन्होंने बड़े' यमपुर भेजे गये। राज-रानीको पूर्वाह्नमें इसको खबर उद्यमसे गृहविवाद (Chil wars) दूर कर राज्यके एक लगते ही प्राण ले कर भाग चले । यदि वे नहीं भागते, तो महत् अभावको पूरा किया। इस आत्मविवादसे राज्यको कभी भी उन ललनाओंके हाथसे निस्तार नहीं पा सकते महती क्षति हुई थी, उसका संशोधन करने के लिये उन्हों- थे। धीरे धीरे इस राष्ट्रविप्लवने भीषणसे भीषणतर मूर्ति ने विशेष कष्ट स्वीकार किया था। इस दारुण विप्लव धारण कर ली। १६ । लुई तथा कितने राजपुत्र और राज और संघर्ष के बाद फरामोसी राज्यमें तमाम पूर्ण शान्ति पुरुष यमपुर भेजे गये थे, उसकी शुमार नहीं। इसी समय विराजने लगी। १३वे लुईके अधिकारमें (१६१०-१६४३ ई०) जर्मन और प्रसियाराजको मिलित सेनाने फ्रान्स पर कार्डिनेल रिचेल अपशिष्ट सामन्तकोंकी क्षमता खर्व करके आक्रमण कर दिया, किन्तु रणोन्मत्त फरासी सैनिकोंके फ्रान्ममें पूर्ण राजतन्त्र ( Absolute monarchy ) सामने वे अधिक देर तक ठहर न सके । अनन्तर पूर्वतन स्थापन कर गये । ३० वर्षके युद्ध (The Thirty curs, राजतन्त्र और राजवंशका उच्छेद करके फरासी राज्य में war ) वाद १६४८ ईमें वेष्ट फालियर और पीछे १६५६ १७९२-१८०४ ई० तक प्रजातन्त्र स्थापित हुआ। इसी ईमें पिरिनिजकी सन्धिके बाद फ्रान्सने यूरोप महादेश- समय महावीर नेपोलियनका अभ्युदय देखा गया। इस में ऊंचा स्थान पाया। उस समय उसका मुकाबला , बालक वीरकी वीरता देख कर प्रजाको पहलेसे ही उनके करनेकी एक भी शक्ति नजर नहीं आती थी। उसी साल प्रति आस्था हो गई थी। राजा और राजपरिवारवर्गका निमेंगे और रायसोयिकमें जो सन्धि हुई उसमें फ्रान्सकी चेष्टाले प्रजाका सस्व नष्ट होते देख उन्होंने सबके सामने कोई विशेष स्वार्थहानी न हुई । किन्तु स्पेन देशके राज्या. दो एक ओजखिनी वक्तृता दी। इस राजद्रोहिताका रोहणसंक्रान्त युद्ध (IVars of the Spanish Successi फल उन्हें हाथों हाथ मिल गया था, पर प्रजातन्त्र के बाद On)के बाद इच्छा नहीं रहते हुए भी फरासीराजको १७१३ वे फरासी-सम्राट हो कर इस अपमानका बदला चुकाम- में युने कके मन्धि-पद पर हस्ताक्षर करना डा था। में बाज नहीं आयेथे १८०४ ई में फरासी सम्राट हो कर ___ १५ वे लुईके शासनकालमें ( १७१५ १७७४ ई०में ) नेपोलियन बोरदप और अमितविक्रमसे सस, जर्मनी मावि कसिका और लोरेन प्रदेश फ्रान्सके अधिकारमुक्त हुआ। राज्य जीत कर एक विस्तृत फरासी-साम्राज्य संस्थापन किन्तु अट्रीया युद्ध में पराजित हो जानेसे फरासी अधिकृत करने में समर्थ हुए थे। १८०५ ६०का अवालिटा भीषण