पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/२२३

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चलना-पलभद्रसिंह २१७ नाम। बलना (हिं० कि० ) जलना, दहकना। । प्रभृतिके पूजनमें अष्टदलपन बना कर योगियोंको पूजा वालनिग्रह (सं० पु० ) बलस्य निग्रहः षष्ठीतत् । बलक्षय। करनी चाहिये। इस प्रकार पूजा नहीं करनेसे कोई फल बलनेह (हिं. पु०) एक संकर राग। यह रामकली, नहीं होता। ५ पर्वतविशेष ( भाग० ५।२०।२६) ६ श्याम, पूर्वी, सुन्दरी, गुणकली और गंधारसे मिल कर : क्षुद्रकदम्ब वृक्ष। (वि.) ७ बलशाली, ताकत- वर। बलन्द-छोटानागपुरवासी एक आदिम जाति । ये लोग बलभद्र-- इस नामके कई ग्रन्थकारों के नाम मिलते हैं। अपनेको कृषिजीवी और हिन्दू बतलाते हैं। सम्भवतः ये यथा... भक्त-बलन्म नामक गोंड जातिकी अन्यतम शाखा हैं। १ अद्भुत तरङ्गिणीके प्रणेता । २ आहिकके रचयिता। इन लोगोंके मध्य हिन्दू क्रिया-कर्म व्यतीत कोई पार्वतीय ३कालीतत्त्वामृततन्त्रके प्रणयनकार । ४ चेतसिंहबिलास- देवदेवी-पूजाका परिचय नहीं मिलता। कोरिया-राजवंश- के प्रणेता । ५ जातक चन्द्रिका, वृहज्जातकको नष्टजातका- का इतिहास पढ़नेसे मालूम पड़ता है, कि एक दिन ध्यायटीका और होरारत्नके रचयिता । भट्टोत्पलने बलन्द लोग विशेष पराक्रमशाली थे। गोंड़ और क्रोञ्च बृहत्संहिताटोकामें इनका उल्लेख किया है। ६ नवरत्न- नामक कोल जातिके वार बार आक्रमणसे बलन्द-राजवंश धातुविवादके प्रणेता । ७ महारुद्रन्यासपद्धतिके रचयिता। अधःपतनको न हुआ। ८ योगशतकसङ्कलयिता । रामगीतावृत्तिके प्रणेता । १० बलन्धरा ( सं स्त्री०) भीमसेनकी पत्नी। शक्तिवादटीकाके रचयिता। ११ महानाटकदीपिकाके ( महाभारत आदि :) प्रणेता। ये काशीनाथके पुत्र और कृष्णदत्तके पौल थे। बलपति ( स० पु० ) १ प्रधान सेनापति । २ इन्द्रका एक १५६२ ई०में इन्होंने उक्त प्रन्थ लिखा था। १२ हायनरत और १६५४ ई०में होरारत्नके रचयिता। ये दामोदरके पुत्र और हरिरामके भाई थे। मकरन्दटीका और भास्करा- बलपाण्डकर ( स० पु०) कुन्द वृक्ष, कुंदका पौधा। चायकृत वीजगणितको टिप्पणी भी इन्होंने लिखी है। बलपुच्छक ( सं० पु०) काक, कौआ। १३ पत्रप्रकाशके रचयिता। १४ महारुद्रपद्धतिके प्रणेता। बलपृष्ठक ( स० पु०) रोहित मत्स्य, रोहू मछलो।। १५ बालबोधिनी नामक भास्वतीटीकाके प्रणेता, बसन्सके बलप्रद (सं० वि० ) बलं प्रददाति दा-क। बलदायक, पुत्र और बिमलाकरके पौत्र । इन्होंने १५४४ ई०को उमा- बलदेनेवाला। नगरमें ग्रन्थ लिखा था । १६ वृन्दसंग्रहशेषके प्रणेता। बलप्रसू ( स० स्त्री० ) प्रसूते इति प्रसूज ननो बलस्य बल- १७ नित्यानुष्ठानपद्धतिके रचयिता। १८ अशौचसारके देवस्य प्रसूजननी। रोहिणी, बलरामको माता। प्रणेता। १६ एक विख्यात ज्योतिविद् । अलबीरुनीने बलवलाना (हिं० कि०) १ ऊँटका बोलना। २ व्यर्थ । पथ, इसका उल्लेख किया है। बकना। ३ निरर्थक शब्द उच्चारण करना। बलभद्र तर्कबागीश--दायभागसिद्धान्तके प्रणेता। बलबलाहट (हिं० स्त्री० ) १ ऊँटको बोली। २ व्यथ बक- बलभद्रपुर-तैरभुक्तके अन्तर्गत एक जनपद । वाद। ३ उमंग । ४ अहङ्कार, घमण्ड । बलभद्र भट्ट-तकभाषाप्रकाशिका, सप्तपदाथींटीका और बलवीज (हि.पु.) कंघी नामके पौधेका बीज। प्रमाणमञ्जरी-टीकाप्रणेता। इनके पिताको नाम विष्णु- बलबीर (हिं० पु० ) बलरामके भाई श्रीकृष्ण । दास और माताका माधवी था। बलभ (संपु० ) विषधर कीट, एक विषैला कीड़ा। बलभदशक्त-कुण्डतत्त्वप्रदीप और चातुर्मास्यकौमुदीके बलभद (सं० पु०) बलं भद्र श्रेष्ठमस्य वा बलमस्यास्तोति रचयिता । इन्होंने १६२४ ई०में यह ग्रन्थ जयसिंह दीक्षित. अर्शः आदित्वादच, बलो बलवानपि भदः सौम्यः । १ के नाम पर उत्सग किया। इनके पिताका नाम अनन्त । २ लोध्र, लोधका पेड़। ३ गवय, नीलगाय । स्थविर था। ४ विष्णुपूजनोत अष्टदल पनस्थ योगिविशेष। विष्णु बलभद्रसिंह-१ एक गुर्खासरदार । १८१४ई में नेपाल-युद्धके Vol. xv. 5