पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/२०७

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बरसाइन-बराइच २०१ बरसाइन (हिं स्त्री० ) वह गौ जो हर साल बच्चा दे, आग। ४ साहो नामका जंगली जंतु। (स्त्री० )५ प्रतिवर्ष बचा देनेवाली गाय। प्रसूताका वह स्नान तथा अन्यान्य क्रियाएँ जो सन्तान बरसाऊ (हिं० वि०) वर्षा करनेवाला। भूमिष्ठ होनेके बारहवें दिन होती हैं। ६ सन्तान भूमिष्ठ बरसात ( हि स्त्री० ) वर्षाऋतु, वर्षाकाल। होनेके दिनसे बारहवां दिन । ७ पत्थर आदि भारी बोझ बरसाती (हिं० वि० ) १ वर्षा सम्बन्धी, बरसातका। उठानेका मोटा रस्सा । ८ जलानेकी लकड़ीका भारी (पु०) २ वरसातमें होनेवाला घोड़ोंका स्थायो रोग। बोझ, ईन्धनका बोझ। ३ एक प्रकारका ढीला कपड़ा जिसे पहन लेनेसे शरीर बरही ( हिं० पु०) सन्तान भूमिष्ठ होनेके दिनसे बारहवां नहीं भीगता। ४ पैर में होनेवाली एक प्रकारको दिन । इसी दिन नामकरण होता है। फुसिया जो बरसातमें होती हैं। ५ चरस पक्षी, चीनी बरांडल (हिं. पु०) १ जहाजमें उन रस्सों से कोई रस्सा मोर। जो मस्तूलको सीधा खड़ा रखनेके लिये उसके चारों ओर बरसाना (हिं क्रि०) १ घुष्टि करना, वर्षा करना। २ ऊपरी सिरेसे ले कर नीचे जहाजके भिन्न भिन्न भागों तक ओसाना, डाली देना। ३ वर्षाके जलकी तरह लगातार बांधे जाते हैं। जहाजमें इसी प्रकारके और कामों में बहुत सा गिराना। ४ अधिक संख्या या मात्रामें चारों आनेवाला कोई रस्सा। ओरसे प्राप्त कराना। बरांडा (हिं० पु० ) बरामदा देखो। बरसायत (हिं॰ स्त्री० ) १ शुभ घड़ी, शुभ मुहूर्त। २ बरांड ल (हिं० पु० ) बरांडल देखो। बरसाइत। बरांडी (स्त्री० ) एक प्रकारकी विलायती शराब, बरसावना (हिं पु०) बरसाना देखो। व्रांडी। बरसिंघा (हिं. पु० ) वह बैल जिसका एक सींग खड़ा बरा (हिं० पु०) १ एक प्रकारका पकवान जो उड़दकी पीसी और दूसरा नीचेकी ओर झुका हो, मैना। हुई दालका बना होता है। इसका आकार टिकिया-सा बरसी (हिं स्त्री०) वह श्राद्ध जो किसी मृतकके उद्देश्यसे होता है । इसे घी या तेलमें पका कर यो हो अथवा दही, उसके मरनेकी तिथिके ठीक एक वर्ष बाद होता है। इमलीके पानी आदिमें डाल कर खाते हैं। २ भुजदण्ड बरसू ( हिं० पु०) एक प्रकारका वृक्ष । पर पहननेका एक आभूषण, टाँड़। बरसोदिया ( हि पु०) पूरे साल भरके लिये रखा हुआ | बराइच-अयोध्याप्रदेशके फैजाबाद विभागान्तर्गत एक नौकर । जिला। यह युक्तप्रदेशके छोटे लाटके शासनाधीन परसौड़ी (हि. स्त्री०) वार्षिक कर, प्रति वर्ष लिया जाने अक्षा० २७°४ से २८ २४ उ० तथा देशा० ८१.३ वाला कर। से ८२ १३ पू०के मध्य अवस्थित है । भूपरिमाण २६४० बरहटा (हिं० पु०) बड़ी कटाई, कड़वा भंटा। संस्कृतमें वर्गमील है। यहां घर्घरा और राप्ती नदी बहती है। इसे वार्ताको, वृहती, महती, सिंहिका, राष्ट्रिका, स्थूल- दोनों नदीके मध्यवत्ती भूभाग समतल क्षेबसे प्रायः ४० कंटा और क्ष भण्टा कहते हैं। फुट ऊँचा और प्रायः १३ मील प्रशस्त है। पूर्वोक्त दो बरह (हिं० पु.) वृक्ष आदिका पत्ता । नदियों के अलावा यहां कोरियाला, मोहन, गीर्वा, सरयू, बरहना (फा०वि०) नग्न, नंगा। भकला, सिंहिया आदि कई एक शाखा-नदियां विद्यमान बरहम (फा० वि०) १ कुछ, जिसे गुस्सा आ गया हो। हैं। अलका अभाव नहीं रहनेके कारण यहां सब तरह- २ उत्तेजित, भड़का हुआ। का अनाज उत्पन्न होता है। इन सब द्रव्योंकी नदी बरहा (हिं० पु.) १ खेतों में सिंचाईके लिये बनी हुई। द्वारा दूर दूर देशोंमें रानी होती है। अलावा इसके छोटी नाली। २मोटा रस्सा। चीनी, रुई, तमाकू, अफीम, नील आदि भी बहुतायतसे बही (हिं. पु०)१ मयूर, मोर। २ मुरगा।३ अग्नि, उपजती है। जिलेके उत्तर प्रायः २५७ वर्गमील वनाममि Vol, xv.