पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/२६९

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बहुमकार-बहुमान्य ०६३ बहुप्रकार (स.नि.),नानाविध प्रकार, तरह तरहका। बहबेगम-लखनऊके नवाब आसफ उद्दौलाकी माता। बहुप्रकृति ( स० लि.) बहुप्रकृतियुक्त। इन्होंने १७६८से १८१५ ई० तक फैजाबाद नगरका निष्कर बहुप्रज (सं० वि०) बहः प्रजा यस्य। १ बहुसन्तति भोग किया था। उनकी मृत्युके बाद उक्त नगर तहस विशिष्ट, जिसके बहुत संतान हों। (पु.) २ मुअतृण, नहस हो गया। उनका समाधि-मन्दिर आज भी विध मूजका पौधा । ३ शूकर, सूअर । मान है जो अयोध्याप्रदेश भरमें एक श्रेष्ठ भवन समझा बहुप्रतिक्ष (स.नि.) वयः प्रतिक्षाः यस्मिन् । १ अनेक- जाता है। पदसड़ीण पूर्वपक्षविशिष्ट व्यवहार, अनेक विषयक प्रतिक्षा- बहुभद्र ( स० पु० ) जातिविशेष । युक्त व्यवहार । २ अनेक प्रतिक्षायुक्त । बहुप्रद (सं० वि०) प्रददातीति प्र-दा-क, बहूनां प्रदः । १ | बहुभाषिन् ( स० त्रि०) बहुभाषने भाष णिनि। बहुत बोलनेवाला, बकबादी। प्रचुरदाता, बहुत देनेवाला । (पु०) २ शिव, महादेव । बहुभाष्य ( स० क्ली० ) वह भाषण । बहुप्रसू (सं० स्त्री०) बहून् प्रसूते इति बहुप्रक्विप् । बहु- सन्तान प्रसवकारिणी, बहुत बच्चा जननेवालो। बहुभुज ( स० त्रि०) नहु-भुज-किप। १ बहुभोजनकारी, बहुप्रिय ( स० पु० ) यवतृण। बहुत खानेवाला। बहुप्रेयसी ( स० वि०) बहुप्रेयसीयुक्त। बहुभुजक्षेत्र ( संपु०) रेखागणितमें वह क्षेत्र जो चारसे बहुफल (सं० पु०) बहनि फलानि यस्य । १ कदम्य- अधिक रेखाओंसे घिरा हो। बहुभुजा ( स० स्त्री०) बहवः भुजा यस्य । दश भुजा, वृक्ष। २ विकङ्कत, कटाई, बनभंटा। ३ तेजःफलवृक्ष । ४ वंशधान्य । ५ वटवृक्ष। ६ कक्कोल। ७ प्लक्षवृक्ष । दुर्गा । बहुफला (सं० स्त्री० ) बहुफल टाप् । १क्षविका, एक बहुभोजन (स' त्रि०) बहु भोजनं यस्य । १ अतिभोजन- प्रकारका बनभंटा। २ माषपणी, जंगली उड़द। ३ युक्त। (क्ली० ) २ अतिशय भोजन । बहुमञ्जरी ( स० स्त्री० ) बयो मार्यो यस्याः। काकमाची। ४ लपुसी, खीरा। ५ शशाण्डुलो। ६ तुलसी। क्ष कारबेली, छोटा करेला। ७ भूम्यामलकी, भूआंवला । बहुफलिका (सं० स्त्री०) बहुफला संज्ञायां कन्, अत वहुमत (सं० पु०) १ अलग अलग बहुतसे मत, बहुतसे लोगोंकी अलग अलग राय। २ अधिकतर लोगोंका एक इत्वम्। भूबदरी, एक प्रकारका छोटा बेर। बहुफली (स. स्त्री०) एक प्रकारकी जगली गाजर। मत, बहुतसे लोगोंकी मिल कर एक राय । इसका पौधा अजवाइनका-सा पर उससे छोटा होता है। बहुमत्स्य (सक्लो०) बहुमत्स्यशाली जलाशय, वह पत्ते सौंफकी तरह होते हैं और धनियेके फूलोंकेसे पोले पोखरा जिसमें बहुतसी मछलियां हों। प्रकारसे रंगके गुच्छे लगते हैं। उगलोकी तरह या पतली गाजर-बहुमन्तव्य ( स०नि०) बहु-मन-तव्य। बहु सी लंबी जड़ होती है। बीज भूरे हलके और हरसिंगार- मननीय। के बीजोंके जैसे होते हैं। बहुमल ( स० पु० ) बहूति मलानि-यस्य। १ सीसक, बहुफेना (सं० स्त्री०) बहुः फेनोयस्याः। १ सातला, | सीसा नामकी धातु । (नि.)२ अनेक मलयुक्त । पीले दूधवाला थूहर । २ शंखहुली। बहुमान ( स० वि०) बहु-मानं यस्य। १ बहुमानयुक, बाहुबल (संपु०) बहु अतिशयं बलं यस्य। १ सिंह । माननीय। (क्ली० ) २ अधिक मान। (नि.)२ अतिशय बलयुक्त। बहुमानिन् ( स० लि.) बहु-मन-णिनि । अतिशय सम्मा- बहुबल (संपु०) पियासाल। नाह , अधिक आदरणीय। बहुवाहु (सं० पु.) रावण । बहुमान्य ( स० वि० ) बहुभिर्मान्यः। १ भनेक लोक बहुबोज ( स०३०)१ वीजपूरकपक्ष, बिजौरा नीबू । २ कतृक माननीय, जिसका बहुतसे लोक आदर करते हों। बीजबाला केला। ३ शरीफा। २ अतिशय माननीय।