पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१८०

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१७४ षधिरता-पनखेरी बधिरता (स स्त्री०) बधिरस्य भावः तल-टाप । वाधिय, बध ( स० क्ली० ) बधातेऽनेनेति बन्ध (सर्वधातुभ्यटन उणू बहरापन। ५८ ) इति ष्ट्रन् । सीसक, सीसा। बधिरान्ध ( स० वि०) १ बधिर और अन्ध, बहरा और बधी (सं० स्त्री०) बधातेऽनया बन्ध-द्रन षित्वात् । चर्म- अंधा। (पु०) २ कश्यपके पुत्र नागभेद । रज्जु, बद्धी। बधिरिमन् ( स० पु०) बधिरसा भावः ( कर्णदृढादिभ्यः बन: हिं० पु० ) वन देखो। ध्या च पा ५१.३) बधिरता, बहरापन । बनआलू (हिं पु०) पिण्डालू और जमीकन्द आदिकी बधू (स. स्त्री० ) बध्नाति प्रेम्ना या बध-ऊ-नलोपश्च जातिका एक प्रकारका पौधा। यह नेपाल, मिक्किम, अन्तःस्थवादौ तु वहति संसारभार उह्यते भादिभि- बङ्गाल, बरमा और दक्षिण भारतमें होता है। यह प्रायः रिति वा वह-(वहर्धश्च । उण ११८५ इति ऊ धश्चान्ता- जगली होता है और बोया नहीं जाता। इसकी जड़ देशः। १ नारी, औरत। २ नवोढा, नवविवाहिता प्रायः जगली या देहाती लोग अकालके समय खाते हैं। स्त्री। ३ स्नुषा, पतोहू। ४ पृक्का । ५ भार्या, पत्नी। बनकंडा (हिं पु० ) वह कंडा जो वनमें पशुओंके मलके ६ शठी, कचूर । ७ शारिवौषधि, अनन्तमूल। आपसे आप सूखनेसे तैयार होता है, अरना कंडा । वधूक ( हि पु० ) धू। देखो। बनक (हिं स्त्री०) वनको उपज, जंगलकी पैदावार । बधूजन ( स० पु० ) वधूग्व जनः। योषिस्, नारी, स्त्री। बनककड़ी ( हिं० स्त्री० ) वनकर्कटी, पापड़े का पेड़ । यह बधूटशयन ( स० क्ली० ) बधूटीनां शयनमिय पृषोदरादि- सिक्किमसे ले कर शिमले तक पाया जाता है । इस पौधेसे त्वादिकारस्याकारः। गवाक्ष, झरोखा । एक प्रकारका गोंद और एक प्रकारका रंग भी निकाला बधूटो ( स० स्त्री० ) अल्पवयस्का बधूः अल्पार्थे टि, पक्षे जाता है। गोंद दवाके काममें आता है। ङोष , यद्वा वधू ( वयस्य चरम इति वाच्यं । पा ४।१।२०) बनकटी ( हिं० स्त्रो० ) १ एक प्रकारका बांस। पहाड़ी इत्यस्य वार्तिकोफ्त्या पक्षे डोप । १ पुत्रभार्या, पुत्रको लोग इसके टोकरे बनाते हैं। २ जगल काट कर उसे स्त्री, पतोहू । २ सुवासिनी, सौभाग्यवती स्त्री। ३नई आवाद करनेका स्वत्व वा अधिकार जो जमींदार या आई हुई बहू। मालिककी ओरसे किसानों आदिको मिलता है। बधूत्सव ( स० पु० ) वध्वाः उत्सवः आर्तव । स्त्रियोंके बनकर ( हि० पु० ) १ एक प्रकारका अस्त्र संहार, शत्रु के रजोदशन। - चलाए हुए हथियारको निष्फल करनेकी एक युक्ति। २ बधूत्सवप्रसव (स० पु०) वध्वा उत्सव आसवः स इव जंगलमें होनेवाले पदार्थों अर्थात् लकड़ी घास आदिकी प्रसवः पुष्पादियस्य । रक्ताम्लान । आमदनी। ३ सूर्य । बधूरा (हिं० पु० ) अधड़, बवडर । बनकल्ला (हि.पु०) एक प्रकारका जगली पेड़। बधोद्यत ( स० वि० ) बधाय उद्यतः । मारणार्थ उपयुक्त, बनकस ( हिं० पु०) एक प्रकारकी घास। इसे बनकुस, मारनेके लिये तैयार । बभनी, मोय और बाभर भी कहते हैं। इससे रस्सियां बध्य ( स० वि०) १ बधाई, मारनेके योग्य। बन्ध- बनाई जाती हैं। कर्मणि-क्यप । २ कारोरोद्धव्य । आधारे-क्यप्। ३ बनकोरा (हिं पु०) लोनियाका साग, लोनी। बन्धनस्थान । बनखड ( हिं० पु० ) वनप्रदेश, जङ्गलका कोई भाग। बध्यपाल ( स० पु. ) बध्य कारागारं पालयति पालि- 'बनखडी (हि स्त्री० । १ वनका कोई भाग । २ छोटासा अण, उपपदस०। कारागृहरक्षक । . बन । (पु.) ३ बनमें रहनेवाला, जगलमें रहनेवाला। बध्यभूमि ( स० स्त्री० ) हन भावे यत्, बधादेशः, वध्यस्य बनखरा (हिं० पु. ) वह भूमि जिसमें पिछली फसलमें भूमिः। श्मशान, फांसी देनेका स्थान । - कपास बोई गई हो। बध्योग (स.पु.) प्राषिभेद । बनरी-मध्य प्रदेशके होसङ्गाबाद जिलान्तर्गत सोहागः