पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१४४

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पकवाना-बकची भीमसेन । पकवाना ( हिं० क्रि० ) बकनेके लिये प्रेरणा करना, किसी दीमक घुन आदि नहीं लगते। इसका गुण कफ, पित्त से बकवाद कराना। और कृमिनाशक तथा वमन आदिको दूर करनेवाला पकवास ( हिं० स्त्री. ) १ व्यर्थकी बातचीत, बकवाद । २ और ग्न.शोधक माना गया है। पत्ते औषधके काम में बकवाद मन्त्रानेका स्वभाव, बकबक करनेको लन।३ आते हैं। बीजों का तेल मलहममें पड़ता है। इसका बकवाद करनेकी इच्छा । संस्कृत पर्याय महानिम्व, द्रेका, कामुक कैटर्य, केश बकवृत्ति (सं० पु० ) बकस्व स्वार्थमाधिका वृत्तिर्यस्य। मुष्टिक, पवनेट, रम्यकक्षीर, काकेड़, पार्वत और महा- बकतुल्य वर्तनविशिष्ट कपटाचारी, वह पुरुष जो नीचे तिक्त है। ताकनेवाला, शठ और स्वार्थसाधनेमें तत्पर तथा कपट- बकाया । अ० पु० ) १ शेष, बाकी। २ बचत । युक्त हो। वकाया तैरभुक्तके अन्तर्गत एक नदी। (७० ग्व० ४७ । बकवैरिन् (सं० पु०) बकस्य वैरी धानक त्वात्। १ भीम- १५)। सेन । २ श्रीकृष्ण । बकारि (स० पु०) बकस्य अगिः ६ तत्। १ श्रीकृष्ण । २ बकवती ( सं० पु०) बकवतमस्यास्तीति इनि। मिथ्या- बकारी ( हि स्त्री० ) वह शब्द जो मुंहसे प्रस्फुटित हो, विनीत, कपटी। महसे निकलनेवाला शब्द। षकस (अॅ० पु०) १ कपड़े आदि रखने के लिये बना हुआ बकावली ( हि स्त्री० ) पुलव ५. 5 ली देखो। चौकोर सन्दुक । २ घड़ी गहने आदि रखने के लिये छोटा . '. बकासुर ( म० पु० ) एक दैत्यका नाम जिसे श्रीकृष्णने डिम्बा, खाना। माग था। बकसा ( हि० पु०) पानीमें या जलशयोंके किनारे होने- बकी (हि. स्त्री० ) बकासुरको बहम पूतनाका एक नाम । वाली एक प्रकारको घास । मधेशी इसे बड़े चावसे यह अपने स्तनमें विष लगा कर कृष्णको मारनेके लिये खाते हैं। गई थी। श्रीकृष्णने उसका दूध पीते समय ही उसे मार बकसी ( हिं० पु० ) पख शी देखो। डाला था। बकसोला ( हिं० वि० ) जिसके खानेमें मुहका म्यांम बकुचा ( हि पु० ) छोटी गठरी, बकचा । बिगड़ जाय और जीभ ऐंठने लगे। वकुचाना ( हि क्रि० ) किसी वस्तुको बकुचेमें बांध कर घकमीस (फास्त्री०)दान।२पारितोषिक, इनाम।: कंधे पर लटकाना या पीछे पीठ पर बाँधमा। बकसुआ ( हि० पु०) बकलस देखो। वकुची ( हि स्त्री० ) हाथ सवा हाथ ऊँचा एक प्रकार- वफाउर ( हिं० स्त्री० ) बकावली देखो। · का पौधा। इसके पत्ते एक उंगली चौड़ी होती हैं और बकाटी (सं० स्त्री०) बकचिञ्चिका मत्स्य। डालियां पृथ्वीसे अधिक ऊँची नहीं होती और इधर बकाना ( हिं० कि० ) १ बकबक करने पर उद्यत करना, उधर दूर तक फैलती हैं। इसमें गुलाबी रंगके फूल बकवक कराना। २ कहलाना, रटाना । लगते हैं। फूलोंके झड़ने पर छोटी छोटी फलियां घौद- बकायन (हिं० पु०) समस्त भारतवर्ष में मिलनेवाला नीम-' में लगती हैं जिनमें दो से चार तक गोल मोल चौड़े की जातिका रफ पेषु । इसके पत्ते नीमके पत्तोंके जैसे और कुछ लम्बाई लिये दाने निकलते हैं। दानोंका पर उनसे कुछ बड़े होते हैं। इसका पेड़ भी नीम के पेड़से , छिलका काले रंगका, मोटा और ऊपरसे खुरखुरा होता बड़ा होता है। फल नीमकी तरह पर नीलापन लिए होता है। छिलकेके भीतर सफेद रंगकी दो दालें होती हैं जो है। इसकी लकड़ी हलकी और सफेद रंगकी होती है। बहुत कड़ी होती और बड़ी कठिनाईसे टूटती हैं। बीजसे इससे घरके संगहे और मेज कुरसी आदि बनाई जाती हैं : एक प्रकारकी सुगंध आती है। यह ओषधके काम माता और इस पर वारनिश तथा रंग अच्छा खिलता है। है। इसका गुण ठंढा, रुचिकर, सारक, त्रिदोषघ्न और लकड़ी नीमकी तरह कडुई होती है, इस कारण उसमें रसायन माना गया है । २ छोटी गठरी।