पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१५८

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१५२ बड़गाव-बड़नगर काञ्चोपुरकी अदालतसे इसका निबटेरा हुआ। इस और बुद्धमूर्ति प्रामवासी अपने अपने घर उठा ले गये हैं। सम्प्रदायके सभी वैष्णव विद्वान हैं। संस्कृत धर्म शास्त्र- यहांके बटुकभैरव नामक स्थानके चत्वरमें बुद्धदेवकी का अनुशीलन करना इन लोगोंका प्रधान काय है। सबसे बड़ी मूर्ति स्थापित है । सम्भवतः वही मूर्ति पहले बध गाँव पटना जिलेके बिहार उपविभागका एक ग्राम। वालादित्यविहार में प्रतिष्ठित हुई थी। अभी बड़गाँवके यह अक्षा० २५८ उ० तथा देशा० ८५ २६ पू०के मध्य मध्य अनेक वस्तु देखने लायक हैं, यथा: १ बटुक- अवस्थित है। जनसंख्या प्रायः ५६७ है। यहांका भैरवके चतुष्पार्श्वस्थ भास्करशिल्प, २ सुपृहत् ध्यानी तथा पाच वत्ती स्थानोंका भग्नस्तूप देखनेसे अनुमान बुद्धमूर्ति, मूत्तिके चारों बगल आर्यसारिपुत्र, आर्यमौद्ग- किया जाता है, कि एक समय यहां कोई विस्तृत राज्य । लायन, आर्य मैत्रेय नाथ और आर्य वसुमित्र आदि अनु. अवस्थित था। (१) चरवर्ग । उन अनुचरों के नाम प्रतिमूर्ति में ही अङ्कित हैं। फाहियानने लिखा है, कि नलोग्राम (नालन्दा गिरि वह मूर्ति बौद्धभिक्षु णी परमोपासिका गङ्गा द्वारा प्रदत्त एक पर्वत ( जिसका नाम उन्हें मालूम नहीं ) से १ हुई है । ३ बज्रबाराही मन्दिर, बडगांवके राजप्रासाद और योजन और नूतनराजगृहसे प्रायः उतनी ही दूर होगा। हिन्द-मन्दिरादिमें रक्षित बुद्धमूर्ति तथा गरुड़वाही नारा- यूएन-चुवंगके वर्णनसे हम लोगोंको मालूम होता है, कि यण, वागीश्वरी आदि इधर उधर प्रतिष्ठित देखी जाती हैं। वह राजगृहसे ५ मील उत्तर और बुद्धगयाके पवित्र वोधि- यहां बुद्धगयाके प्रसिद्ध मन्दिरकी नकल पर एक जैन द्र मसे ७ योजनकी दूरी पर अवस्थित था । (२) मन्दिर स्थापित है। वह मन्दिर ५वीं शताब्दीका बना चीनपरिव्राजक फाहियान आर यूपन चुवगक वणनका हुआ मालूम होता है। पीछे उस मन्दिरमें बौद्ध-मूर्ति- अनुसरण करनेसे वही स्थान प्राचीन बौद्धक्षेत्र नालन्दा के बदले १५०४ सम्बत्को जैनतीर्थङ्कर महावीरकी मूर्ति समझा जाता है। नालन्दा एक समय बौद्धधर्म और स्थापित हुई है। सूर्यकुण्डके किनारे बौद्धमत्तिके साथ शास्त्रालोचनाका प्रसिद्ध स्थान था । वहां अनेक बराह अवतार, विष्णु, शिव पार्वती और सूर्यमूर्ति आदि संघाराम विहार, स्तूप और बौद्ध देवदेवियोंकी मूर्ति दृष्टिगोचर होती हैं। अलावा इसके यहां बहुत सी बड़ी प्रतिष्ठित हुई थीं। नालन्दा देख । ब. पुष्करिणियां भी हैं। __व इ.प्राममें जो उच्च और दूरविस्तृत इटकस्तूप पड़े बड़गूजर - राजपूतानावासी क्षत्रिय जाति । ये लोग अपने हैं उन्हें कनि हम भी यूएन चुवंग वर्णित बौद्धसङ्घाराम को श्रीरामचन्द्र के पुत्र लवके वंशधर बतलाते हैं। मानते हैं। (३) उन सब स्तूपों से अनेक पत्थर मावाडी राजवश इसी शाखासे उत्पन्न हुए हैं। (१) डा. बुकाननको बिहारवासी किसी जैन पुरोहितसे माचाड़ी देखो। मालम हुभ', कि यहां राजा श्रेणिक और उनके वशवरीने बड.गुल्ला ( हिं० पु.) एक प्रकारका बगला। राज्य किया था। यहांके ब्राहमणों का कहना है, कि यह बड चोटी - १ पञ्चकूट राज्यके अन्तर्गत एक ग्राम । कृष्णपत्नी रुक्मिणी देवीकी जन्मभूमि कुपननगरीका ध्वसा- २ गया जिलेके अन्तग त एक प्रसिद्ध ग्राम और बशेष मात्र है। पुलिस-सदर । यह अक्षा० २४ ३०१० उ० और देशा० (2) Beal's Ha-Hian xxviii & Julien's IIven ५३१० पू०के मध्य अवस्थित है। Thaang. I. 1 . ___बड.दुमा (हिं० पु०) वह हाथी जिसकी पूछकी कंगनी पांव (३) शकादिस्य, बुद्धगुप्त, तथागत, बालादित्य, वन और . तक हो, लम्बी दुमका हाथी। मध्यभारत राजप्रतिष्ठित सघ है। भलावा इसके अवलोकितेश्वर मति और विहार, बालादिस्यविहार, ताराबोधिसत्वविहार बड नगर-- मध्यप्रदेशके ग्वालियर राज्यके अन्तर्गत कपत्यदेवी मन्दिर, बुद्धके वेश और नस्वस्ता शनी बद्ध- उज्जैन जिलेका एक शहर। यह अक्षा० २३४ उ. और मृति, भैरव, नानास्तूप और बिहार निर्णय कनि हम साहब देशा० ७६ २३ चामला नदीके किनारे अवस्थित है। सफलप्रयत्न हुए हैं। जनसंख्या दश हजारसे ऊपर है। पहले यह राजपूत