पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/२९०

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


२८४ वाइविस हिस्सेमें स्वीकृत वा प्रामाण्य विषय ( Acknowledged | दिओं के अवरोध तक संगृहीत प्राथना भजनआदि गीत Books) सन्निवेश किये गये हैं और दूसरे में अप्रामाणिक धणित हैं। ये सब भजन जेरुसलेमके मन्दिरमें जोर घा मतभेदयुक्त प्रन्यांशको स्थान दिया गया है । प्रथम जोरसे पढ़े जाते थे।(२) श्रेणीमें उन्होंने केवल सुसमाचार (Gospel ), आदर्श । 'प्रभाव' नामकी पुस्तकमें सलोमनका ज्ञान पुरुषोंकी क्रियावली (Acts of the Apostles ) और गर्भ और उपदेश सूत्र लिखे हुये हैं। इक्लिजियाष्टिस्- पाल, जान पीटर प्रभृति महापुरुषों के पलों का उल्लेख में जगत्का असारत्व और सलोमनकी गोतिमालामें किया है तथा द्वितीय श्रेणीमें कितने ही विषयों को विश्वासियों के प्रति ईसाका प्रेम, धर्मसहायतासे जनसाधारणसे अनुमोदित और कितनेको कृत्रिम तथा जीवात्माका परमात्माके साथ मिलन आदिका वर्णन प्रक्षिप्त बतलाया है। है। कहीं भी उसमें अश्लील रूपसे वर्णन नहीं देखा प्रोटेष्टाण्टों के गृहीत बाइबिल पुस्तकका वर्तमान जाता । तत्पश्चात् इसाया, जेरिमिया, एजिकाएक, अंशसमावेश १५वीं ई०में मार्टिन लूथरके द्वारा सम्पादित दानिएल, होसिया, जोएल, आमोस, ओवादिआ, जोना, हुआ था। पूर्वखण्डकी 'पेन्टाटुक' नामक पञ्च पत्रिका- मिका, नाहुम, हवक्कुक, जेफोनिया, इग्गै, जकारिया और में सृष्टिप्रकरण, अबाहिम प्रवर्तित ऐश्वरिक विधि, उनके | मालाची प्रभृति धर्मवीरों का पुस्तकों में प्रेम, ईश्वरका वंशधरोंका इजिप्ट-गमन, ईश्वरादेशसे उनका देशत्याग, न्यायविचार, मूर्तिपूजाका प्रतिषेध और इदोम, निनिभ सिमिया देशीय वनभ्रमण, कानन-जय, वहीं पर निवास | प्रभृति विध्वस्त नगरों का उल्लेख है। स्थानका निर्माण और उस देशके रहनेवालोंके धर्मकर्म ___उत्तरखण्डके भारम्भमें ही खुष्ट धर्मघोषक ( Evan- में जीवनातिपातके लिये मोजसकी विधि प्रभृति लिपि-giist) मेथु, मार्क, लूक और जान-लिखित पुस्तकमें ईसा- षद्ध हुई हैं । जसूया और जाजस नामके प्रथो में की महिमाका कीतन है। ईसाके दूतो की कार्यावली ईनालराजवंशके स्थापनके पूर्व यहूदियों का इतिहास (Acts of apostles )में यहूदी और जेन्टाइलों के मध्य वर्णित है । इसके बाद रुथका उपाख्यान और उसके साथ खुष्टमहिमा प्रचार, ईसूको ही खुष्टरूपसे कथन और खुष्ट साथ डेभिडके इतिहासका वर्णन देखा जाता है। परवत्ती विश्वासी धर्म सम्प्रदाय आदिका प्रसङ्ग देखा जाता है। सामुएल नामक दो पुस्तकों में साधु सामुएल, राजा तत्पश्चात् पालकी १४, जेम्सकी १, पिटरको २, जूडाकी सल और डेभिडके वर्णन प्रसङ्गमें राजविधि, राज्यस्थापन १ धर्म-प्रचारिणी पत्रिका एवं जानका प्रत्यादेश सर्वशेष और नाना धार्मिक कथा; किंस, क्रोनिकेलस् नामक चार धर्मप्रथ हैं। पुस्तकोंमें इस्राएल और जूडाका राज्यविवरण, सलोमन- ईसाइयोंका बाइविल नामक अंश कब और किस भाषा- का राज्यारोहण, यहूदियोंका अवरोध, आसिरीय, वाबिलो- में लिखा गया था, इस विषयकी आलोचनामें प्रवृत्त हो मीय आक्रमण और यहूदिओं का इधर उधर गमन आदि प्रलतत्यानुसन्धित्सु हिब्र पण्डितगण एवं शब्दविदगण विषय उल्लिखित हैं। इसके परवर्ती इजरा और शब्दशास्त्र के सामंजस्य द्वारा जिस सिद्धान्त पर पहुंचे हैं नेहेमिया नामक दो पुस्तकों में यहूदियों को अवरोध उसका एक पूर्वापर इतिहास यहां पर दिया गया है। मुक्ति और जेरुसलम नगरमें फिरसे राज्यपाट स्थापन, पवित्र बाइविल प्रथके पूर्वखण्डमें हिब्र भाषाके तीन इस्थरमें यहूदियों का अवरोधप्रसङ्ग, जाब(१) नामकी पुस्तकमें केवल धर्म प्रसङ्ग और इसके बाद सामस वा (२) इस अशमें धर्म का उच्छास, ईश्वर-वियोजित गीतिप्रय है। इस शेष प्रथमें डेभिडसे ले कर यहू आत्माको कातरोक्ति, भात्मग्लानि, भगवत्मिलन प्रत्याशा- में परमानंद, ईश्वरवाक्य, सदुपदेश, वाविलनमें कातर यहूदियोंका कंदन, मदिरके संमुख आर्कको देख पुरो- (१) यह ग्रंथ बहुप्राचीन तथा मोजेसका लिखा हुआ हितोंकी आनंदध्वनि प्रभृति करुण-रसात्मक बातोंका है, ऐसा बहुतोंका विश्वास है। वर्णन है।