पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/२८७

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सागड़ा-पहिमरोड़ २८१ लिये अन्न भरा रहता हैं जो नीचेको ओरसे गिर कर बड़ी सिलोंके रूपमें पाया जाता है। ४ एक प्रकारका धान। खेतमें पड़ता है । २ नाकके ऊपरका हड्डी जो दोनों इसका चावल बहुत सुगंधित, मुलायम और स्वादिष्ट मथनोंके ऊपर बीचोबीच रहती है । ३ एक प्रकारका होता है। यह विशेषतः संयुक्तप्रान्त । पाया जाता है। छोटा पौधा । इसमें चंपई रंगके बहुत सुन्दर फूल लगते इसका दूसरा नाम बांसफल भी है । ५ एक प्रकारकी हैं। इसके बीज बहुत छोटे और काले रंगके होते हैं। घास । इसके संठल मोटे और कड़े होते हैं, इसीलिये पशु इसकी लकड़ीके कोयलोंसे बारूद बनती है। कम खाते हैं। ६ एक प्रकारका पक्षो । बाँसागड़ा (हिं० पु०) कुश्तीका एक पेत्र । बांसुरी (हिं० स्त्री०) मुहसे फूक कर बजानेका पक बाजा बांसिनी (हिं स्त्री०) एक प्रकारका बांस जिसे बरियाल, जो बांसका बना होता है। इसकी लम्बाई डेढ़ बालिश्त ऊना अथवा कुल्लुक भी कहते हैं। होती है और सिरा बांसकी गांठके कारण बंद रहता है। बांसी-राजपूतानेके उदयपुरके अन्तर्गत बांसी सामन्त- | बंद सिरेकी ओर सात स्वरों के लिये सात छेद होते हैं राज्यकी राजधानी : यह अक्षा० २४२० उ० तथा देशा० और दूसरी ओर एक विशेष प्रकारसे तैयार किया हुमा ७४.२४ पृ० उदयपुर शहरसे ४७ मील दक्षिण-पूर्व में अव बजानेका छेद होता है। उसी छेदवाले सिरेको मुहमें ले स्थित है। जनसंख्या १२६५ है। मेवाड़के उच्चकुलोद्भव कर फूकते हैं और स्वरोंवाले छेदों पर उंगलियां रख एक सम्भ्रान्त व्यक्ति यहांका शासन करते हैं। रावत' कर उसे बन्द कर देते हैं । जब जो स्वर निकालना होता उनकी उपाधि है। इस राज्यमें कुल ५६ ग्राम लगते | है, तब उस स्वरवाले छेद परकी उंगलियां उठा लेते हैं। हैं। राजस्व २४००० रु० हैं जिनमेंसे १६२ रु० वृटिश वंशी देखो। सरकारको देने पड़ते हैं। बांसुली ( हिं० स्त्री० ) १ एक प्रकारको घास जो फसलके वांसी- युक्तप्रदेशके वस्ती जिलेकी एक तहसील । यह | लिये बड़ी ही हानिकारक होती है। २.सुरी देखो। अक्षा० २७ से २७ २८ उ० तथा देशा० ८२.४६ से ४३ बांसुलीकन्द ( हिं० पु० ) एक प्रकारका जंगली सूरन या १४ पू०के मध्य अवस्थित है । भूपरिमाण ६२१ वर्गमील | जमीकंद। यह गलेमें बहुत अधिक लगता है और प्रायः और जनसंख्या ४ लाखसे ऊपर है । इसमें 'उसका'। इसीके कारण खानेके योग्य नहीं होता। नामक एक शहर और १३४३ ग्राम लगते हैं। यह तह- ! बांह (हिं॰ स्त्री० ) १बाहु, भुजा । २ बल, शक्ति, भुजबल । सील उत्तर नेपाल सीमासे ले कर दक्षिण राप्ती नदी तक : ३ कुरते, कमीज, अंगे, कोट आदिमें लगा हुमा वह विस्तृत है। । मोहरीदार टुकड़ा जिसमें बांह डाली जाती है, धास्तीन । २ युक्तप्रदेशके गोरखपुर जिलान्तग त एक नगर और ४ एक प्रकारकी कसरत जो दो आदमी मिल कर करते हैं। बांसी तहसीलका सदर । नदीके दूसरे किनारे नर्कथा ! इसमें बारी बारोसे हर एक आदमी अपनी बांह दूसरेके नामक प्राममें यहाँके राजा रहते हैं। पहले बांसी नगर कंधे पर रखता है इसमें बांहों पर जोर परता है और में ही राजप्रासाद अवस्थित था । पूर्वतन राजदुर्गका ! उनमें बल आता है। ५ सहायक, मददगार। ६ शरण, ध्वंसावशेष आज भी विद्यमान है। इस नगरसे कई एक सहारा, भरोसा। पथ नेपाल, बस्ती, डुमरियागंज, बडूला आदि स्थानों बांहतोड. (हिं० पु०) कुश्तीका एक पेच। इसमें जब तक गये हैं। पहले इन सब स्थानों में शस्यादिका जोरों | गरदन पर जोड के दोनों हाथ आते हैं तब उन हाथों वाणिज्य चलता था, पर अभी उतना नहीं है। परसे अपना एक हाथ उलट कर उसकी जांधमें अड़ा देते बांसी (हिं० स्त्री० ) १ एक प्रकारका मुलायम पतला बांस | हैं और दूसरा हाथ उसको बगलसे ले.जा कर गरदन पर जिससे हुक्के के नेचे आदि बनते हैं। २ एक प्रकारका गेहूं घुमाते हुए उसकी पीठ पर ले जाते हैं। फिर उसे टांगसे जिसकी बाल कुछ काली होती है । ३ एक प्रकारका मार कर गिरा देते हैं। पत्थर। इसका रंग सफेदी लिए पीला होता है और बड़ी बोहमरोग ( हिं० स्त्री०) कुश्तीका एक पेच । इसमें जब Vol. xv, 71