पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१४८

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पखरोखरा बखरी (हि.स्त्री०) एक कुटुम्बके रहने योग्य बना हुआ Dी . ते योग्य बना रया आसाम और बर्मा आदिमें होता इसका दसरा नाम मिट्टो, ईटों आदिका अच्छा मकान । कुती भी है। बखरैत (हिं० पु० ) हिस्सेदार, साझीदार। बखोरना (हिं क्रि० ) टोकना, छोड़ना। बनसीस ( हिं० स्त्रो० ) बासीस देखो। बख्त (फा० पु० ) भाग्य, तकदीर । बखान (हिं० पु.) १ वर्णन, कथन । २ प्रशंसा, गुण- बख्तर (फा० पु. ) सभाह, बकतर कीर्तन, बड़ाई। बख तारी-अरबदेशीय एक प्रसिद्ध कवि । खलीफा अली बखानना (हिं० कि० ) १ वर्णन करना, कहना। २ बुरा मुस्ताइन बिल्लहकी राजसभामें ये विद्यमान थे। कोई भला कहना, गाली गलौज देना । ३ प्रशंसा करना। कोई इन्हें बिन बख्तरी नामसे उल्लेण कर गये हैं । बोग- बखार (हिं० पु०) दीवार या टट्टी आदिसे घेर कर बनाया दाद नगरमें ६३ वर्षकी उममें इनकी मृत्यु हुई। कोई हुआ वह गोल और विस्तृत घेरा जिसमें अनाज रखा कोई कहते हैं, कि २०८ हिजरीमें इनका जन्म हुआ और जाता है। कोई इसी समय इनको मृत्यु बतलाते हैं। बखारी (हि.स्त्री. छोटा बखार। बग्वतावरखां -समार मालमगोरके अधीनस्थ एक अमीर। बखिया ( फा. पु० ) एक प्रकारकी महीन और मजबूत पे नाजिर वतियार खां नामसे प्रसिद्ध थे। दिल्लीके सिलाई। इसमें सूईको पहले कपड़े मेंसे टाँका लगा कर निकटवस्ती बख्तावर नगरमें जो सराय है उसे इन्होंने आगेको ओर टोक मारते हैं जिससे सूई पहले स्थानसे १६७१ ई०में बनवाई थो। उक्त समासे इन्होंने १० वर्ष आगे बढ़ कर निकलती है। इसी प्रकार बार वार सीते राजत्व ले कर मिरत-इ-आलम नामक एक इतिहासकी हैं। बखिया दो प्रकारका होता है. उस्तादाना या गाँठो रचना की। आगरा-नगरके सन्निकटस्थ फरिदाबादमें और दौड़ या बया। गाँठीमें ऊपरकी लौर सिलाईके इन्होंने अपना शेष जीवन विद्यालोचनामें बिताया। टांके एक दूसरेसे मिले हुए दानेदार होते हैं और वयामें १६८४ ई में इनकी मृत्यु हुई। दो चार दानेदार उस्तादी वखियाके बाद कुछ थोड़ा अव- बखतियार खिलजी - एक मुसलमान सेनापति । इसने बङ्ग काश रहता है। श्वर लक्ष्मणसेनको पराजय कर वनराज्य पर अधिकार बखियाना (हि० क्रि०) किसी चीज पर बखियाको सिलाई किया था, इसीसे उसका नाम जनसाधारणमें प्रसिद्ध है। करना, बखिया करना। किन्तु यह विश्वास भ्रमात्मक प्रतीत होता है। जिस बखोर (हिं॰ स्त्री० ) एक प्रकारकी खीर। इसमें दूधकी व्यक्तिने बङ्गाल पर चढ़ाई की थी, उसका नाम महम्मद- जगह गुड़, चीनी या ईसका रस डाला जाता है। इ-बतियार था । वे बखतियार खिलजीके पुत्र थे। बखोल (अ०वि० ) कृपण, कंजूस। विशेष विवरण बङ्ग ओर महम्मद-र-बख तियार शब्दमें देखो। बखूबी (फा० कि० वि० ) १ सम्यक् प्रकारसे, भलीभांति । बख्तियारपुर--पटना जिलेके बाढ़ उपविभागका एक प्राम। २ पूर्णतया, पूर्णरूपसे। यह अक्षा० २५ २७ उ• तथा देशा० ८५३२० पू०के बखेड़ा (हि.पु.) १ उलझाय, झझट । २ व्यर्थ विस्तार, मध्य अवस्थित है। यहां इष्ट इण्डिया रेलवेका एक डम्बर। ३ कठिनता, मुश्किल । ४ विवाद, झगड़ा। स्टेशन है। यह कलकत्तेसे ३१०मील और पटनासे २२ बखेड़िया ( हिं० वि० ) झगड़ालू, बखेड़ा करनेवाला। मील दूर पड़ता है। जरासन्धकी राजधानी राजगृह जाने- बखेरना ( हिं० कि० ) चीजोंको इधर उधर या दूर दूर में इसी बतियारपुरसे जाना पड़ता है। रखना, फैलाना। बख रा--बिहारराज्यका एक प्राचीन ग्राम। यह बेसाड़ बखेरी ( हि स्त्री०) एक प्रकारका केटीला वृक्ष। यह प्रामसे१कोस उत्तर पश्चिममें अवस्थित है। यह स्थान छोटे कदका होता है। इसके फल रंगने और चमड़ा प्राचीन वैसाली राज्यके अन्तर्गत था। यहां जिस सिंह- सिझाने के काममें आते हैं। यह वृक्ष पूर्वोय बङ्गाल, : स्तम्भका ध्वंसावशेष दिखाई देता है वह अशोक-प्रतिष्ठित