पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/३३४

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


बाख्दाली-कार्यसमिड-सेक्टा बाबदानी (हिं. स्त्री०) बालरानी देखो। ले कर लौटते समय वे धीणा मदीकी बार- पादपुर-मध्यभारतके अन्तर्गत एक सामन्तराज्य अधोर हो उठे। पीछे उन्होंने बोणाका इस प्रकार साय माकुर नामक सरदारगण द्वारा यह परिचालित होता है। किया था। महापुर देखो।। "वीगा तुम परवीन हो सब नदियों सरदार । बाल-वद्धमान जिलेके अन्तर्गत एक लौहक्षेत्र। यह मावनमें आवम् भयो हमें लगादो पार ॥" अक्षा० २३.४४ उ० तथा देशा० ८७ पू०के मध्य कहते हैं, कि उनकी इस स्तुतिसे वीणा प्रसन्न हुई। अवस्थित है। इस विस्तीर्ण भूभागमें खनिज लौह प्रचुर। थो। मदीको बाढ़ घट जानेसे वे कुशलपूर्णक स्वराज्य परिमाणमें पाया जाता है। मिः डेमिड स्मिथने इस लौटे। स्थानका परिदर्शन कर गवर्मेण्टको जो रिपोर्ट दी उससे बार्कण्डमएड-(Edmond Burke )-कोई अंगरेज राज जाना जाता है, कि प्रति वर्गमीलमें प्रायः ६०॥ लाख टन नैतिक । इनके पिता एक सामान्य व्यवहारजीवी थे। व मिश्रित लोहा मिलता है। उसे गलानेसे कमसे कम | लिन विश्वविद्यालयमें रह कर इन्होंने विद्या उपार्जन की। १६ लाख टन शुद्ध लोहा उत्पन्न हो सकता है। १७५७ ई०में 'भिण्डिकेशन आव नेचरल सोसाइटी' तथा बारे (फा० कि० वि० ) अन्तको। 'महत् और सुन्दर' नामक प्रबन्ध लिख कर ये जन- बारेमें (फा० अव्य०) प्रसङ्गमें, विषयमें । साधारणमें विशेष प्रसिद्ध हो गये हैं। लार्ड नार्थके बारोमोटर ( ० पु० ) बैरोमीटर देखो। काम छोड़ने पर १७८२ ई०में ये सेनाविभागके घेतन- बारो-बुन्देलखण्डके अन्तर्गत ज्ञाननाथ पर्वतके पाद- दाता-पद पर अधिष्ठित हुए। इस समय प्रिमि- मूलस्थ ह्रदके किनारे अवस्थित एक प्राचीन नगर । यह कौन्सिल सभामें भी इनको आसन दिया गया। दूसरे बारनगर नामसे मशहूर है। गोदारिया जाति द्वारा वर्ष लाई शेलवोर्णके राजकोष-कर्ता होने पर इन्होंने काम स्थापित गदरमर नामक देवमन्दिर तथा इधर उधर पड़े करना छोड दिया। भारतवर्ष में अगरेज शासनकर्ता हुए प्रस्तर स्तम्भादि यहांकी पूर्वकीर्तिकी घोषणा करते वारेन हेष्टिसके अन्याय शासनसे कुछ हो इन्होंने सार्थ- हैं। उस मन्दिरके तथा निकटवत्ती गणेश-मन्दिरके गानमें शून्यहृदयसे जो राजनैतिक वक्तृता ( Burke's impea- भष्टशक्ति तथा नवग्रहादि मूर्ति खोदित देखी जाती है। chment on warren Hastings ) दी थी, उसीसे वे पार्शवत्तों जैन-मन्दिरको गठन देखनेसे मालूम होता है, जगद्वासीकी श्रद्धाके पाल हुए थे। विख्यात फरासी- कि उन प्राचीन प्रस्तरादिसे ये सब गठित या संस्कृत | विप्लवका दोष दिखा कर इन्होंने १७६० ईमें जो शामपर्म हुए हैं। यहां ६३३ सम्बत्में यदुकुलतिलक तोमरर जाओं- | प्रबन्ध लिखा है, (Reflection on the French Revo- के समयमें उत्कीर्ण एक शिलालिपि पाई गई है। इससे | lution ) वह इनके ज्ञान वा बुद्धिका प्रकृत परिचय है। अनुमान किया जाता है, कि मालवके यमराजाओंके पहले १७६४ ईमें इन्होंने पार्लियामेण्टका आसन त्याग किया। यहां तोमरवंशीय राजाओंका अभ्युदय हुआ था। उक्त वृद्धावस्था में मुशिक्षित पुत्रकी मृत्यु हो जानेसे इनका हृदके उत्तरी किनारे एक वैष्णव-मन्दिर है जिसके सामने- हृदय चूर चूर हो गया और इसोसे उनकी मृत्यु भी वाले छत पर दश अवतार मूर्ति और उसके पार्शमें | हुई। डाः जनसन, लार्ड मेकले आदि मनीषिगण इन षोल-खाम्बि नामक चांदनी स्थापित है। की वाग्मिता और शब्दसनिवेशको भूरि भूरि प्रशंसा कर ___ यहांसे १॥ कोस उत्तर पखेरी नामक प्राम है जो गपे हैं। १७३००में उबलिन नगरमें उनका जन्म और एक समय इसीके अन्तभुक था। सम्राट औरङ्गजेबके १७०१०मैं बेकन्सफिल्ड नगर में इनकी जीवनलीला शेष राज्यकालमें बुन्दला-सरदार छलशालको अब इस हुई। अपरको समृद्धिका पता लगा तब उन्होंने दलबलके वार्थलमिउ-सेएट-पक या साधु। बहुतेरे हो साथ आ कर इसे अच्छी तरह भूटा । लूट mi न्याथानेल समझते हैं। ये अरब, अर्मेणिय र प्रा