पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/३०१

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बाछा-बाजार २६५ बाछा (हिं० पु०) १ गायका बच्चा, बछड़ा। २ लड़का, उज्जयिनीकी एक पुष्करिणामें उन दोनोंकी का बनाई गई। बाज़ ( अ० पु०) १ सारे संसारमें मिलनेवाला एक प्रसिद्ध बाजबहादुरचन्द्र----एक हिन्दूराजा, राजचन्द्र के पुत्र, शिकारी पक्षी। यह प्रायः चीलसे छोटा पर उससे निमल्लचन्द्र के पौत्र और लक्ष्मणचन्द्र के प्रपौल। ये अधिक भयंकर होता है। उसका रंग मटमैला, पीठ । स्मृतिकौस्तुभके प्रणेता अनन्तदेवके प्रतिपालक थे। काली और आंखें लाल होती हैं। यह आकाशमें उड़ती बाजरा ( हिं० पु० ) एक प्रकारकी बड़ी घास जिसकी हुई छोटी मोटी चिड़ियों या कबूतरों आदिको झपट कर बालोंमें हरे रंगके छोटे छोटे दाने लगते हैं । सारे उत्तरी, पकड़ लेता है। प्रायः शौकीन लोग इसे दूसरे पक्षियों- पश्चिमी और दक्षिणी भारतमें लोग इसे खाते हैं। का शिकार करनेके लिये पालते भी हैं। इसकी कई अनाज मोटा होता है और इसको खेती बहुत-सी बात में जातियां होती हैं। २ एक प्रकारका बगला। ३ तीरमें , ज्वारकी खेतीसे मिलती जुलती है । यह खरीफकी फसल लगा हुआ पर। (फा०) ४ एक प्रत्यय जो शब्दों के है और प्रायः ज्वारके कुछ पाछे वर्षानुमें बोई जाती अन्तमें लगा कर रखने, खेलने, करने या शौक रखनेवाले है। जाड़े के आरम्भमें इसकी कटनी होती है। इस आदिका अर्थ देता है। जैसे दगाबाज़, नशेबाज़ आदि।' के खेतोंमें खाद देने या सिंचाई करनेको विशेष आवश्य- (फा० वि०) ५ वञ्चित, रहित। (कि० वि०))६ कता नहीं होती। पहले तोन चार बार जमीन जोती बिना, बगैर । ' जाती है और तब बीज बो देते हैं। एकाध बार बाज ( हिं० पु०) १ घोटक, घोड़ा । २ वाद्य, बाजा। ३. निराईकी जरूरत अवश्य पड़ती है। इसके लिये किसी सितारके पांच तारोंमेंसे पहला जो पक्के लोहेका होता बहुत अच्छी जमीनकी आवश्यकता नहीं होती और यह है। ४ बजानेकी रीति । ५ तानेके सूतोंके बीच में देनेकी साधारणसे साधारण जमीनमें भो प्रायः अच्छी तरह लकड़ी। होता है। यहां तक, कि राजपूतानेकी बलुई भूमिमें भी बाजड़ा (हिं० पु. ) बाजरा देखो। | यह अधिकतासे होता है। बाजरेके दानोंका आटा पीस वाज़दावा (फा० पु० ) अपने अधिकारोंका त्याग, अपने कर और उसकी रोटो बना कर खाई जाती है। इसकी दावे या स्वत्त्वसे बाज आना । रोटी बहुत ही बलपूर्वक और पुष्टिकारक मानी जाती बाजना (हिं० कि० ) १ बाजे आदिका बजाना । २ प्रसिद्ध है। कुछ लोग दानों को यों ही उबाल कर और उसमें होना, कहलाना । ३ लड़ना, भिडना। ४ सामने मौजूद : नमक मिर्च आदि डाल कर खाते हैं। कहीं कहीं लोग हो जाना, जा पहुँचना। इसे पशुओं के चारेके लिये ही बोते हैं। इसमें बादी, बाजबहादुर-मालवके अधिपति। १५५४ ई०में ये पिता गरम, रूखा, अग्निदीपक, पित्तवद्ध क, कान्तिानक, बल सुजा खांके सिंहासन पर अधिरूढ़ हुए । इनका पूरा नाम वद्धक और स्त्रियों के कामको बढ़ानेवाला माना गया है। मालिक वैयाजिद था। पेमालवके चतुष्पाववत्ती नाना बाजहर (हिं० पु०) जहरमोश देखो। स्थानोंको जीत कर स्वाधीनभावमें राज्यशासन करते थे। बाजा (हिं० पु० ) बजानेका यन्त्र, वाघ । पाच देखो। सिंहासन पर बैठते समय इन्होंने सुलतान बाजबहादुरका | बाजाब्ता (फा० कि० वि०) १ नियमानुसार, जाब्ते के नाम प्रहण किया। ये रूपमती नामक किसी रमणीके | साथ । (वि०) २ जो नियमानुकूल हो, जो जाब्तेके साथ हो। प्रेममें फंस गये थे। यह बात पश्चिम-भारतमें तमाम बाजार ( फा०पु०) १ वह स्थान जहां सब तरहकी गाई जाती है । १० वर्ष राज्य करनेके बाद सम्राट अकबरने चीजोंकी अथवा किसी एक ही तरहकी चीजकी बहुत- १५७० ई०में उनका राज्य छीन कर अपने राज्यमें मिला सी दुकाने हों। २ वह स्थान जहां किसी निश्चित लिया। पीछे बाजहादुर दिल्ली में अकबरशाहसे मेल समय, वार, तिथि या अवसर आदि पर सब तरहकी रोहतारमवारोही सेनाके नायक हुए थे। मरने पर दूकानें लगती हों, हाट, ।