पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/२९३

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बाएं-पावरगञ्ज २८७ मध्य अन्यान्य लक्षण देखे जाते हैं। इस सम्प्रदायके लोग घटाया जाता है। २ घटानेके बाद बची हुई संख्या या नर-वध तो नहीं करतो, पर नर-देह पानेसे उसका मांस मान । खाते हैं। शवका वस्त्र संग्रह करके उसे पहननेका प्रथा बाकी ( अ० अव्य० ) १ परन्तु, लेकिन । (स्त्री०) २ एक भी इन लोगोंमें प्रचलित है। प्रकारका धान। यद्यपि ये लोग अनेक विषयों में गुप्तरूपसे लोकविरुद्ध बाकुभा (हिं० पु०) कुभीके फूलका सुखाया हुआ केसर । कार्य करते हैं, तो भी लोक-समाजमें उरके मारे कुछ यह खांसी और सीमें औषधको तरह दिया जाता है। कुछ लोकाचारके अनुसार भी चलते हैं। बाकुची ( हि स्त्री० ) सोमराजी। ये लोग केवल लोगोंको दिखाने के लिये तिलक और बाकुर--कटक जिलेके अन्तर्गत एक समुद्रकी खाड़ी। यह माला धारण करते हैं। मालामें स्फटिक, प्रवाल, पद्म- महानदीकी शाखाके मुंहसे संयोजित है। १८६६ ई०में वोज रुद्राक्ष आदि अपरापर वस्तु भी गुंथी रहती हैं। उड़ीसा-दुर्भिक्षके समय अंगरेज गवर्मेण्टने इस खाड़ीके इनके मतसे विग्रह-सेवा वा उपवासादि आवश्यक नहीं मुंह पर एक चावलकी आढ़त खोल दी थी। है। कोई कोई अखाड़ाधारी वाउल विग्रहकी स्थापना बाकुर ( स स्त्री०) भासमान, बहता हुआ । तो करते हैं, पर वह बाउलके मतानुसार दुष्य और निन्द- बाखरगञ्ज--बङ्गाल और आसामके ढाका विभागका एक नीय है। इन लोगों में क्ष्यापा उपाधि भी देखी जाती जिला। यह अक्षा० २१४६ से २३५ उ० तथा देशा० है। फलतः बाउल और क्ष्यापा दोनों एक ही अर्थ ८६५२ से ११२ पृ०के मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण बोधक है। ४५४२ वर्गमील है। इसके उत्तरमें फरीदपुर, पूर्धमें व्रजउपासनातरव, नायिकासिद्धि, रागमयोकणा और मेघना और शाहबाज नदी, दक्षिणमें बङ्गालको खाड़ी तोषिणी आदि इनके कई एक साम्प्रदायिक ग्रन्थ हैं। उन : और पश्चिममें वलेश्वर नदी है । गङ्गा, मेघना और ब्रह्म- ग्रन्थों में इस मतका विशेष वृत्तान्त वर्णित हुआ है। पुत्र नामक प्रधान नदो तथा कुछ छोटी छोटो शाखाएं बाएँ (हि० कि० वि०) बाई ओर, बाई तरफ। जिलेके मध्य हो कर बह गई हैं। पंकके जम जानेसे यहां वाकचाल ( हि० वि० मुंहजोर, बहुत अधिक बोलने धान काफी उपजता है। बाखरगञ्जका बालम चावल वाला। बंगालमें मशहूर है । अंगरेजोंने इसी स्थानको कलकत्ते. बाकरी ( हि० स्त्री० ) पांच महीनेकी ब्याई गाय। का शस्यभडार ( Grain ry of Calcutta ) बतला बाकला ( अपु०) एक प्रकारको बड़ी मटर जिसकी कर उल्लेख किया है। यहांकी प्रायः सभी नदियों में नावें कलियों की तरकारी बनती है। आती जाती हैं। मेघना नदीमें जब बाढ़ उमड, आती बाकली. हि० स्त्री० ) आसाम और मध्यप्रदेशमें बहुता है, तब लोग दंग रह जाते हैं। इस नदीके मुहाने पर यतसे मिलनेवाला एक प्रकारका पक्ष । इसके पत्ते रेशम- बहुतसे छोटे छोटे छोप उत्पन्न हुए हैं। इनमेंसे दक्षिण के कीड़ों को खिलाये जाते हैं। यह वृक्ष बहुत ऊंचा शाहबाजपुर, मानपुर, भादुरा और रावनावाद आदि द्वीप होता है। इसकी लकड़ी भूरे रंगको और बहुत मजबूत हो विशेष उल खयोग्य हैं। सुन्दरी काष्ठ, चावल, होती है। इससे खेतीके अच्छे अच्छे सामान बनते | सुपारी आदिकी दूर दूर देशोंमें बहुतायतसे रफ्तनो हैं। इसकी छालसे चमड़ा सिझाया जाता है। होती है। बाकसी (हिं० कि० ) जहाजके पालको एक ओरसे दूसरी अकबर-सेनापति टोडरमल्लने १५८२ ईमें इस ओर करनेका काम। स्थानको सोनारगांव सरकारके अन्तर्मुक्त कर लिया बाको ( अ० वि० ) १ भवशिष्ट, जो बच रहा हो। (स्रो०)। था। १६५८ ई०में सुलतान सुजाके आदेशसे जब बाखर- २ गणितमें एक प्रकारकी रीति इसके अनुसार किसी गझमें पुनः जरीप-कार्य आरम्भ हुमा, तव सुन्दरवनका एक संख्या या मानको किसी दूसरी संख्या या मालमेसे| वाखरगञ्चाविभाग मुरादखाना कहलाने लगा । १७२१९०में