पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१६४

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१५८ बड़गार-बढ़ाव कोई अत्युक्ति नहीं । नगरसे सेना निवास जानेके । बढ़ (हिं० वि०) अधिक, ज्यादा । इस शब्दका प्रयोग अकेले लिये विश्वामित्र नदी और उसकी शाखाके ऊपर चार नहीं होता। पुल बने हैं। नगर दो वृहत् पथसे चार भागोंमें विभक्त है। बढ़ई (हिं पु०) सूत्रधार, काठको छील और गढ़ कर मध्यस्थलमें बाजारके पास मुगलोंका बनाया हुआ एक अनेक प्रकारके सामान बनानेवाला। तीन गुम्बदका चौका दालान है। यही यहांका देखने बढती ( हि स्त्री०) १ मात्राका आधिक्य, मान या योग्य स्थान है। अलावा इमके महाराष्ट्रोंके समयको संख्यामें वृद्धि । विस्तारको वृद्धि के लिये अधिकतर बाढ़ तथा फतेसिंहके दरबार आदिकी अट्टालिका भो अपूर्व शब्दका प्रयोग होता है । २ धन धान्यकी वृद्धि, संपत्ति शोभा दे रही हैं। गायकवाड़राज मलहार रावके शासन | आदिका वढ़ना। कालमें बड़ोदाकी अधिक श्रीवृद्धि हुई थी। उनके बढ़दार ( हिं० स्त्री० ) पत्थर काटनेका यन्त्र, टॉकी। समयमें नजरवाद, मकरपुरा, लक्ष्मीविलास आदि प्रासाट बढ़न ( हिं ० स्त्री०) वृद्धि, बाढ़। यमुनाबाई अस्पताल, राजकीय पुस्तकागार और कर्म- बढ़ना ( हि स्त्री०) १ वर्द्धित होना, वृद्धिको प्राप्त होना । स्थान, जेलखाना, बडोदा-कालेज आदि अनेक सुरम्य २ उन्नति करना, तरक्की करना। ३ अग्रसर होना, किसी अट्टालिकायें स्थापित हुई हैं। स्थानसे आगे जाना। ४ किसीसे किसी बातमें अधिक यहांके धर्मप्राण अधिवासियोंके यत्नसे असंख्य देव- हो जाना। ५ चलने में किसीसे आगे निकल जाना।६ मन्दिर निर्मित हुए हैं। गायकबाड राजाओंका प्रति- अधिक व्यापक, प्रबल या तीव्र होना। ७ परिमाण या ठित विट्ठल-मन्दिर, नारायणस्वामीका मन्दिर, खण्डोवा, संख्या अधिक होना। ८ दीपकका निर्वाप्त होना, चारजी, भोमनाथ, सिद्धनाथ, कालिका, बलाई, रामनाथ, ! चिरागका बुझना। ६ दूकान आदिका समेटा जाना, महाकाली, गणपति, बलदेवजी और काशी विश्वेश्वरका बंद होना । १० भावका बढ़ना, खरीदने में जयादा मिलना। मन्दिर प्रधान है। यहां गायकबाड राजाओंको अतिथि-: ११ लोभ होना, मुनाफेमें मिलना। शाला है जहां राजाखण्ड राव मुसलमान भिखारियोंको बढ़नी ( हिं० स्त्री० ) १ झाडू, बुहारी। २ पेशगी अनाज भिक्षा देनेकी अनुमति दे गये हैं। यहां के विभाग महा- या रुपया जो खेती या और किसी कामके लिये दिया जाता है। राष्ट्र और गायकवाड़ राजाओंके नाम पर आख्यात है।' ४ पञ्जावके रोहतक जिलेके अन्तर्गत एक छोटा नगर बढ़वारि ( हिं० स्त्री० ) बढ़ती देखो। यह यमुना नहरकी बुताना शाखा पर अवस्थित है। " बढ़ाना (हिं क्रि०) १ विस्तार या परिमाणमें अधिक बड़ गार-मन्द्राज प्रदेशके मलवार जिलान्तगत एक - करना, वर्द्धित करना। २फैलाना लंबा करना। ३ नगर। यह अशा० ११३६ उ० तथा देशा० ७५३७ पद, मर्यादा, अधिकार, विद्या, बुद्धि, सुख संपत्ति मादिमें पू०के मध्य अवस्थित है। यहांका दुर्ग पहले कोल- अधिक करना। ४ अप्रसर करना, चलाना। ५ चलने- त्तिरी ( चिरकल ! राजाओंके अधिकारमें था। पीछे में किसीसे आगे निकाल देना। ६ ऊँचा या उन्नत कर १५६४ ईमें कदसनाह वंशधरोंने उनसे दुर्गाधिकार छीन देना। ७ बल, प्रभाव, गुण आदिमें अधिक करना। ८ लिया। टोपसुलतानके हस्तगत होनेके बाद यह स्थान ; गिनती या नाप तोल आदिमें अधिक करना। दीपक वाणिज्यद्रव्यके शुल्कसंग्रहस्थानरूपमें परिणत हुआ। निर्वाप्त करना, चिराग बुझाना। १० नित्यका व्यवहार १७६० ई०में टीपूके हाथसे उक्त दुर्ग छीन कर पुनः कद- समाप्त करना, कार्यालय बन्द करना । ११ भाव अधिक त्तनाड़वशको दे दिया गया। किन्तु अभी यह स्थान Mai कर देना, सस्ता बेचना । १३ फैलाना। १३ समाप्त होना, तीर्थयात्रियोंके विश्रामस्थलमें परिणत हो गया है। बाकी म रह जाना। नपरका वाणिज्यस्रोत अप्रतिहत है और विचार अदालत बढ़ालो ( हिं० स्त्री० ) कटारी, कटार। आदिके रहनेसे इसकी दिनों दिन उन्नति होती जा रही बढ़ाय (हिं० पु०) १ बढ़नेको क्रिया या भाव । २ आधिक्य, विस्तार। ३ वृद्धि, तरकी। .