पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/२४९

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


२४३ लगा कर राजा बल्लालसेनकृत अद्भुतसागरका अव- बब (सं० पु. । ज्योतिषोक्त प्रथम करण । इस करणमें शिष्टांश संकलन किया। शुभाशुभ कर्मादि करनेसे कल्याण होता है । जो इस करण. - इस कथासे मालूम होता है, कि बल्लालसेनने १०६० में जन्म लेता, वह शूर, अतिशय धीरप्रकृतियुक्त, कृत- शकमें अद्भुतसागरका लिखना आरम्भ किया था। कर्मा और पण्डित होता है नथा कमला उसके घरमें इस प्रन्थकी परिसमाप्तिके पहिले लक्ष्मणसेनको राज्यमें . हमेशा वास करती है। ( कोटी प्र०) अभिषिक्त कर आप इस स्वर्ग लोकसे चल बसे। बवघूरा ( हिं० पु० ) बसुर, बगूला। बसलालके दानसागरसे पता चलता है, कि १०६१ शकमें बवना ( हि कि० ) छिटकना, छितराना, बिखरना । यह ग्रंथ सम्पूर्ण हुआ था । संभव है, इसी शकमें.

बघरना (हि कि०) बौपना देखो।

अथवा इसके पहिले बल्लाल स्वर्गारोहण कर गये हों। बवादा (हिं० स्त्री० ) एक प्रकारको जड़ी या ओषधि जो सेनराजवश देखो। हल्दीकी तरहको होती है। बल्लालको मृत्युको ले कर बल्लालचरितमें पक गन्य इस प्रकार लिखी है,--एक बार बल्लाल वायादुम्ब नामक बवासीर ( अ० स्त्री० ) एक प्रकारका रोग। इसमें गुदे- न्द्रियमें मस्से या उभार उत्पन्न हो जाते हैं। इसमें एक म्लेच्छके साथ युद्ध करने गये। युद्धयात्रामें वे अपने रोगीको पीड़ा होती है और पखानेके समय मस्सोंसे साथ दो कबूतर ले गये थे। जाते समय उन्होंने महि- रक्त भी गिरता है। अर्शरोग देखो। षियों से कह दिया था, ये कबूतर वापिस आ जाय, तो जानना, हमारी मृत्यु हो गई है, तुम लोग सभी चिता- वशिष्ट ( स०पु०) वसिष्ट देखो। रोहण कर लेना।' इधर बल्लालने महायुद्धमें वायादुम्बको बशीरी ( अ० पु० ) अमृतसरमें मिलनेषाला एक प्रकार- निहत किया । युद्धके अवसान होने पर श्रान्ति दूर करने का बारीक रेशमी कपड़ा। के लिये वे ज्यों ही स्नान करने जलाशयमें घुसे, त्यों | बाकय ( स० पु० ) तरुण वत्म, एक वर्षका बछड़ा। हो वे दोनों कबूतर उड़ कर घर पहुचे। बल्लालकी बष्कयणी (सं० स्त्री०) वष्कयस्तरुणवत्सः सोऽस्ति महिषियोंने कबूतरको देख पतिको मृत्युका निश्चय कर | अस्याः वयपामादित्वान्न, पक्षे इनि ततो गत्वं । चिर लिया और अपने सतीत्वका परिचय दिया। बल्लालसेनने प्रसूता गाभि, वह गाय जिसको ध्याए हुए बहुत समय हो घर आकर शोचनीय दृश्य देख, अग्निमें अपना काम तमाम | गया हो। किया। किन्तु इस गल्पकी सत्यता प्रतीत नहीं होती। वसंत ( हिं० पु० ) वसन्त देखो। गौडाधिप बल्लालसेनके दो सौ वर्ष बाद विक्रमपुरमें राम- बसंता ( हि० पु०) हरे रंगकी एक चिड़िया। इसका पासके निकट बल्लालसेन नामक एक वैद्य राजा प्रादु- सिरसे ले कर कंठ तकका भाग लाल होता है। भूत हुए । वे ही मुसलमानों के हाथसे मारे गये थे, ऐसा वसंतो (हिं० वि०) १ वसन्त ऋतु सम्बन्धी, वसन्तका । प्रवाद प्रचलित है। | २ खुलते हुए पीले रंगका, सरसोंके फूलके रंगका । पु०) बल्व (सं.क्ली० ) ज्योतिषोक्त करणभेद । | ३ एक रंगका नाम जो तुनके फूलों आदिमें रंगनेसे आता बल्बजा (स. स्त्री०) एक धासका नाम। है। यह हलका पीला होता है पर गन्धकीसे अधिक बल्वल (सपु०) इल्वल नामक दैत्यके पुलका नाम। तेज होता है। वसन्त ऋतु में यह रंग लोगोंको अधिक बल्हि ( स० पु०) बल्हनन् । १ क्षत्रियभेद । २ जनपद- प्रिय होता है। ४ पीला कपड़ा। भेद। बवंड़ना (हिं० कि० ) व्यर्थ फिरना, इधर उधर घूमना। बसंदर ( हिं० पु० ) अग्नि, आग। वडर (हिं० पु०) १ चक्रवात, चक्रकी तरह घूमती बस (फा०वि०) १ पर्याप्त, भरपूर । ( अध्य०)२ पर्याप्त हुई वायु। २ प्रचण्ड वायु, आंधी, तूफान। . काफी ।