पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१५१

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बगुड़ा-बण्डो पीछे १८५६ ई०में यहां एक स्वतन्त्र मजिष्ट्रट कलकर तथा देशा० ८६२३ के मध्य करतोया नदीके पश्चिम नियुक्त हुए। । कुल पर अवस्थित है । जनसंख्या ७ हजार है। शहर में इस जिलेके अन्तर्गत महास्थानगढ़ और शेरपुर १८७६ ई०को म्युनिसपलिटी स्थापित हुई है। कालीनला नगर ऐतिहासिक तस्वसे पूर्ण है। महास्थानगढ़ अभी और मालथी नगरकी हाट यहांका प्रधान स्थान है। स्तूप मानमें परिणत हो गया है जिसके एक पावसे । बगुलपतोख ( हिं० पु. ) जलमें रहनेवाली एक प्रकारकी करतोया नदी बहती है । एक समय यहां हिन्दू-राजाओं- । चिड़िया जो मुरगावीसे छोटी होती है । इसका रंग सफेद ने राज्य किया था। आज भी वहांके लोगों के मुख होता है और इसके पैर तथा चोंच काली होती है। से उन हिन्दूराजवंशको बहुत-सी बातें सुनी जाती हैं। बगुला ( हि पु७ ) बगला देखो। १६वीं शताब्दीमें शेरपुर नगर विशेष समृद्धशाली था। बगुला--नदिया जिलान्तर्गत एक गण्ड ग्राम । यहां इ, वी, मुगल-इतिवृत्तमें तथा १६६२ ई०के ओलन्दाज शासन- एस रेलवेका एक स्टेशन होनेके कारण गोआड़ी कृष्ण कर्ता व क ( Von len Broucke )-के मानचित्रमें यह नगर आदि स्थानों में जाने आने तथा वाणिज्यकी विशेष नगर बाणिज्य स्थान कह कर वर्णित हुआ है। ढाकामें सुबिधा हो गई है। इसके पास ही चूर्णी नामकी नदी मुसलमान-नवार्योको प्रतिष्ठा होनेके पहिले यह नगर बहती है। मुसलमान-अधिकारस्थ सीमान्तदेशमें अवस्थित तथा बगूला ( हिं० पु० ) वह वायु जो गरमीके दिनोमें कभी भिन्न राज्यके साथ बाणिज्यके लिये बहुत कुछ विख्यात कभी एक स्थान पर भंवर सी घूमती हुई दिखाई देती था। नीलकी खेती पहलेको तरह नहीं होती, पर रेशम तथा है और जिससे गर्दका एक खंभा सा बन जाता है। वह वस्त्रादि बुननेका कार्य पहले सा चला आ रहा है । शेरपुर वायु-स्तम्भ आगेको बढ़ता जाता है। इसका व्यास और नन्दपाड़ामें इष्ट इण्डिया कम्पनीकी दो रेशमकी और ऊंचाई कभी कम और कभी अधिक होती है। कोठी थी १८३४ जो ई०में यहांसे उठा दी गई। कभी कभी बड़े ध्यासवाले बगूलेमें पड कर बड़े बड़े इस जिलेमें बगुडा और शेरपुर नामके २ शहर और पेड़ और मकान तक उखड़ कर उड़ जाते हैं। यह बगूला ३८६५ प्राम लगते हैं । जनसंख्या ६ लाखके करीब है। अब समुद्र या नदियों में होता है, तब उसे 'सूडी' कहते हैं इनमेंसे सैकडे पोछे १८ हिन्दू और शेष ८२ मुसलमान ! और इससे पानी नलकी भांति ऊपर खिंच जाता है, हैं। आबहवा कुल मिला कर अच्छी है, पर उक्त बवंडर । दोनों शहर करतोया नदीके किनारे अवस्थित होनेके बगेड़ी (हिं० स्त्री० ) बगेरी देखो। कारण मलेरियाका अकसर प्रकोप देखा जाता है। धान, बगेरी ( हिं० स्त्री० ) खाकी रंगकी एक छोटी चिड़िया जो पटसन, सरसों, चीनी, चमड़ा, तमाकू और. गाँजा यहां- : सारे भारतमें पाई जाती है। यह डील डौलमें गौरैयाके का उत्पन्न दृष्य है। यमुनातीरवत्ती हिल्ली, दमदमा, । समान होती और मैदानों में जलाशयोंके पास पाई जातो जमालगञ्ज, बालुभरा, नौगांव और दुबलहाटी, करतोया है। यह जमीनके साथ इस प्रकार चिमट आती है, कि तीरवत्ती गोविन्दगञ्ज, गुमाणीगंज, शिवगञ्ज, सुलतान- सहजमें दिखाई नहीं देती। यह झंडरों में रहती हैं। इसे गज और शेरपुर ये सब जिलेके प्रधान वाणिज्यस्थान : संस्कृतमें भरद्वाज कहते हैं। समझ जाते हैं। विद्याशिक्षाकी ओर यह जिला बहत बगैचा (हिं०पू०) बगीचा देखो। पीछा पड़ा हुआ है। पर पहलेसे लोगोंका इस ओर बगौधा (हिं० पु० ) बगेरी नामकी चिड़िया । कुछ विशेष ध्यान आकृष्ट हुआ है। अभी यहाँ कुल बग्गी (भ० स्त्री० ) चार पहियेको पाटनदार गाझी जिसे मिला कर ४६५ स्कूल हैं। स्कूलके अलावा जिलेमें , एक वा दो घोडे खींचते हैं। अस्पताल भी हैं। बगड़ी--१ बङ्गालके अन्तर्गत एक विभाग । बाग को देखो। २ उक्त जिलेका एक शहर । यह अक्षा० २४५१ उ० २ मेदिनीपुरके उत्तर भौर हुगली तथा बांकुड़ाके Vol. xv, 37