पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१३६

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द बंकट-बंजर .. भेजती है तथा इसी प्रकारके महाजनीके कार्य बंगली (हि० स्त्री० ) १ चड़ियों के साथ पहननेका स्त्रियों का एक आभूषण । (पु.)२ घोड़ा। . ..पु. ) वक्र, टेढ़ी। बगमार (हिं० पु०) पुलकी तरह बना हुआ वह चबूतरा जो .. स्त्री० ) सुनारों की एक नली। यह अति समुद्रमें दूर तक चला जाता है और जिस परसे लोग , माड़ों को संयोजित करनेके समय चिरागको जहाज पर चढ़ते वा उससे उतरते हैं, बनसार । काम आती है। वगा ( हि० वि० ) १ वक्र, टेढ़ा। २ मूर्ख, बेवकूफ । ३ र पु० एक प्रकारका साँप । उदण्ड, लडाई झगड़ा करनेवाला। - , ( हिं० पु. ) अगहनमें होनेवाला एक प्रकारका बगारी ( हि० पु. ) हरताल । । इसका चावल मैकड़ों वर्ष तक रह सकता है। बंगाल ( हिं० पु० ) १ वङ्गदेश देखो। २ एक रागका ल रिपु० ) जहाज का वड़ा कमरा। इसमें नाम जिसे कुछ लोग मेघरागका और कुछ भैरवरागका ___ों पर चट नेवाली रस्सियां या जंजीरे आदि पुत्र मानते हैं। .. .... के रख जाती हैं। बगालिका ( हिं० पु.) एक रागिनी जिसे कुछ लोग हो, तिरछा। र पराक्रमी, बल. मेघरागकी स्त्री मानते हैं। __। । ४ धानके पौधों में हानि बंगाली ( हिं० पु०) बगाल देशका निवासी । २ .... .ारका कोड़ा जो हरे रंगका ! सम्पूर्ण जातिका एक राग। (स्त्री०) ३ बङ्गन्देशको भाषा, बंगला। ... टेढ़ापन, तिरछापन । . बंगुरी ( हिं० स्त्री० ) वगली देखो। त्रा० . बार देखा। बंगू (हिं० पु० १ दक्षिण तथा वंगालकी नदियोंमें मिलने- ... ।वक देखा । वालो एक प्रकारकी मछली। २ भौंरा वा जंगी नामक ! खिलौना जिसे बालक नचाते हैं। ... ... निघालो एक प्रकारको बगोमा ( हि पु०) गंगा और सिन्धुमें मिलनेवाला एक । प्रकारका कछुआ। इसका मांस खाने योग्य होता है । .. ..........दशा मुसलमानो रियासत । बचक ( हिं० पु०) १ धूर्त, पाखंडी। २ पहाड़ी देशोंमें ब'. .) १ बङ्गालदेशका, बंगाल सम्बन्धी पैदा होनेवाला एक प्रकारको घासका दाना। यह जीरेके रूप रंग तथा आकार प्रकारका होता है। । पु. ) २ एक खनका कच्चा मकान । इस पर फस. बचन ( हिं० पु०) छल, ठगपना। वचन देखो। हा बाड़ों का छप्पर पड़ा रहता है। ३ छोटा हवादार' बचनता ( हि स्त्री० ) ठगी, छल। बच्चनता देखो। सामरा जो प्रायः मकानों की सबसे ऊपरवाली छत पर बचर ( हिं० पु० ) वनचर देखो। बनाया जाता है। ४ वंगालदेशका पान । ५ वह छोटा बचवाना ( हिं० क्रि०) दूसरेको पढ़नेमे प्रवृत्त करना, हवादार और चारों ओरसे खुला हुआ एक खनका पढ़वाना। मान जिसके चारों ओर बरामदे हों। पहले इस प्रकार- बचित (हिं० पु० ) वञ्चित देखो। के पकान बंगालम अधिकतासे होते थे। उन्हींकी बज ( हिं० पु०) १ पनिज देखो। २ हिमालयप्रदेश इग्या देखो अङ्गारेज भी अपने रहने के मकान बनाने और होनेवाला एक प्रकारका बलूतका पेड़। इसकी लकड़ी- उबंगला कहने लगे थे। का रंग खाकी होता है। इसका दूसरा नाम सिल और ०१६ बंगाल देशकी भाषा । मारू भी है। १० पु. १ एक प्रकारका धान। २एक जर हि० पु०) वह भूमि जिसमें कुछ उत्पन्न न हो सके, ऊसर।