पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१८९

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बन्दिपल्लम्बन्ध १८३ था। बालक वा वृद्ध, वृद्धा वा युवती किसीका लक्षा न है। १७५७-१७८० ई० तक यह स्थान अगरेज-फरासी- कर नादिरशाही चला दी। गर्भवती रमणियोंके उदर युद्धका केन्दस्थल बना रहा था। फाड़ कर नृशंस प्रव तिकी पराकाष्ठा दिखला दी थी। बन्देल ---बङ्गालके हुगली जिलांतर्गत हुगली शहरका एक सम्राट ने इस जघन्य वसिका बदला लेनेके लिये स्वयं गण्ड ग्राम । यह अक्षा० २२५५ उ० तथा देशा० ८८२४ इससे युद्ध किया । जजोरमें पकड़े रहने पर भी पू० भागीरथी नदीके किनारे अवस्थित है। यहां रोमन- बन्दा सम्राटकी आंखोंमें धूल डाल भग गया । सेना कैथलिक खटान सम्प्रदायका एक धर्ममन्दिर है। यह दल इकट्टा कर वह सम्राटका फिर बिदोहो बना। सम्राट मन्दिर १५६६ ई०में बनाया गया है और बङ्गाल भरमें फरु खशियरने इसको दबानेके लिये काश्मीरके शासन सर्वप्राचीन खुटधर्ममन्दिर समझा जाता है । १६२२ ईमें कर्ता आवदुस् समद खाँको मसैन्य भेजा। कितनी दिल्लीश्वरके आदेशसे मुगलोंने वह मन्दिर जला दिया बार घोरतर संघर्ष के बाद बन्दाने किलेमें आश्रय और भीतरकी प्रतिमूर्ति तथा चित्रोंको नष्ट कर डाला। लिया। समद खाँने भी दलबलके साथ आ कर खष्टधर्म याजक जब वन्दीरूपमें आगरे लाया गया, तब किलेको घेर लिया। रसद आदिके बंद होने पर बन्दा उसके अनुरोध पर सम्राट्ने धर्ममन्दिरके खर्च बर्च के आहाराभावमें आत्मसमर्पण करनेको बाध्य हुआ। लिये ७७७ बीघा निष्कर जमीन दान की। उसी आयसे बन्दा और अपरापर सिख कैदी दिल्ली भेजे गये।! नया मन्दिर बनाया गया और उसमें १४६६ ई०की लिपि बंदा लौह पंजरमें आवद्ध हो हाथीकी पीठ पर दिल्ली भी उत्कीर्ण हुई। पूर्ववत्तीं किसी समय पुर्तगीजोंने पहुंचा । सिखोंने अवनत मस्तकसं यह अवमनना सह्य इसकी रक्षाकं लिये एक दुर्ग बना दिया था। १९वीं की, किंतु मनही मन इस्लामधर्म ग्रहण करनेकी अपेक्षा शताब्दीमें यहां येसुइट विद्यालय, बोर्डिंग स्कूल, खुटान मृत्युको ही उन्होंने श्रेय समझा था । सम्राटके उन्हें जीवन सतियों के आश्रम आदि निर्मित हुए। अभी पुत्तगीजों दान देने में प्रतिश्रुत होने पर भी वे लोग दान इसलामधर्मके और फिरङ्गियोंकी अवनतिके साथ साथ यह स्थान ग्रहणमें सम त नहीं हये। फलतः सम्राट की आज्ञासे | भी श्रीहीन हो गया है। यहांके अधिवासी प्रायः बङ्गाली प्रति दिन सैकड़ों सिख-वीर घातकके हाथसे यमपुर ही है, धर्मयाजक बहुत थोड़े हैं। यहां प्रतिवर्ष नवम्बर भेजे जाने लगे। आठवें दिन बन्दा मय पुत्रोंके मारा मासमें कैथलिकोंके नोभेना (Nervent )-उत्सव में जायगा, यह घोषित कर दिया गया। जब वह मौतका बहुतसे खप्टान जमा होते हैं। दिन पहुंचा, तब घातकने बन्दा और इसके पुत्रको नगरके बन्ध ( स० पु० ) बन्ध हलश्चेति धनु ।१ बन्धन। २ वहिद शमें ला बन्दा को पुत्रके मस्तकच्छेनके लिये शरोर। जब तक कमवन्धनका क्षय नहीं होता, तब तक तलवार दी । बंदाने अपने पुत्रका शिरच्छेद करना मजूर देहके बाद अर्थात् मृत्युके बाद जन्म और जन्मके बाद नहीं किया। इस पर घातकने अपने हाथसे बालकका मृत्यु अवश्यम्भावी है। इसी कारण शरीरको बन्ध हृदय विदोण कर डाला और बलपूर्वक उस हृतपिण्ड- . कहते हैं। कर्मबन्धनके शेष हो जानेके बाद फिर शरीर- को बन्दाके मुखमें ढूंस दिया। अन्तमें उत्तप्त चीमटों ग्रहण नहीं करना पड़ता । ३ प्रन्थि, गांठ, गिरह । ४ कैद । से उसके शरीरका मांस झुलसा दिया और घोर यत्रणा ५ गृहादि वेष्टन अर्थात् घर बनानेमें पहले बन्ध ठीक कर देकर सिख गुरुके प्राण ले लिये। १७१५ ई में इस लेना होता है। १५, १७, १६ वा २१ इन सब बधोंमें पाशविक अत्याचारको अटलभावसे सह्म कर बन्दाने गृहादि बनाने होते हैं अर्थात् अयुग्मबन्धमें गृहादि प्रशस्त प्राणत्याग किया। हैं। युग्मबन्धमें गृहादि भूल कर भी न बनाये। घरकी बन्दिपल्लम्-मन्द्राजप्रदेशके आर्कट जिलान्तर्गत एक लम्बाई और चौड़ाई मिला कर जितने हाथ होते हैं उसे पर्वत और उस पर प्रवाहित नदी। यह अक्षा० ११ बन्ध कहते हैं। (ज्योतिस्तत्त्व) ४३ १५० उ० तथा देशा० ७६४८ पू०के मध्य अवस्थित पानी रोकनेका धुस्स, बाँध । ७ कोकशास्त्रके रतिके