पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१३७

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बंजारा-बंदर १३१ बजारा (हिं० पु० ) वनारा देखो। बंद (फा० पु.) १ कोई वस्तु बांधनेका पदार्थ। २ बंजुल । हिं० पु० ) वजुल देखो। पानी रोकनेका धुस्स, पुश्त, मेड़। ३ शरीरके गोहा बझा (हिं० वि०) १ जिसके संतान न हो, वाँझ । (स्त्री०) कोई जोड़। ४ बन्धन, कैद । ५ पांच या छः चरण । २ वह स्त्री जिसमें सन्तान उत्पन्न करनेकी ताकत उर्दू कविताका टुकड़ा या पद । ६ अंगरखे, चोली आदि न हो। के पल्ले बांधनेका पतला सिला हुआ कपड़े का फni बटना (हिं० क्रि०) १ विभाग होना, अलग अलग हिस्सा, ७ कागजका लम्या और बहुत कम चौड़ाग। होना। २ कई प्राणियोंके बीच सबको प्रदान किया ! (वि०) ८ जो चारों ओरले घिरा हो, . . . जाना। (पु.) २ षटना देखो। ओरसे खुला न हो। जिला : या आगे:: ... . बटवाई (हिं स्त्री० ) १ बांटनेकी मजदूरी। २ पिस- खुला न हो। १० जिसके मुह अपघा मा . वानेका मेहनताना। वाजा, ढकन या ताटा आदि लगा . . बँटवाना (हि क्रि०) १ वितरण कराना, सबको अलग प्रकार घिरा हो, कि उनके अंदर कई जान अलग करके दिलवाना । २ पिसवाना । । जो खुला न हो । १३ जो ऐसी स्थिति है ... बटा ( हिं० पु०) १ गोल या चौकोर कुछ छोटा डब्वा। वस्तु अंदरसे बाहर न जा सके और नाम: (वि० )२ छोटे आकारवाला, छोटे कदका। अंदर हो आ सके। १४ जो किसी तरह की कैमें बटाई (हिं० स्त्री० ) १ वितरण करना, बाँटनेका काम। १५ जिसका प्रचार, प्रकाशन या कार्य आदि रुक गमा २ बाँटनेकी मजदूरी। ३ बाँटनेका भाव। ४ दुसरेको हो, जो जारी न हो। १६ जिस 1 2 भ्यागत या । खेत देनेका एक प्रकार । इसमें खेत जोतनेवालेसे मालिक हुआ हो . १७ जो गति या व्यापारयुक्त. न , * . को लगानके रूपमें धन नहीं मिलता बल्कि उपजका कुछ हुआ। अंश मिलता है। बदगी (फा० स्त्री० ) १ भक्तिपूर्वक ईश्वरया बना ।। बंटाना (हिं० कि० ) १ अंश ले लेना, भाग करा लेना। ईश्वराराधन। २ सेवा, खिदमत। ३ प्रणाम, २६. .. २ किसी काममें हिस्सेदार होनेके लिये या दसरेका वोझ आदाब । हलका करनेके लिये शामिल करना। बंदगोभी ( हि स्त्रो० १ करमकल्ला, पातगोभी। बंटी। हि स्त्री०) हिरन आदि पशुओंको फंसानेका, रोचन, रोली। ३ इङ्गा, सिन्दुर । जाल या फंदा। बंदन ( हि पु०) बदन देखो। बैटैया ( हि पुः ) हिस्सा लेनेवाला. बटानेवाला। बंदनता ( हि स्त्री० ) आदर या बन्दना किया । बंडल ( ० पु०) कागज या कपड़े आदिमें बंधी हुई योग्यता। छोटी गठरी, पुलिंदा। वंदनवार (हि पु० ) वन्दनमाला, फूल, पत्न. व याद बंडा (हि.पु०)१एक प्रकारका कच्चू । यह गोल की बनी हुई वह माला जो मंगल कार्यों के समय गांठदार और लंबी होती है। २ अनाज रखनेका छोटी आदि पर लटकाई जाती है। दीवारसे घिरा हुआ स्थान, बड़ी बखारी। बंदना ( हि खी० ) वन्दना देखो। बंडी (हि स्त्री०) १ बिना अस्तीनकी मिरजई, फतुही। बंदनी (हि. स्त्री०) स्त्रियोंका एक भूषण । इसे वे आगेको २ बगलबंदी नामक पहननेका वस्त्र। ओर सिर पर पहनती हैं। बंडेरा (हि.पु. ) बडेरी देखो। वंदनीमाला (हि. स्त्री०) यह लबी माला जो गलेसे पैरों डेरी (हिं० स्त्री० ) वह लकड़ी जो खपरैलकी छाजनमें तक लटकती हो। मंगरे पर लगती है। यह दो पलिया छाजनमें बीचो-बदर (हिं० पु०) एक प्रसिद्ध स्तनपायी चौपाया। विशेष बीब लम्बाईमें लगाई जाती है। विवरण वानर शब्दमें देखो।