पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१३३

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मान्स १२७ युद्ध उनके जीवनकी अद्भुत कीर्ति है। युद्धविग्रहमें १८५२६०में प्रजातन्त्रका विलय होनेसे फरासी साम्राज्य लिप्त रह कर नेपोलियनने राजकोष खाली कर दिया था। वोनापार्टी वंशके अधिकारमें आया। ३य नेपोलियन इस कारण सेना-मण्डली और मन्त्रि सभा क्रमशः उनके फरासीसिंहासन पर अधिरूढ़ हुए। १८७० ई०में होहेन- ऊपर बोतश्रद्ध हो रही थी। मन्त्रिदलके अनुरोधसे जोलारण राजपुत्र ल्युपोल्डेके मस्तक पर जब स्पेनराज- उन्होंने १८१४ ई०की १४वीं भप्रिलको सिंहासनका परि- मुकुट पहनाया गया, तब प्रसिया और फ्रान्सके मध्य त्याग कर पलवा द्वीपमें आश्रय लिया। इसी समय विवाद खड़ा हुआ। उसी सालकी १६वीं जुलाईको बोर्बोवंशीय १८वें लुईमें मन्त्रिसभाके अनुरोध सम्राट् नेपोलियनने युद्ध घोषणा कर दी । इस अविमृष्य- से राजसिंहासन पर बैठे। किन्तु इस समय भी नेपो. कारिताके दोषसे फ्रान्सका अदृष्टाकाश क्रमशः मेघाच्छन्न लियनके हृदयसे फ्रान्सकी आशा दूर नहीं हुई थो। हो गया। समग्र जमन शक्तिके समरमें एक एक करके एक वर्ष के भीतर ही वे पुनः फ्रान्स पर चढ़ आये । राज- फरासोसेनादल क्षय होने लगा। सेदान-युद्ध में नेपो- धानोकी ओर बढ़ते देख उग्रीव सेनादलने उनका साथ लियन स्वयं वन्दो हुए और विख्यात सेनापति मार्शल दिया। सेना ले कर उन्होंने प्रसियाराजके साथ लड़ाई। बजैनेने प्रायः १ लाख ७३ हजार फरासी-सेना ले कर ठान दी। लिग्नीके युद्धमें प्रसियाराज १६ वीं जूनको मेटजे नगरमें जर्मनके हाथ आत्मसमर्पण किया। परास्त हुए। किन्तु वेलिङ्गटनप्रमुख विपक्ष सेनाने मार्सल मैकमहोन जनरल चिन्सी आदि वीरों के प्राण- उन पर १६वीं जूनको वाटरलक्षेत्रमें चढ़ाई कर दी। शत्रु- पणसे युद्ध करने पर भी जयोइन जर्मनसेनाने पारी वाहिनीके सामने वे ठहर न सके और राजधानीकी ओर नगरमें घेरा डाला। साम्राज्ञी युजिन इस समय राज्यकी लौट जानेको बाध्य हुए। मन्त्रियोंके अनुरोधसे उन्होंने सर्वमयी कर्ता थीं, जर्मनसेनाके आगमन पर वे भाग पुनः अपने पुत्र के लिये राज्यका परित्याग किया। इस गई। १८७१ ई०में फरासी गवर्मेण्ट और जर्मन सम्राटके बार भी निकृष्ट फरासी मन्त्रिसभा उनके साथ शठता बोच सन्धि स्थापित हुई । उस सन्धिके अनुसार फरासी- करनेसे बाज नहीं आई। उनके पुत्रको राजसिंहासन न गण जर्मन सम्राटको एलसस और लोरेन प्रदेश तथा युद्ध मिल कर पुनः बोर्बोवंशको ही मिला। शवके हाथ व्ययके क्षतिपूरणस्वरूप २० करोड़ पौंड मुद्रा देनेको बाध्य मृत्यु वा अपमानित होनेके भयसे उन्होंने जीवनदान हुए। १८७१ ई में ही फ्रान्समें तीसरी बार प्रजातन्त्रका मांगा था, किन्तु नृशंस फरासी मन्त्रिदलने उनको बात सूत्रपात हुआ । जातोय समिति (National Assem ly)- पर कुछ भी कान न दिया। धोखा दे कर उन्होंने जगत्- ने जगद्विख्यात ऐतिहासिक थियर्म (Thicrs)-को तृतीय के अद्वितीय वीर नेपोलियन वीरको शव अगरेजके हाथ प्रजातन्त्रके प्रधान कर्मकर्ता ( ('hicl of the Executive समर्पण किया। अंगरेजराजने भी उन्हें सेण्टहेलेना द्वीपमें Power of Irench Republic ) निर्वाचित किया । इस ले जा कर कैद रखा। जो नेपोलियन फरासी जातिकी समय कोमउनों ( Commune ) का विद्रोहानल धधक उन्नतिके आदर्श थे, उनके प्रति ऐसा कठोर व्यवहार हो उठा। किन्तु थोड़े ही समयके अन्दर जातीय सैन्यदल- फरासी जातिके अधःपतनका कारण हुआ। ने बड़ी बहादुरीसे उस शान्त कर दिया। १८७१ ई०के नेपोलियन देखो। अगस्त मासमें थियर्स प्रजातन्त्रके प्रसिडेण्ट वा सभा- १८वे लुईको मृत्युके बाद १८२४ ई०में १०म चाल्स पति बनाये गये। १८७३ ई०में ३य नेपोलियनको मृत्यु राजा हुए । १८३०ई० तक राज्य करनेके बाद उसी वंशको हुई। इसी साल थियर्सने पदत्याग किया। पीछे अन्यतम शाखाके वशधर लुई फिलिपे फरासी जातिके मार्शल मैक महोन ( Murshal Macmhon ) प्रेसिडेएट सिंहासन पर बैठे । १८४८ ई०को २४वीं फरवरीको फरासी- हुए। उनके बाद जुले प्रेरिने सभापतिका पद सुशो- राज्यमें फिरसे राष्ट्रविप्लव खड़ा हुआ तथा इसके साथ भित किया। इनके समयमें जिन्होंने प्रधान मन्त्रीका साथ राजतन्त्रका अवसान और प्रजातन्त्रको स्थापना हुई। कार्य किया था उनमेंसे गैम्बेठा ( Gambetta) एक थे।