पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/२२९

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बलास्कारित-बलाश २२१ बलात्कार पूर्णक किसी स्त्रीके सतीत्वका नाश करना, ! बलाबलाधिकरण ( स० क्ली० ) बलश्च अबलञ्च ते अधि- जिनाबिल्जन। कियते अस्मिन् अधि-कृ आधारे ल्युट । आकाक्षा बलात्कारित (स० वि०) जिससे बलात्कारसे कुछ और अनाकाङ्क्षारूप बलाबलके निश्चायक जैमिनि-उक कराया जाय, जिस पर बलात्कार करके कोई काम न्यायभेद । ( वेदान्तपरि ) कराया जाय। बलामोटा (स० स्त्री०) बलमोटयतीति बल-मुट-अच् टाप । बलात्कृत (सं०नि०) १ बलपूर्वक आक्रान्त, जिसके १ नागदमनी नामकी ओपधि । इसका गुण कटु, तिक, साथ बलात्कार किया गया हो। २ हठात् धृत, जो लघु, पित्त और कफनाशक, मूत्रन्छ और बणनाशक सहसा पकड़ा गया हो। माना गया है। २ जयन्ती। बलात्मिका ( स० स्त्री० . बलमेव आत्मा स्वरूपं यस्याः। बलाय (स.पु० ) अयतीति अयः, प्रापकः बलस्य अयः । १हस्तिशुण्डवृक्ष, हाथीसूड नामका पौधा । २ गधापद्म। वरुणवृक्ष, बन्ना। बलादि (म० पु. १ पाणिन्युक्त यप्रत्यय निमित्त शब्द- बलाय ( अ० पु० ) : आपनि, विपत्ति । २ अत्यन्त दुःख- गण। यथा बल, चुल, नल, दल, वट, लकुल, उरल, दायी मनुष्य, वहुत तंग करनेवाला आदमी । ३ दुःख- पुल, मूल, उल, डुल, वन, कूल । २ अस्त्यर्थे मतुप् प्रत्ययः दायक रोग जो पोछा न छाड़े। ४ भूत प्रेतकी बाधा। निमित्त शब्दगण । यथा -वल, उत्साह, उद्भास, ५ दुःख, कष्ट। ६ एक प्रकारका रोग। इसमें रोगीकी उवास, उदास, शिखा, कुल, चूड़ा, सुल, कल, आयाम, उंगलीके छोर या गांठ पर फोड़ा हो जाता है। रोगीको व्यायाम, आरोह, अवरोह, परिणाह, युद्ध। बहुत कष्ट होता है और उगली कट जाती या टेढ़ी हो बलाद्यघृत ( म० क्ली० ) घृतौषधभेद । इसकी प्रस्तुत- जाती है। प्रणाली-गव्यघृत ४ सेर, क्वाथके लिये बला, गोरक्ष, वलागति ( म पु० ) वलस्य तन्नाम्ना प्रसिद्धासुरस्य अजुनको छाल, कुल मिला कर ४ सेर। इन्हें ६४ सेर अरातिः । १ इन्द । २ विष्णु । जलमें उबाले। जब जल १६ सेर बच रहे तब उसे नीचे वलारिष्ट ( स० क्लो०) आयुर्वेदात औषधविशेष । उतार कर एक सेर यष्टिमधु डाल दे। इसका सेवन : प्रस्तुत प्रणाली -बला १२॥ मेर और अश्वगन्धा १२॥ करनेसे हृद्रोग, शूल, क्षत, रक्तपित्त आदि रोग जाते मेर इमे मिला कर २१६ मेर जलमें पाक करे । जब जल रहते हैं। (भैषज्यरस्ना० हृद्रोगाधि०) ६४ सेर बच रहे, तो नीचे उतार ले । पोछे ठंढा हो जाने बलाद्या ( स० स्त्रो०) बलाय आद्या श्रेष्ठा। बला। प उममें ३७॥ सेर गुड़, २ मेर धवका फूल, २ पल क्षीर- बलाधिक ( स० पु. ) बलश्रेष्ठ, वह जो अधिक बलशाली . ककोली, २ पल एगएडमूल और रास्ना, इलायची, लवङ्ग, . म्बसखसकी जड़ और गोखुर प्रत्येक एक एक पल डाल बलाधिकरण (स क्ली०) सेनादिका कार्य। दे। पीछे किसी चीजसे बरतनका मुंह ढक कर एक मास बलाधिष्ठान ( संक्ली० ) वलस्य अधिष्ठान । बलाधान। तक उसी अवस्था में छोड़ दे। उसका सेवन करनेसे बलाध्यक्ष (सं० पु. ) बलस्य अध्यक्षः। सेनापति। बलपुष्टि और अग्निवृद्धि होती तथा प्रवल बातरोग बलान-तिरहुत जिलेमें प्रवाहित एक छोटी नदी। जाता रहता है । ( भैषज्यरत्ना० वातरक्ताधि ) बलानुज ( स० पु.) बलस्य बलरामस्य अनुजः कनिष्ठः। बलालक (सपु०) बलाय अलति समर्थो भवतीति श्रीकृष्ण। ... बल-अलण्वुल । पानीयामलक, जलआंवला। बलापञ्चक (सक्लो०) बला, अतिबला, नागबला, महा- बलावलेप ( स० पु. ) वलेन अवलेपः । गर्ग, अहङ्कार, बला और राजबला नामकी पांच ओषधियोंके समुदायका दर्प। नाम। बला देखो। वलाश (सं० पु०) बलमश्नातीसि बल-अश-अण।। बलाबल (सली०) बलश्च अवलञ्च । बल और अबल।। श्लेष्मा, कफ । २ कण्ठगतरोगविशेष, गलेका एक रोग