पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/३३३

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


पारिषि-पारुदखाना ३२७ पारिधि ( स० पु०) वारिधि देखो। बालईपुर- बङ्गाके २४ परगनेके अन्तर्गत एक शहर । यह पारिवाह (हिं. पु०) बादल। . अक्षा० २२२१ उ० तथा देशा० ८८२७०के मध्य पारिश (फा० पु.) १ वृष्टि, वर्षा । २ वर्षाऋतु। अवस्थित है । जनसंख्या प्रायः ४२१७ है । यहां पानकी बारिस्टर (मपु०) वह वकील जिसने विलायतमें रह कर विस्तृत खेती होनेके कारण इसका बाहपुर नाम पड़ा कानून-परीक्षा पास की हो। ये दोवानी फौजदारी और है। यहांके राय चौधरी' वंश प्राचीन जमींदार हैं और माल आदिको सारी छोटी बडी अदालतों में बादी या डायमण्ड हारबर नामक उपविभागका अधिकांश स्थान प्रतिवादीकी ओरसे मामलों और मुकदमोंको पैरवी, । इनके अधिकारमुक्त हैं। बहस तथा अन्य कार्रवाइयां कर सकते हैं। इन्हें वका- चार बारुणी (हिं० स्त्री० ) वारुणी देखो। लतनामे या मुख्तारनामेकी आवश्यकता नहीं पड़ती। बारूद (तु० स्त्री० ) एक प्रकारका चूर्ण या बुकनी जो बारी (हिं स्त्रो०) १ किनारा, तट। २ धार, बाढ़।३ । गन्धक, शोरे और कोयलेको एकमें पीस कर बनती है वह स्थान जहां किसी वस्तुके विस्तारका अन्त हुआ | और आग पा कर भकसे उड़ जाती है । बम, रकेट आदि हो, हाशिया। ४ धगीचे, खेत आदिके चारों ओर रोकके अग्निकोडाविषयक द्रव्य बनानेमें भी इसी मसालेकी जरू- लिये बनाया हुआ घेरा, बाढ़।५ किसी बरतनके महका रत पड़ती है। ऐसा पता चलता है, कि इसका प्रयोग घेरा या छिछले बरतनके चारों ओर रोकके लिये उठा! भारतवर्ष और चीनमें बन्दूक आदि आन्यस्त्र और तमाशे- में बहुत प्राचीनकालसे किया जाता था। अशोकके हुआ घेरा या किनारा । ६ बाटिका, बगीचा । ७ खिड़की, शिलालेखोंमें अग्गिवंध वा अग्निस्कन्ध शब्द तमाशे झरोखा। ८ घर, मकान । । रास्तेमें पड़े हुए भाड़ (आतशबाजो )के लिये आया है। परन्तु इस बातका इत्यादि । १० मेड़ आदिसे घिरा स्थान, क्यारो । ११ जहाजों के ठहरनेका स्थान, बंदरगाह । १२ पारी, पता आज तक विद्वानोंको नहीं लगा, कि सबसे पहले ओसरी। १३ लड़की, कन्या। १५ नवयौवन, थोड़े इसका आविष्कार कहाँ, कब और किसने किया है। वयसको स्त्री । (पु.) १५ एक जाति जो पसल दोने इसका प्रचार यूरोपमें १४वीं शताब्दीमें मूर (अरब) बना कर व्याह शादी आदिमें देती है और सेवा टहल लोगोंने किया और १६वीं शताब्दी तक इसका प्रयोग करती है। पहले इस जातिके लोग बगोचा लगाने और केवल बन्दूकोंको चलानेमें होता रहा। आजकल अनेक प्रकारको बारूदें मोटी, महीन, सम विषम रखेकी बनती उनकी रखवाली आदिका काम करते थे। हैं । संयोजक द्रव्योंकी मात्रा निश्चित नहीं है । देश देशमें बारीक ( फा०वि०) १ जो मोटाई या घेरेमें इतना कम हो, कि छूनेसे हाथमें कुछ मालूम न हो, महीन । २ जिसे प्रयोजनानुसार अंतर रहता है पर साधारण रोतिसे बारूद बनानेमें प्रति सैकड़े ७५से ७८ अंश तक शोरा, समझानेके लिये सूक्ष्म बुद्धि आवश्यक हो, जो बिना | १० वा १२ अंश गन्धक और ११से १२ तक कोयला अच्छी तरह ध्यानसे सोचे समझमें न आए । ३ जिसकी | पड़ता है । ये तीनों पदार्थ अच्छी तरह महीन पीस छान रचनामें दूष्टिकी सूक्ष्मता और कलाकी निपुणता प्रकट हो। कर एकमें मिलाये जाते हैं। बादमें तारपीनका तेल ४ सूक्ष्म, बहुत ही छोटा। ५ जिसके अणु अति सूक्ष्म हों। या स्पिरिट डाल कर चूर्णको भलीभांति मलते पारीका (फा० पु०) बालोंकी वह महीन कलम जिससे | हैं। अनन्तर उसे धूपमें सुखा लेते हैं। तमाशेकी चिनकारीमें पतली पतली रेखाएं खींची जाती हैं। बारूदमें कोयलेकी मात्रा अधिक डाली जाती है। कभी पारीको (फास्त्री०) १ सूक्ष्मता, पतलापन। २ साधा- कभी लोहवुन भी इसलिये डालते हैं, जिससे फूल अच्छ रण दुष्टिसे न समझमें आनेवाला गुण या विशेषता। निकले। भारतवर्ष में अब बारूद बन्दूक के कामकी कम बारीखाना (हिं० पु०) नीलके कारखानेमें वह स्थान जहां बनती है। प्रायः तमाशेकी ही वारूद बनाई जाती है। गोलको बरी या टिकिया सुखाई जाती हैं । बारुदखाना (हिंपु०) वह स्थान जहां गोला, बाद पाई-पईदेखो। मादि लड़ाईका सामान रहता है। . .. . .. '