पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/३१८

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३१२ वान्दा-वापुगोखले स्वयं विद्रोही दलका नेता बन कर अनेक स्थान दखल इनमेसे कुछ हिन्दू और कुछ पुर्तगीज खष्टान देखे कर लिये थे। किन्तु कालजरका दुर्ग उनके हाथसे जाते हैं। जाता रहा था। दूसरे वर्ष विद्रोह शान्तिके साथ जन- | बान्दोगढ़-मध्यप्रदेशके अन्तर्गत एक प्राचीन स्थान । रल हिटलाकने इस स्थान पर अधिकार जमाया। पर्णाशा नदीकी एक शाखा इस नगरके उत्तरपूर्व शोण इस जिलेमें ५ शहर और ११८८ ग्राम लगते हैं । जन- नदीमें जा मिली है। यहां चेदि राजाओंका विख्यात दुर्ग संख्या साढे छः लाखके करीब है। यहां कुल मिला कर आज भी देखने में आता है। १७२ स्कूल और दो अस्पताल हैं। बान्धकिनेय (स.लि.) बन्धक्य अपत्यं पुमान् बन्धकी २ उक्त जिलेबी पश्चिमी तहसील । यह अक्षा० २५ (कल्याण्यादीनामिनङ । पा ४।१।१२६) इति ढक इनङ्च । २० से २५३८ उ० तथा देशा० ७६५६ ८०३२ पू० असतीसुत, जारज। के मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण ४२७ वर्गमील और बान्धव ( स० पु० ) वन्धुरेव बन्धु ( प्रशादिभ्यश्च । पा जनसंख्या लाखके करीब है। इसमें पान्दा नामका १ ५।४।३८ ) इति स्वार्थे-अण । १ भाई बन्धु । २ नातेदार, शहर और ११३ ग्राम लगते हैं। रिश्तेदार। ३ मित्र, दोस्त। ३ उक्त तहसीलका एक शहर। यह अक्षा० १५ बान्धवक ( स० वि० ) बान्धव सम्बन्धीय । २८ उ० तथा देशा० ८० २० पू०के मध्य अवस्थित है। बान्धव्य ( स० क्लो०) जातिसम्पर्क । जनसंख्या प्रायः २१२६५ है । वान्दाके नवाबके राजप्रासाद बान्धुक (स० वि०) बन्धुलवृक्ष सम्बन्धीय । रहनेसे इस नगरका धान्दा नाम पड़ा है। यहां रुईका बान्धुपत ( स० वि० ) बन्धूपति सम्बन्धीय । विस्तृत कारवार है। १८५८ ई०में सिपाहीयुद्धके बाद बाप ( हिं० पु०) पिता, जनक । जब धान्दाके नवाब यहांसे हटा दिये गये, तभीसे इस बापा ( हिं० पु० ) वाप्पा देखो , नगरकी शोभा जाती रही। बान्दाके इस विस्तृत रुई. | बापिका ( स० स्त्री० ) वापिका देखो। का कारबार अभी राजापुर नगरसे परिचालित होता है। वापी (हिं० स्त्री० ) वापी देखो। इस नगरमें ६६ मसजिद, २६१ हिन्दू देवालय कौर ५ बापुरा (हिं० वि०) १ तुच्छ, जिसकी कोई गिनती न हो। जैनमन्दिर विद्यमान हैं। नये प्रोसादका कुछ अंश २ दीन, वेचारा । टूट फूट गया है । अजयगढ़-राजवंशका भग्नप्राय प्रासाद, बापुभांप्रिया-एक दस्युदलके नेता। यह एक महाराष्ट्रीय जैतपुर-राज गुमानसिंहका समाधिमन्दिर और केन तीर- पुलिस जमादारका लड़का था। १८४४ ६०में इसने पत्ती भूरागढ़ दुर्गका ध्वंसावशेष प्रत्नतत्वविदोंको आदर- कालिदस्युगणका दलपति हो कर अंगरेजोंके विरुद्ध णीय वस्तु हैं । शहरमें कुल ११ स्कूल हैं। अस्त्रधारण किया था। क्रमशः इसके उत्पातसे पूना बान्दा-- मध्यप्रदेशके सगौर जिलेकी एक तहसील । यह सतारा आदि जिलोंके प्रायः सभी अधिवासी तंग तंग अक्षा०२३५३ से ३४ ३७ उ० तथा देशा०७८४०से आ गये थे। ७६१३ पू०के मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण ७०४ बापुगोखले-एक महाराष्ट्र सेनापति। पेशवा बाजीनाथ धर्गमील और जनसंख्या प्रायः ७३८२६ है। इसमें घान्दा रघुनाथके समय इन्होंने अच्छी प्रतिष्ठा लाभ की थी। नामक १ शहर और २६६ ग्राम लगते हैं। इस समय महाराष्ट्र-राज्यमें घोर शासनविश्ङ्खलता उप- २ उक्त जिलेका एक नगर और तहसीलका स्थित हुई। नाना फड़नवीस, परशुराम भाव आदिके सदर। प्रधानतालाभके लिये षड़यन्त्र और विभिन्न सरदारों के पान्देकर--बम्बई प्रदेशवासी जातिविशेष। इस जातिके | विद्रोहसे महाराष्ट्रशासन चौपट हो गया था। पेशवा लोग गोआसे लवण, नारियलका तेल, नारियल, खजूर नाममात्रको अधिपति थे, राजकार्य परिचालनका भार आदि द्रष्य धारवाड़ आदि जिलों में बेचने ले जाते हैं।। फूटमीतिविशारद सचिवोंके ऊपर सुपुर्द था । १८०७६०में