पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१४९

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बरूशना-बगलगंध १४३ माना जाता है। चीनपरिव्राजक यूएनववंग उस स्तम्भ- बगदाद -तुरस्कको राजधानी बोगदाद नगर । को देख गये हैं। उसके निकटवत्ती मर्कटहद और तुक देखो। कुटागार आदि भग्नावशेषका निदर्शन आज भी देण्यनेमें बगदाना (हि' क्रि० । बिगाड़ना, खराब करना। २ आता है। उक्त सिंहस्तम्भके पास ही एक वृहत् बुद्ध च्युत करना, ठीक गस्तेसे हटाना। २ भुलाना, भट- मूर्ति थी । स्थानीय जमींदारने १८५४ ईमें ध्वसराशि : काना । खोदते समय उसे पाया था। पीछे उन्होंने निक्टवत्ती। बगदारु ( स० क्ली० ) देशभेद । बौद्धस्तूपके ऊपर मन्दिर बनवा कर उक्त मतिको प्रतिष्ठा बगदाह ( स० क्ली०) स्थानभेद । की और उसकी वे रामचन्द्ररूपमें पूजा करने लगे। बगनी (हि स्त्री० ) पफ प्रकारको धाम। पगई देखो। अलावा इसके एक और भी भग्नस्तृप है जिसे लोग वगमेल ( हिं० पु.) १ बगबर बगबर चलना, पाँति बांध राजा विशालका-मूर्छा ( दुर्ग ) वा भीमसेनका पलिया कर चलना। २ समानता, तुलना।

बगर ( हि पु० ) १ प्रासाद, महल । २ बड़ा मकान, घर ।

बख्शना ( फा० कि० ) १ प्रदान करना, देना। २ त्यागना, । २ द्वारके सामनेका सहन, आंगन । ३ वह स्थान जहां छोड़ना। ३ क्षमा करना, माफ करना। गाएं बांधी जाती हैं, बाजार। ४ घर, कोठरी। ५ बख्शवाना हिं० कि०) बख्शनेका प्रेरणार्थक रूप, किमीको बड़ा मकान, घर। । स्त्री०) ६ बगल देखो। बख्शनेमें प्रवृत्त करना। वगग ( हि पु० ) संयुक्तप्रान्त और बङ्गालमें मिलने- बरिणश (फा० स्त्री०) १ उदारता, दानशीलता । २ दान । वाली एक प्रकारकी मछली। यह छः मान अंगुल लंबी ३ क्षमा। होती है और जमीन पर उछलती या उड़ान भरतो है । यह बख्शीश (फा० स्त्री० ) बस्शिश देखो। खानेमें स्वादिष्ट होती है। बग (हिं पु० ) बगला। बगराना ( हि क्रि० ) , छितराना, फैलाना । २ फैलना, बिखरना। बगई (हि स्रो०) १ एक प्रकारको घास। इसकी पत्तियां बगरिया (हि स्त्री० ) कच्छ और काठियावाड़में उत्पन्न बहुत पतली और लम्बी होती है। पंसारी इसे सूखने होनेवाली एक प्रकारकी कपास । पर पुड़ियाँ आदि बाँधनेके काममें लाते हैं। कहीं कहीं बगरी ( हिं० पु० ) १ भादोंके अन्तमें होनेवाला एक प्रकार लोग इसे भांगके साथ पीस कर पोते भी हैं। इसके का धान। इसका रंग काला और चावल लाल तथा मेलसे भांगका नशा बहुत बढ़ जाता है। २ एक प्रकारको मोटा होता है। इसे प्रस्तुत करनेमें विशेष परिश्रम मक्खी जो कुत्तों पर बहुत बैठती हैं, कुकुरमाछो।।

नहीं करना पड़ता, केवल बीज विखेर कर छोड़ दिये

बगछुट (हिं० क्रि० वि०) सरपट, बेतहाशा । इस शब्दका जाते हैं । (स्त्री० ) २ मकान, घर। प्रयोग बहुधा घोड़ोंकी चालके संविधमें ही होता है। बगल (फा० स्त्री० ) १ बाहु मूलके नीचेको ओरका परन्तु कभी भी हास्य या व्यंग्यमें लोग मनुष्योंके संबंध- गमुढा, कांख । २ समीपका स्थान, पासकी जगह । २ में भी बोल देते हैं। कपड़े का यह टुकड़ा जो अंगरखे या कुरते आदिकी बगटुट (हिं कि० वि० ) बगछुट देखो। अस्तीनमें कंधेके जोड़के नीचे लगाया जाता है। ४ बागदना ( हिं० कि० : १ बिगड़ना, खराब होना। २ बह-: पाव, छातोके दोनों किनारका भाग जो बांह गिराने पर कना, भूलमा । २ च्युत होना, ठोक रास्तेसे हट जाना।। उसके नीचे पड़ता है । ५ सामने और पीछेको छोड़ इधर बगदर (हिं.पु.) मच्छर । . उधरका भाम, किनारेका हिस्सा। बगदवाना (हिं० कि० ) १ खराब कराना, बिगड़वाना । २ बगलगंध (हिं० पु.) १ वह फोड़ा जो बगल में होता है, भ्रममें डालना, भुलवाना । ३ प्रतिज्ञा भंग कराना, अपने ; कनवार । २ एक प्रकारका रोग। इसमें बगलसे बहुत पचनसे हटाना। ४ गिरा देना, लुढ़काना। दुर्गन्ध पसीना निकलता है। .