पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/३२१

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बावची-पारड़ा लिये यह खलीफा आल अतामूल और खलीफा आल- गिरिमाला। यह समुद्रपृष्टसे ६०० फुट ऊंची है। मुताशिमके विरुद्ध खड़ा हो गया था। कई बार युद्ध में इसके मूलैना गिरि (६३१७ फुट , बावाबूदन ( ६२१४ ) जयी होनेके बाद आखिर यह हैदर-इवन-काउसके हाथसे और कालहत्तीगिरि ( ६१५५ ) नामक तीन शिखर सबसे परास्त हुआ। इस युद्धमें इसके ६० हजार शिष्य मारे ऊँचे हैं। यह पर्वतमाला पश्चिमघाट पर्वतको एक गये। लाखके ऊपर सेनाका निहत और कारारुद्ध होने शाखा मात्र है। इस पर्वतके पूर्वमुखवाले देवीरस्मगढ़ पर यह गर्दियान पर्वतको भाग गया। ८३७ ई० तक . नामक एक शिखर पर दीवाली उत्सबके समय रोशनी यह निरापद रहा। पीछे खलीफा-सेनापति आसिनके की जाती है। पर्वत पर जो वन है उसमें शाल, चन्दन निकट आत्मसमर्पण करनेको वाध्य हुआ। एक दिन आदि मूल्यवान् वृक्ष लाये जाते हैं। यहां कहवेकी खेती जब बाबक खलीफासे मिलने गया, तब खलोफाने पहले बहुतायतसे होती है। बाबा यूदन नामक किसी मुमल- उसके हाथ पांव और पीछे सिर काट कर अपना मतलब मान साधुने यहां कहवा ला कर वन दिया था। उसी निकाल लिया। प्रायः बीस वर्ष तक खलीफाके साथ ! फकोरके नाम पर इस पर्वतका नामकरण हुआ है। बावक लड़ता रहा था । इसको निर्बुद्धितासे प्रायः ढाई दक्षिण ढालुदेशकी गुहा में इसकी समाधि स्थापित है। लाख नरनारी यमपुरको सिधारी थीं। अतिगुण्डिवासी एक मुमलमान कलन्दर उस गुहा- बाबची ( हिं० स्त्री० ) बकुची देखा। मन्दिरके तत्त्वावधायक हैं । वावायूदनका समाधिमन्दिर बाबनपाड़-मन्द्राज प्रदेशके अन्तर्गत एक नगर और हिन्दूके निकट दत्तात्रेयका सिंहासनके नामसे पूजनीय बन्दर। यह अक्षा० १८ ३६ उ० तथा देशा० ८४२२ है। इस पर्वतमें कई जगह लोहेको खान मिलती है। ३० पू०के मध्य अवस्थित है। यहांके अधिवासिगण कालहत्ती नामक गिरिशृङ्ग पर अंगरेजोंका स्वास्थ्य- अधिकांश मत्स्यजीवी हैं। लवणबाणिज्यके लिये यह निवास है। स्थान बहुत कुछ मशहूर है। बावालालगुरु - मालववासीक कवि। इन्होंने हिन्दी बाबनाड़ी-वर्द्धमान जिलेके अन्तर्गत एक प्रसिद्ध ग्राम । भाषामें कविता-पुस्तक लिखी थी। जहांगीर के शासन- यहां स्थानीय द्रष्योंका विस्तृत वाणिज्य होता है। कालमें ये विद्यमान थे। सम्राट् इनकी अच्छी खातिर बाबर-बावर खो। करते थे। बावरची (हिं० पु०) बावरची देखो। बाबिल (हपु.) एशियाखगडका एक अत्यन्त प्राचीन बाबरी ( हिं० स्त्री) लंबे लंबे बाल जो लोग सिरे पर : नगर । यह पहले फारमके पश्चिम फरात नदीके किनारे • रखते हैं, जुल्फ। + अवस्थित था। ३००० वर्ष पूर्व यह एक अत्यन्त सभ्य बाबा ( हि पु.) १ पिता, बाप। २ पितामह, दादा। और प्रतापी जातिकी राजधानी था और उस समय ३ बूढ़ा पुरुष । ४ साधु संन्यासियोंके लिये आदर-सूचक सबसे बड़ा नगर गिना जाता था। शब्द। ५एक सम्बोधन जिसका प्रयोग साधु फकीर वावुना (हिंपु०) एक पक्षी जो पीले रंगका होता है। करते हैं। बाद बिबादमें जब कोई बहुत साधु या शान्त : इसकी आंखके ऊपरका रंग सफेद, चोंच काली और भाव प्रकट करना चाहता है और दूसरेसे न्यायपूर्वक आँख लाल होती हैं। विचार करने या शान्त होनेके लिये कहता है, तब वह बाबुल ( हि० पु० ) १ वावू । २५4 - देखो। प्रायः इसी शब्दसे संबोधन करता है। बाबू ( हिं० पु० ) १ आदर सूचक शब्द, भलामानस । २ बाबा जगजीवनदास-सत्नामी धर्मसम्प्रदायके प्रवत- राजाके नीचे उनके बंधु बांधवों या और क्षत्रिय जमी- यिता । अयोध्याप्रदेशके दरियावाद परगनेमें उनका जन्म दारों के लिये प्रयुक्त शब्द। ३पिताका सम्बोधन । हमा था। सलामी देखो। बाबूड़ा (हि० पु०) धाबूके लिये हास्य, व्यंग्य या घृणासूचक पावाबूदन-महिसुर राज्यके कदूर जिलेमें अवस्थित एक शब्द ।