पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१९८

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१६२ बभ्र वाहन-पम्भराली पुष्पवर्षा होने लगो। बनु बाहनने पिताको जीवित बभ्रुश ( स० लि. ) कपिशवर्ण । देख चरणोंमें प्रणाम किया। रणाङ्गणमें चित्रांगदा, बभ पुत (सं० वि०) वभ, कर्तृक अभिषुत सोम । उलूपी आदिको देख कर आश्चर्य से अर्जुनने पूछा, बलुश (संत्रि०) कपिलवर्ण। 'रणभूमिमें तुम लोग क्यों आये हो ? तुम्हारे यहां बम (अं० पु०) विस्फोटक पदार्थोंसे भरा हुमा आनेका क्या काम था?' उलूपीने अर्जुनसे कहा, 'नाथ! : लोहेका बना वह गोला जो शत्रुओंकी सेना अथवा किले मैंने आपके प्रेमसाधनके लिये वभ्र वाहनको युद्धाथीं आदि पर फेंकनेके लिये बनाया जाता है और जो गिरते बनाया था, इसलिये मेरा इसमें आप कोई दोष न समझे। ही फट कर आस पासके मनुष्यों और पदार्थको भारी आपने भारतयुद्ध में अधर्ममार्गका सहारा ले कर महात्मा हानि पहुंचाता है। भीष्मदेवको धराशायी वना अत्यंत पापका संचय किया बम (हिं० पु०) १ शिवके उपासकोंका वह 'बम' 'बम' शब्द है। अभी उस पापकी निकृति बभ वाहन हाथके द्वारा हार जिसके विषयमें यह माना जाता है, कि इसके उधारणसे खानेसे हो गई । यदि आपकी मृत्यु इस पापको शांतिके शिवजी प्रसन्न होते हैं। कहते हैं, कि शिवने क्रुद्ध हो बिना हो जाती, तो निश्चयसे नरक जाना पड़ता। पुत्रसे कर जब दक्षका शिरच्छेद किया, तब उसकी जगह छाग- पराजित होने पर आपका यह पाप दूर हो गया, अब का शिर जोड़ दिया जिससे वे बकरेकी तरह बोलने लगे। नरक नहीं जाना पड़ेगा। भगवती भागीरथी और वसु- इससे जब लोग गाल बजाते हुए बम' 'वम' करते हैं, गणने आपके इस पापकी शांतिका उपाय पहले ही तब शिवजी प्रसन्न होते हैं। निर्देश कर रखा था। २ शहनाईवालोंका यह छोटा नगाड़ा जो बजाते समय भीमने जब प्राण छोड़े थे, उस समय देवता और बाई ओर रहता है, मादा नगाड़ा । ३ फिटन आदिमें आगे- वसुगणने गङ्गामें स्नान कर भागोरथोसे कहा, 'अर्जुनने की ओर लगा हुआ वह लंबा बांस जिसके दोनों ओर भोष्मको अन्यायसे मारा है, आप सम्मति दीजिये, हम घोड़े जाते हैं, बग्गी। ४ एक्के, गाड़ियों आदिमें लोग अर्जुनको शाप दें। गङ्गाने "तथास्तु' कह कर आगेकी ओर लगा हुआ लकड़ियोंका वह जोड़ा जिसके उन लोगों को शाप देनेकी अनुमति दे दी। मैं भी उस समय बीचमें घोड़ा खड़ा करके जोता जाता है। उपस्थित थी। यह सुनते ही मैंने वहांसे चल कर सभी बमचख (हिं० स्त्री० ) १ शोर, गुल। २ विवाद, संवाद अपने पितासे कह सुनाया। पिता आपके कल्याण लड़ाई। को इच्छासे वसुगणकी शरणमें गये । पितासे संतुष्ट हो बमसारु-युक्तप्रदेशके गढ़वाल राज्यान्तर्गत एक गिरि- वसुगणने भागीरथीकी सम्मति ले कर कहा, अर्जुनके सङ्कट। यह अक्षा० ३०५६ उ० और देशा० ७८३६ पापका विनाश तभी होगा जब अर्जुन अपने पुत्र मणि- पू०के मध्य अवस्थित है। समुद्रपृष्ठसे इसकी ऊंचाई पुरके अधिपति वभ बाहनके हाथसे पराजित होंगे। १५४४७ फुट है। इसका शृङ्ग हमेशा बर्फ से ढंका पिताने मुझसे यही वृत्तान्त कहा था। इसलिये मैंने ही रहता है। बभ वाहनको युद्ध के लिये उभाड़ा था। आप बमीठा (हिं० पु० ) बल्मीक, बांबो। . इस पराजयसे कुछ भी दुःखित न हों।' उलूपी बमुकावला (फा० क्रि० वि० ) १ समक्ष, मुकावलेमें। २ के इन वचनोंसे अर्जुनका मानसिक क्लेश बिलकुल विरुद्ध, मुकावले पर। जाता रहा। अनन्तर वे यज्ञीय अश्वके पोछे वहांसे फिर बमूजीव (फा० क्रि० वि० ) अनुसार, मुताबिक । रवाना हुए । इधर बभ वाहन माता चित्रांगदा और उप- वमेला (हिं० स्त्री० ) एक प्रकारकी मछली। माता उलूपोके साथ युधिष्ठिरके अश्वमेध यज्ञमें पहुंचे। बमोट (हिं० पु०) बमीठ। देखो। इस यझमें युधिष्ठिरने बभ्रुवाहनका बडा आदर किया था। बम्भर (संपु०) भमर, भौरा। (भारत आश्वमेधिक० ७६-८६०) बम्भराली (सस्त्री०) मक्षिका, भूमर ।