पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/२४५

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बल्सपखालपुर बस्न-एक प्राचीन राज्य। वहिक देखो। बनवाया था। १७७५ ई०में दिल्लीसम्राट्ने यह स्थान बस्ति-हिमालयकी पार्वत्यप्रदेशवासी एक भोटजाति। अजित् सिंहको समर्पण किया। पीछे उनके लड़के बहा- 'हिन्दूकुशसे ले कर तिब्बतके नाना स्थानों में इनका वास है। दुर राजगद्दी पर बैठे। अजित्के उत्तराधिकारीने गदरके इन लोगोंने बहुत कुछ मुसलमानोंका अनुकरण करना समय विद्राहियोंका साथ दिया था, इस कारण पीछे सीख लिया है। वृटिश सरकारने उनका राज्य छीन लिया। तभीसे यह बल्बज (संपु० ) तृणभेद । अंगरेजोंके दखलमें आ रहा है। शहरमें एक वाफ्युलर बल्य (सं० क्ली०) बलाय हित बल ( वुझमणकठ जिलेति । पा। स्कूल और चिकित्सालय है। ४।२८०) इति ष । १ प्रधान धातु, शुक्र । 'पु०) २ बुद्ध- । बल्ला ( हिं० पु० ) १ लकडीकी लंबी, सीधी और मोटी छड़ भिक्षक। (त्रि.) ३ बलकर, ताकतवर। . या लट्ठा । २ मोटा उंडा, दंड । ३ गेंद मारनेका लकड़ो- बल्या (सं० स्त्री०) बल्या टाप । १ अतिबला । २ अश्वगन्धा। का डंडा जो आगेकी ओर चौड़ा और निपटा होता है। ३ प्रसारिणी। ३ शिघ्रीडी, चंगोनी। ४ बांस या हुंडा जिससे नाव खेते हैं। ५ गोबरकी सुखाई बल्ल (सं० पु०) बल्ल देखो। हुई पहियेके आकारकी गोल टिकिया जो होलिका बल्लकी (सं० स्रो० ) वल्लकी देखो। जलनेके समय उसमें डाली जाती है। बल्लभ (स.पु०) वल्लम देखो। बल्लापलि मन्द्राजप्रदेशके कड़ापा जिलान्तगत एक वन- बल्लम ( हिं० पु० ) १ छड़, बल्ला । २ डा, सोंटा। ३ वह . विभाग। यहां तरह तरहके बहुमूल्य काष्ठ पाये जाते हैं। सुनहरा या रूपहला दंडा जिसे प्रतिहार या चोबदार बल्लारी (हिं० स्त्री०) सम्पूर्ण जातिकी एक रागिनी जिसमें राजाओं के आगे आगे ले कर चलते हैं। ४ बरछा, भाला। केवल कोमल गांधार लगता है। बल्लमटेर ( अपु०) १ स्वेच्छापूर्वक सेनामें भत्ती होने- वल्लालदेव -दाक्षिणात्यके शिलाहार-वंशीय एक राजा । वाला। २ स्वेच्छा सेवक। ये १०१० शकमें विद्यमान थे। बलमबर्दार ( हिं० पु० ) वह नौकर जो राजाओंकी सवारी बल्लालबाड़ो--१ प्राचीन गौड़राज्यके अन्तर्गत एक स्थान या वरातके साथ हाथमें बल्लम ले कर चलता है। यह अभी स्तूपाकारमें परिणत हो गया है। इसका घेरा बल्लव ( सं० पु०) १ जातिविशेष । २ पाचक, रसोइया। एक मीलसे कम नहीं होगा। बहिर्भागमें जो विस्तृत ३ भीमका वह नाम जो उन्होंने विराटके यहां रसोइयेके बांध देखा जाता है, उसका निम्नभाग ५० फुट विस्तृत रूपमें अज्ञानवास करनेके समय धारण किया था।४ है। उस प्राचोरके बाहर और भीतर ७५ फुट प्रशस्त गोपालक, चरबाहा। परिखा विद्यमान है। बल्लवगढ़-१पजाबके दिल्ली जिलेकी तहसील । यह अक्षा २ विक्रमपुर जिलान्तर्गत एक स्थान। प्रवाद है, २८१२ से २८ ३६ उ० तथा देशा०७७७से ७७३१ कि सेनवंशीय राजा बल्लालसेन यहां आ कर रहते थे। पू० के मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण ३६ बगमील और इस स्थानमें ७६० फुट चतुरस्र एक मृत्तिकानिर्मित जनसंख्या लाखसे ऊपर है। यमुना नदी तहसीलके किलेका ध्वंसावशेष दृष्टिगोचर होता है। उसके पास पश्चिम हो कर बहती है। इसमें दो शहर और २४७, ही रामपाल नामक दिग्गी है। प्राम लगते हैं। बजलसेन और विक्रमपुर देखो। २ उक्त तहसीलका एक शहर । यह अक्षा० २८ २० बल्लालपुर-मध्यप्रदेशके चांदा जिलेके अन्तर्गत एक उ० तथा देशा०७७२० पू० दिल्लीसे २४ मील दक्षिणमें प्राचीन नगर। यह अक्षा० १६५४५ उ० तथा देशा० अवस्थित है। जनसंख्या प्रायः ४५०६ है। यह नाम ७६ २३१५ पू०के मध्य अवस्थित है। एक समय इस -बलराम शब्दका अपभ्रश है । बलराम एक जाट सरदार थे जनपदमें प्राचीन गोंडराजवंशकी राजधानी थी। यह जिन्होंने यहां पर अपने नाम पर एक दुर्ग और प्रासाद | प्राचीन नगर जगलमें परिणत हो जाने पर भी उसका